Election 2024: मुस्लिम वोटों के लिए अपनी-अपनी गोटी सेट करने में जुटे सियासी दल, बिछा रहे ध्रुवीकरण की बिसात
Election 2024: मुस्लिम वोटों के लिए सियासी दल अपनी-अपनी गोटी सेट करने में जुटे हैं। वह ध्रुवीकरण की बिसात बिछा रहे हैं। सपा-बसपा के साथ भाजपा भी इसी रस्साकशी में जुटी है।
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ब्रज क्षेत्र के आगरा, फिरोजाबाद, मथुरा, मैनपुरी और एटा लोकसभा सीट पर चुनावी माहौल गरमाने लगा है। मथुरा में दूसरे और अन्य सीटों पर तीसरे चरण में चुनाव है। वोटों के धुव्रीकरण की जोर आजमाइश शुरू हो चुकी है। आगरा, फिरोजाबाद, एटा और मैनपुरी सीट पर मुस्लिम मतदाताओं की संख्या काफी है। 2019 में सपा और बसपा का गठबंधन था। माना जा रहा है कि तब मुस्लिम वोटर गठबंधन के साथ चले गए थे।
आगरा सीट के समीकरण की बात करें तो यहां 37 फीसदी वोटर दलित और मुस्लिम ही हैं। आगरा लोकसभा क्षेत्र में 5 विधानसभा क्षेत्रों में बीएसपी का फोकस मुस्लिम मतदाताओं पर रहेगा। फिरोजाबाद लोकसभा सीट पर यादव और मुस्लिम मतदाताओं की संख्या काफी अधिक है। करीब दो लाख मुस्लिम मतदाता हैं। यहां मुस्लिम मतदाताओं का रूख ही हार-जीत तय करता है। इस वोट के बिखराव और एकजुट होने की स्थिति में समीकरण बदल जाते हैं। मैनपुरी में माना जाता रहा है कि मुस्लिम मतदाता सपा के पक्ष में जाते हैं।
सपा ने नाराज मुस्लिम नेताओं को मनाया
ब्रज क्षेत्र में फिरोजाबाद लोकसभा क्षेत्र में सबसे अधिक मुस्लिम मतदाता हैं। 2019 का चुनाव सपा हार गई थी जबकि 2014 में मोदी लहर में भी सपा के राष्ट्रीय महासचिव प्रोफेसर रामगोपाल यादव के पुत्र अक्षय यादव जीत गए थे। प्रोफेसर रामगोपाल यादव के लिए यह चुनाव प्रतिष्ठा का सवाल है। यही वजह है कि चुनाव की घोषणा से पहले ही सपा नेताओं ने जिले के नाराज मुस्लिम नेताओं को मना लिया।
सपा से नाराज होकर बसपा में गए पूर्व विधायक अजीम भाई की पार्टी में वापसी हुई। अजीम भाई की मुस्लिम मतों पर अच्छी पकड़ मानी जाती है। पार्षद कासिम सिद्दकी ने तो अक्षय यादव के खिलाफ मुस्लिम क्षेत्रों में होर्डिंग्स लगवा दिए थे। सपा नेताओं ने आवास पर जाकर उन्हें भी मना लिया।
जनकल्याणकारी योजनाओं का वास्ता देकर भाजपा की भी नजर
मुस्लिम आबादी को सरकार की कल्याणकारी योजनाओं का लाभ खूब मिला है। ब्रज क्षेत्र में बहुत कम मुस्लिम मतदाता ही नौकरीपेशा हैं। अधिकांश छोटे-छोटे रोजगार से जुड़े हैं या कामगार हैं। सरकारी योजनाओं का लाभ मुस्लिम महिलाओं को भी भरपूर मिला है।
भाजपा लाभार्थियों को अपना वोट बैंक मान रही है। पिछले चुनाव में मुस्लिम बाहुल्य बूथों पर भी भाजपा को वोट मिले थे। इसके पीछे बड़ी वजह फ्री राशन, आवास योजना और तीन तलाक का मुद्दा बताया गया था। इस बार भी भाजपा की नजर मुस्लिम गढ़ों पर है।