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आगरा बस हादसा: पुलिस की घोर लापरवाही, 29 लोगों की मौत के 16 दिन बाद दर्ज की रिपोर्ट
Fri, 26 Jul 2019 01:38 PM IST
मुकेश कुमार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
Published by: मुकेश कुमार
Updated Fri, 26 Jul 2019 01:38 PM IST
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आगरा बस हादसा
- फोटो : अमर उजाला
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यमुना एक्सप्रेसवे पर रोडवेज बस हादसे के मामले में पुलिस ने रिपोर्ट 16 दिन बाद गुरुवार को दर्ज की है। वो भी तब जब मृतकों के आश्रितों ने अधिकारियों को फोन कर बताया कि रिपोर्ट न होने के कारण उन्हें बीमा राशि नहीं मिल पा रही है। यह रिपोर्ट भी पुलिस ने अपनी ओर से दर्ज नहीं की है बल्कि मौके पर सबसे पहले पहुंचे युवक निहाल सिंह से तहरीर ली है।
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हादसा आठ जुलाई की सुबह सवा चार बजे हुआ था। लखनऊ से दिल्ली जा रही अवध डिपो की बस संख्या यूपी 33 एटी 5877 आगरा के थाना एत्मादपुर क्षेत्र में झरना नाला में गिर गई थी। 29 लोगों की मौत हो गई थी, जबकि 25 गंभीर रूप से घायल हुए थे।
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बस ड्राइवर कृपाशंकर चौधरी निवासी गांव गिरधार थाना रूधौली जिला बस्ती की भी मौके पर ही मौत हो गई थी। पुलिस ने उस दिन दुर्घटना का केस दर्ज करने के बजाय सिर्फ जीडी में तस्करा लिख दिया था।
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पुलिस सूत्रों ने बताया कि मृतकों के परिजनों ने बीमा के लिए क्लेम किया तो बीमा कंपनियों ने बताया कि दुर्घटना की एफआईआर होना जरूरी है। इन लोगों ने पुलिस अधिकारियों को फोन किया। इसके बाद पुलिस ने गांव चौगान की ठार से निहाल सिंह की तहरीर पर गुरुवार को केस दर्ज किया है।
हमने दुर्घटना को इत्तफाकिया माना - इंस्पेक्टर
एत्मादपुर थाना के प्रभारी निरीक्षक से एफआईआर में देरी पर सवाल किए गए तो जवाब इस तरह मिले-
सवाल: आपने दुर्घटना वाले दिन ही एफआईआर दर्ज क्यों नहीं की?
जवाब : यह इत्तफाकिया घटना थी, लोगों ने बताया था कि ड्राइवर की झपकी से हादसा हुआ, इसलिए तस्करा डाल दिया था।
सवाल: आपने केस दर्ज कर जांच करने से पहले ही कैसे मान लिया कि हादसा झपकी से हुआ था?
जवाब : ऐसा लोग बता रहे थे, इसी आधार पर मान लिया गया।
सवाल: लेकिन जांच तो केस दर्ज करने के बाद ही होती है? फिर इसमें ऐसा क्यों नहीं हुआ?
जवाब : ऐसे मामलों में इसी तरह तस्करे लिखे जाते हैं, दुर्घटना का कारण अज्ञात हो, तब केस दर्ज किया जाता है।
सवाल: अगर ऐसा है तो अब केस दर्ज क्यों किया है?
जवाब : अब तहरीर मिली है, इसलिए रिपोर्ट दर्ज कर ली है।
सवाल: आपने दुर्घटना वाले दिन ही एफआईआर दर्ज क्यों नहीं की?
जवाब : यह इत्तफाकिया घटना थी, लोगों ने बताया था कि ड्राइवर की झपकी से हादसा हुआ, इसलिए तस्करा डाल दिया था।
सवाल: आपने केस दर्ज कर जांच करने से पहले ही कैसे मान लिया कि हादसा झपकी से हुआ था?
जवाब : ऐसा लोग बता रहे थे, इसी आधार पर मान लिया गया।
सवाल: लेकिन जांच तो केस दर्ज करने के बाद ही होती है? फिर इसमें ऐसा क्यों नहीं हुआ?
जवाब : ऐसे मामलों में इसी तरह तस्करे लिखे जाते हैं, दुर्घटना का कारण अज्ञात हो, तब केस दर्ज किया जाता है।
सवाल: अगर ऐसा है तो अब केस दर्ज क्यों किया है?
जवाब : अब तहरीर मिली है, इसलिए रिपोर्ट दर्ज कर ली है।