फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Agra News ›   planting fruitful plants in jungle for solve monkey problem in agra mathura

बीहड़ में लगाएं बेर, अमरूद और गूलर, शहर से दूर होंगे बंदर, जानें किसने दिया यह सुझाव

Sat, 12 Oct 2019 01:29 PM IST
मुकेश कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा Published by: मुकेश कुमार Updated Sat, 12 Oct 2019 01:29 PM IST
विज्ञापन
planting fruitful plants in jungle for solve monkey problem in agra mathura
फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला
कचरे में खाने की तलाश करने वाले बंदरों को यदि बीहड़ या वन क्षेत्र के जंगलों में बेर, अमरूद, गूलर जैसे फल मिल जाएंगे तो वे शहर से दूर हो जाएंगे। नमामि यमुना योजना में बबूल के जंगल, बीहड़ और नदियों के खादर में फलदार पौधे लगाने पर जोर दिया जा रहा है, जो आगरा-मथुरा जैसे शहरों में बंदरों की बड़ी समस्या भी दूर कर सकते हैं।
विज्ञापन


यह सुझाव वन अनुसंधान केंद्र, प्रयागराज के विशेषज्ञ डॉ. संजय सिंह और डॉ. कुमुद दुबे ने शुक्रवार को नमामि यमुना प्रोजेक्ट की डीपीआर के लिए हुई वर्कशॉप में दिए। वन अधिकारियों के साथ टूरिस्ट बंगले में हुई वर्कशॉप में यमुना का प्रदूषण बायो री-मेडिएशन, रिवरफ्रंट के जरिए कम करने पर चर्चा हुई। 
विज्ञापन


इसमें डीपीआर में वन चेतना केंद्रों को फिर पनपाने, बीहड़ों में तालाब, हर जिले में रेस्क्यू वैन और पिंजरा, यमुना घाट के पास हरियाली विकसित करने, किनारों पर पौधे लगाने के सुझाव दिए गए। यह रिपोर्ट मार्च तक मंत्रालय को सौंप दी जाएगी।
विज्ञापन
विज्ञापन

 
वर्कशॉप में अपर प्रधान वन संरक्षक के प्रवीन राव ने वन विभाग की नर्सरी में फलदार पौधों को अनिवार्य करने के निर्देश दिए। इस दौरान डीएफओ मनीष मित्तल, डीएफओ मथुरा मुकेश शर्मा सहित आगरा, फिरोजाबाद और मथुरा के एसडीओ और रेंजर मौजूद रहे।

बीहड़ का ईको सिस्टम बदल देंगे नाले

शहर से जो नाले यमुना नदी में गिरकर उसे प्रदूषित कर रहे हैं, वह बीहड़ का ईको सिस्टम बदलने में कारगर साबित हो सकते हैं। वन अनुसंधान केंद्र, प्रयागराज के विशेषज्ञ डॉ. संजय सिंह ने बताया कि बेहद प्राकृतिक तरीके से चार चरणों में नालों का पानी न केवल साफ होगा, बल्कि बीहड़ में चौड़ी पत्ती वाले पौधों के लिए उपयुक्त नमी भी बन पाएगी।

जिससे बबूल की जगह फलदार पौधों का हरा-भरा जंगल पनप सकेगा। आगरा में ककरैठा आर्द् क्षेत्र की तर्ज पर नालों का पानी साफ होकर यमुना में पहुंचे, नमामि यमुना प्रोजेक्ट में यह शामिल होगा।

मथुरा की तर्ज पर यमुना के खादर में पौधरोपण

मथुरा में यमुना नदी 134 किमी लंबाई में बहती है। इसके किनारों पर खादर है, जहां 400 हेक्टेयर जमीन पौधरोपण के लिए डीएम ने वन विभाग को दी है। यमुना और इसकी सभी सहायक नदियों के लिए 25 जिलों में तैयार किए जा रहे प्रोजेक्ट में आगरा, फिरोजाबाद में भी खादर की जमीन पर पौधरोपण किया जा सकता है। नदी के दोनों किनारों पर पांच-पांच किमी दूरी तक पौधरोपण का प्रावधान रहेगा।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed