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खातीपाड़ा के पथवारी मंदिर में पूजा की अनुमति
अमर उजाला ब्यूरो आगरा।
Updated Wed, 29 Mar 2017 12:58 AM IST
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मंदिर में दिन भर गूंजे देवी मां के जयकारे
- फोटो : अमर उजाला
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खातीपाड़ा में सोमवार रात बवाल का सबब बने पथवारी मंदिर विवाद का हल निकाल लिया गया है। पुलिस-प्रशासन ने मंगलवार सुबह दोनों पक्षों से वार्ता के बाद मंदिर में फिर से पूजा शुरू कराए जाने की अनुमति दे दी। इसके लिए परंपरा का हवाला दिया गया है। अधिकारियों का कहना है कि इसके तमाम साक्ष्य मौजूद हैं कि मंदिर में दशकों से पूजा की जा रही थी। पुरानी परंपरा को रोका नहीं जा सकता है। दूसरे पक्ष ने भी कोई ऐतराज नहीं किया। इसके चलते मंदिर में दिन भर देवी मां के जयकारे गूंजते रहे।
पुलिस-प्रशासन ने ही पिछले साल चैत्र नवरात्र में मंदिर के गेट पर ताला लगाया था। सील भी लगा दी थी। यह हिदायत दी गई थी कि विवाद का समाधान हो जाने तक इसमें पूजा-पाठ नहीं की जाए। इसका उल्लंघन करने पर कार्रवाई की चेतावनी दी गई थी। प्रशासन ने यह कदम मोहम्मद आबिद की शिकायत पर उठाया गया था। आबिद का मकान मंदिर की दीवार से सटा है। उसने छह साल पहले यह मकान सुनील और भोले पंडित से खरीदा था। उसका कहना था कि कुछ लोग मंदिर में चारदीवारी का निर्माण कर रहे हैं।
चैत्र नवरात्र प्रारंभ होने से ऐन पहले सोमवार को मोहल्ले के लोगों ने गेट तोड़कर मंदिर खोल दिया। इस पर सांप्रदायिक बवाल हो गया। पुलिस प्रशासन के अधिकारी रात तक इसी टेंशन में रहे कि विवाद का हल कैसे निकाला जाए।
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मंगलवार सुबह मोहल्ले के लोगों ने तमाम साक्ष्य मुहैया कराए जिससे साबित हुआ कि यह मंदिर ही है और कुछ नहीं। पूर्व से चली आ रही पूजा की तस्वीरें दिखाई गईं। इसे दुल्हे वाला कुआं कहा जाता है। मंदिर में कुआं भी है। शादी में इसकी पूजा की जाती है। इसकी तस्वीरें भी दिखाई गईं। बुजुर्गों ने बताया कि यहां पचासों साल से पूजा होती आ रही है।
पिछले साल ही बंद की गई। आबिद पक्ष ने कहा था कि यहां पहले मजार थी। लेकिन वह इसके साक्ष्य नहीं दे पाया। जिस जगह पर मजार बताई थी, वहां पत्थर हटाकर देखने पर कुआं निकला। इसके बाद पुलिस प्रशासन के अधिकारियों ने कह दिया कि परंपरा को देखते हुए पूजा-पाठ की अनुमति दी जाती है। खातीपाड़ा की महिलाएं यह सुनते ही पूजा के थाल लेकर मंदिर पहुंच गईं। सुबह से शाम तक महिलाओं की कतार लगी रही।
रात में ही तैयार करा दिया गेट
आगरा। सोमवार की रात मंदिर का गेट खोले जाते समय तोड़ दिया गया था। इसे प्रशासन ने रात में ही फिर से तैयार करा दिया। मंदिर के आस-पास और पूरे इलाके में पुलिस तैनात है। अधिकारी भी लगातार हालात का जायजा लेने के लिए जा रहे हैं।
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पुलिस-प्रशासन ने ही पिछले साल चैत्र नवरात्र में मंदिर के गेट पर ताला लगाया था। सील भी लगा दी थी। यह हिदायत दी गई थी कि विवाद का समाधान हो जाने तक इसमें पूजा-पाठ नहीं की जाए। इसका उल्लंघन करने पर कार्रवाई की चेतावनी दी गई थी। प्रशासन ने यह कदम मोहम्मद आबिद की शिकायत पर उठाया गया था। आबिद का मकान मंदिर की दीवार से सटा है। उसने छह साल पहले यह मकान सुनील और भोले पंडित से खरीदा था। उसका कहना था कि कुछ लोग मंदिर में चारदीवारी का निर्माण कर रहे हैं।
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चैत्र नवरात्र प्रारंभ होने से ऐन पहले सोमवार को मोहल्ले के लोगों ने गेट तोड़कर मंदिर खोल दिया। इस पर सांप्रदायिक बवाल हो गया। पुलिस प्रशासन के अधिकारी रात तक इसी टेंशन में रहे कि विवाद का हल कैसे निकाला जाए।
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मंगलवार सुबह मोहल्ले के लोगों ने तमाम साक्ष्य मुहैया कराए जिससे साबित हुआ कि यह मंदिर ही है और कुछ नहीं। पूर्व से चली आ रही पूजा की तस्वीरें दिखाई गईं। इसे दुल्हे वाला कुआं कहा जाता है। मंदिर में कुआं भी है। शादी में इसकी पूजा की जाती है। इसकी तस्वीरें भी दिखाई गईं। बुजुर्गों ने बताया कि यहां पचासों साल से पूजा होती आ रही है।
पिछले साल ही बंद की गई। आबिद पक्ष ने कहा था कि यहां पहले मजार थी। लेकिन वह इसके साक्ष्य नहीं दे पाया। जिस जगह पर मजार बताई थी, वहां पत्थर हटाकर देखने पर कुआं निकला। इसके बाद पुलिस प्रशासन के अधिकारियों ने कह दिया कि परंपरा को देखते हुए पूजा-पाठ की अनुमति दी जाती है। खातीपाड़ा की महिलाएं यह सुनते ही पूजा के थाल लेकर मंदिर पहुंच गईं। सुबह से शाम तक महिलाओं की कतार लगी रही।
रात में ही तैयार करा दिया गेट
आगरा। सोमवार की रात मंदिर का गेट खोले जाते समय तोड़ दिया गया था। इसे प्रशासन ने रात में ही फिर से तैयार करा दिया। मंदिर के आस-पास और पूरे इलाके में पुलिस तैनात है। अधिकारी भी लगातार हालात का जायजा लेने के लिए जा रहे हैं।