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पितृपक्ष और नवरात्र के बीच अबकी एक दिन नहीं, एक महीने का अंतर, 165 साल बाद बना संयोग
Tue, 01 Sep 2020 12:03 AM IST
मुकेश कुमार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
Published by: मुकेश कुमार
Updated Tue, 01 Sep 2020 12:03 AM IST
सार
165 साल बाद बना यह संयोग, अधिमास के कारण चातुर्मास पांच माह का
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पितृपक्ष
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विस्तार
इस बार पितृपक्ष और शारदीय नवरात्र के बीच एक दिन नहीं, एक महीने का अंतर होगा। ऐसा अश्विन अधिमास होने के कारण होगा। इस मास में दो कृष्ण पक्ष और दो शुक्ल पक्ष होंगे। पितृपक्ष दो सितंबर से शुरू होकर 17 सितंबर तक चलेंगे। 17 को पितृ विसर्जन अमावस्या है। अधिक मास के कारण चार्तुमास इस बार चार की जगह पांच महीने का होगा।
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आगरा की ज्योतिषाचार्य पूनम वार्ष्णेय ने बताया कि पितृपक्ष में यह स्थिति 165 साल बाद बनी है। तीन साल में एक अधिमास अधिक आता है। इसलिए इसे अधिमास कहते हैं।
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महंत पंडित ज्ञानेश शास्त्री का कहना है कि भाद्रपद महीने की पूर्णिमा से लेकर आश्विन मास की अमावस्या तक पितृपक्ष रहता है। श्राद्ध पक्ष में चावल, जौ, तिल, पुष्प, चंदन, कुशा व दूध से पितरों का तर्पण करें। कोरोना काल में ब्राह्मणों को सूखा अन्न और दूध से बने पदार्थ प्रदान करें ।
श्राद्ध कर्म का पालन पुराणों में बताया गया आवश्यक
ज्योतिषाचार्यों ने बताया कि पितृपक्ष में पितृ ऋण से मुक्त होने के लिए पुत्र को श्राद्ध कर्म का पालन पुराणों में आवश्यक बताया गया है । गरुण पुराण में कहा गया है कि जिस तिथि पर पितृ पृथ्वी को त्यागकर परलोक जाते हैं पितृ पक्ष की उसी तिथि पर पितृगण वायु रूप धारण करके घर के दरवाजे पर दस्तक देते हैं ।
कौवा, गाय, कुत्ता, चींटी को सर्वप्रथम ग्रास प्रदान करें
पंडित मदन मोहन रावत ने बताया कि पितृ पक्ष में श्राद्ध के 15 दिनों में श्राद्ध कर्म, पिंडदान और तर्पण का अधिक महत्व माना जाना है।
संबंधित खबर- Pitru Paksha 2020: कब से आरंभ हैं श्राद्ध पक्ष, जानिए क्यों किया जाता है श्राद्ध ?
ज्योतिषाचार्यों ने बताया कि पितृपक्ष में पितृ ऋण से मुक्त होने के लिए पुत्र को श्राद्ध कर्म का पालन पुराणों में आवश्यक बताया गया है । गरुण पुराण में कहा गया है कि जिस तिथि पर पितृ पृथ्वी को त्यागकर परलोक जाते हैं पितृ पक्ष की उसी तिथि पर पितृगण वायु रूप धारण करके घर के दरवाजे पर दस्तक देते हैं ।
कौवा, गाय, कुत्ता, चींटी को सर्वप्रथम ग्रास प्रदान करें
पंडित मदन मोहन रावत ने बताया कि पितृ पक्ष में श्राद्ध के 15 दिनों में श्राद्ध कर्म, पिंडदान और तर्पण का अधिक महत्व माना जाना है।
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