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दिवाली से ज्यादा 'जहरीली' हवा, 13,500 लोगों का दम फूला, इतना बढ़ा प्रदूषण
Wed, 30 Oct 2019 05:11 PM IST
Abhishek Saxena
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
Published by: Abhishek Saxena
Updated Wed, 30 Oct 2019 05:11 PM IST
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ताजमहल
- फोटो : अमर उजाला
दिवाली से भी ज्यादा जहरीली हवा भाई दूज के दिन रही। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ओर से जारी की गई वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) रिपोर्ट में आगरा का एक्यूआई 231 दर्ज किया गया है।
यह दिवाली पर 179 था। ताजनगरी में जहरीली हवा के कारण मंगलवार को साढ़े 13 हजार से अधिक लोगों का दम फूला। एसोसिएशन ऑफ चेस्ट फिजीशियंश ऑफ आगरा की रिपोर्ट के अनुसार मंगलवार को दमा, सांस और एलर्जी के साढ़े तेरह हजार से अधिक मरीजों ने चिकित्सकों से परामर्श लिया।
दिवाली के एक दिन बाद गोवर्धन पूजा पर चले पटाखों के कारण भाई दूज पर प्रदूषण स्तर में इजाफा हुआ। सबसे ज्यादा पर्टिकुलेट मैटर 2.5 के स्तर में बढ़ोतरी हुई जो औसतन 231 तक रहा, जबकि अधिकतम यह 393 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर तक पहुंचा।
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यह दिवाली पर 179 था। ताजनगरी में जहरीली हवा के कारण मंगलवार को साढ़े 13 हजार से अधिक लोगों का दम फूला। एसोसिएशन ऑफ चेस्ट फिजीशियंश ऑफ आगरा की रिपोर्ट के अनुसार मंगलवार को दमा, सांस और एलर्जी के साढ़े तेरह हजार से अधिक मरीजों ने चिकित्सकों से परामर्श लिया।
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दिवाली के एक दिन बाद गोवर्धन पूजा पर चले पटाखों के कारण भाई दूज पर प्रदूषण स्तर में इजाफा हुआ। सबसे ज्यादा पर्टिकुलेट मैटर 2.5 के स्तर में बढ़ोतरी हुई जो औसतन 231 तक रहा, जबकि अधिकतम यह 393 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर तक पहुंचा।
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स्वास्थ्य के लिहाज से पीएम 2.5 की यह मात्रा बेहद खतरनाक है। कार्बन मोनोक्साइड की मात्रा में भी इजाफा हुआ है। शहर में अधिकतम स्तर 131 तक जा पहुंचा, जबकि सामान्य तौर पर यह 4 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर होना चाहिए था। करीब 33 गुना ज्यादा कार्बन मोनोक्साइड मंगलवार को ताजनगरी में रही। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के मुताबिक एयर क्वालिटी इंडेक्स खराब श्रेणी में है।
हवा न चलने से असर ज्यादा
पर्यावरण विशेषज्ञों के मुताबिक दिवाली पर धुंध छाने और बादलों के छा जाने से मौसम में एकाएक परिवर्तन आ गया। पटाखों के प्रदूषण और कूड़े में आग लगाने से जो धुंआ निकला, उससे स्मॉग बना। यह ऊपर नहीं जा सका। हवा की रफ्तार बेहद कम होने से प्रदूषण तत्व नीचे ही जमा हो गए जो सांस के साथ लोगों के फेंफड़ों में पहुंचकर मुसीबत बढ़ाते रहे।
हवा न चलने से असर ज्यादा
पर्यावरण विशेषज्ञों के मुताबिक दिवाली पर धुंध छाने और बादलों के छा जाने से मौसम में एकाएक परिवर्तन आ गया। पटाखों के प्रदूषण और कूड़े में आग लगाने से जो धुंआ निकला, उससे स्मॉग बना। यह ऊपर नहीं जा सका। हवा की रफ्तार बेहद कम होने से प्रदूषण तत्व नीचे ही जमा हो गए जो सांस के साथ लोगों के फेंफड़ों में पहुंचकर मुसीबत बढ़ाते रहे।
पटाखों के धुएं से दमा और सांस रोगियों की मुसीबत और बढ़ गई। दो दिन में सरकारी और प्राइवेट चिकित्सकों पर मंगलवार को मरीजों की संख्या पांच से आठ फीसदी तक बढ़ी। एसोसिएशन ऑफ चेस्ट फिजीशियंश ऑफ आगरा की रिपोर्ट के अनुसार मंगलवार को दमा, सांस और एलर्जी के मरीजों की संख्या साढ़े तेरह हजार के पार कर गई।
इनमें से 167 मरीज एसएन कॉलेज की मेडिसिन और वक्ष रोग विभाग में आए। इनमें 70 मरीज वक्ष रोग के रहे, इनमें से दो को भर्ती करना पड़ा। एसोसिएशन के सचिव डॉ. संजीव आनंद ने बताया कि स्मॉग भी होने लगा है और पटाखों का धुआं पहले से है, इससे सूखी खांसी, सीने में जकड़न, छींकें आना, छाती में दर्द की परेशानी वाले मरीज रहे।
एसएन वक्ष रोग विभागाध्यक्ष डॉ. संतोष कुमार ने बताया कि दमा और सांस के पुराने मरीजों का मर्ज बढ़ा हुआ मिला। इनके सांस नलिकाओं में संक्रमण मिला, इनमें से दो मरीज भर्ती करने पडे़।
इनमें से 167 मरीज एसएन कॉलेज की मेडिसिन और वक्ष रोग विभाग में आए। इनमें 70 मरीज वक्ष रोग के रहे, इनमें से दो को भर्ती करना पड़ा। एसोसिएशन के सचिव डॉ. संजीव आनंद ने बताया कि स्मॉग भी होने लगा है और पटाखों का धुआं पहले से है, इससे सूखी खांसी, सीने में जकड़न, छींकें आना, छाती में दर्द की परेशानी वाले मरीज रहे।
एसएन वक्ष रोग विभागाध्यक्ष डॉ. संतोष कुमार ने बताया कि दमा और सांस के पुराने मरीजों का मर्ज बढ़ा हुआ मिला। इनके सांस नलिकाओं में संक्रमण मिला, इनमें से दो मरीज भर्ती करने पडे़।
यह बरतें सावधानी:
- सांस-दमा मरीज सुबह और शाम बाहर जाने से बचें।
- पालतू जानवरों को बेड रूम से दूर रखें, कॉकरोच से बचाव को दवा छिड़कें।
- घर से बाहर जाते वक्त मुंह पर रुमाल या मास्क लगा सकते हैं।
- दवाएं नियमित लें, चिकित्सकीय परामर्श पर इन्हेलर की बढ़ा दें।
- गर्म कपड़े निकालें तो उसे पहले अच्छी तरह से धूप लगा लें।
डॉ. जीवी सिंह, वक्ष एवं क्षय रोग विभाग के अनुसार
- सांस-दमा मरीज सुबह और शाम बाहर जाने से बचें।
- पालतू जानवरों को बेड रूम से दूर रखें, कॉकरोच से बचाव को दवा छिड़कें।
- घर से बाहर जाते वक्त मुंह पर रुमाल या मास्क लगा सकते हैं।
- दवाएं नियमित लें, चिकित्सकीय परामर्श पर इन्हेलर की बढ़ा दें।
- गर्म कपड़े निकालें तो उसे पहले अच्छी तरह से धूप लगा लें।
डॉ. जीवी सिंह, वक्ष एवं क्षय रोग विभाग के अनुसार