यूपी: आजादी के एक साल बाद बना यह रेलवे स्टेशन, आज तक नहीं बिका प्लेटफॉर्म टिकट
एटा रेलवे स्टेशन पर लोग बिना टिकट के बेरोक-टोक आते हैं और घंटों आराम फरमाते हैं। इस पर न रेलवे अधिकारी गंभीर हैं और न ही जीआरपी।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
रेलवे की ओर प्लेटफॉर्म टिकट की कीमत बढ़ाए जाने को लेकर देशभर में हाय-तौबा मची है। लेकिन एटा जिले के लोगों को इससे कोई फर्क नहीं पड़ता। कारण, शहर स्थित रेलवे स्टेशन पर लोग बिना टिकट ही आते हैं और घंटों तक आराम भी फरमाते हैं। यह स्थिति अब की नहीं, इतिहास के पन्नों में भी इस स्टेशन पर कोई प्लेटफॉर्म टिकट नहीं बिका है।
वर्तमान में यहां आगरा और टूंडला से दो सवारी गाड़ी का आवागमन कराया जा रहा है। हालांकि कोविड संक्रमण के चलते इस समय यात्रियों की संख्या कम है। लेकिन कुछ दिन पहले तक हर दिन यहां से चढ़ने-उतरने वाले लोगों की संख्या 1500 से ऊपर थी। उन्हें छोड़ने और लेने के लिए भी खूब लोग आते।
नियमानुसार यात्रा न करने वाले व्यक्ति को स्टेशन में दाखिल होने के लिए प्लेटफॉर्म टिकट लेना अनिवार्य है जिसकी कीमत यहां 20 रुपये है। लेकिन व्यवस्थाओं की सुस्ती के चलते हालात यह हैं कि लोग बिना टिकट न सिर्फ आते-जाते हैं, यहां आराम भी करते हैं। इसे लेकर रेलवे स्टेशन के अधिकारी भी गंभीर नहीं है।
1949 में बना था यह स्टेशन
आजादी के कुछ समय बाद ही 1949 में इस रेलवे स्टेशन को बनाया गया था। वर्ष 1953 में एटा निवासी रेल राज्यमंत्री रोहनलाल चतुर्वेदी ने जिले को एटा-टूंडला पैसेंजर ट्रेन की सौगात दी। लेकिन इसके बाद रेल का सफर ठहर गया। ट्रेन बढ़ाने और लाइन विस्तार की मांग चलती रही।
गांव बढ़ौली निवासी एनएम धर्मवेदी ने बताया कि प्लेटफॉर्म टिकट की व्यवस्था यहां लागू है, इसकी जानकारी हमें नहीं है। किसी ने आज तक इसके लिए टोका भी नहीं। रविकांत ने कहा कि प्लेटफॉर्म पर सुविधाओं के नाम पर कुछ भी नहीं है। ऐसे में कोई प्लेटफॉर्म टिकट क्यों खरीदे? चेकिंग का भी डर नहीं होता।
स्टेशन अधीक्षक विजय सिंह वर्मा ने कहा कि आज तक स्टेशन पर प्लेटफॉर्म टिकट नहीं बिका है। दबाव दिए जाने पर लोग लड़ने को आमादा हो जाते हैं। जीआरपी थाना प्रभारी प्रताप सिंह ने कहा कि स्टेशन और प्लेटफॉर्म चारों ओर से खुला हुआ है, जिसके चलते चेकिंग मुश्किल है। हालांकि यह काम भी रेलकर्मियों का है।