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UP News: लोगों को डरा धमकाकर पैसे ऐंठना है डिजिटल अरेस्ट, एसीपी ने ली क्लास; किया जागरूक
Mon, 07 Oct 2024 03:35 PM IST
भूपेन्द्र सिंह
अमर उजाला नेटवर्क, आगरा
अमर उजाला नेटवर्क, आगरा
Published by: भूपेन्द्र सिंह
Updated Mon, 07 Oct 2024 03:35 PM IST
सार
आगरा में डिजिटल अरेस्ट के प्रति लोगों को जागरूक किया गया। एसीपी ने लोगों को साइबर अपराधियों से सावधान रहने के लिए कहा। कहा कि किसी भी समस्या के लिए पुलिस की मदद लें।
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साइबर क्राइम
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
उत्तर प्रदेश के आगरा में थाना अछनेरा पुलिस की ओर से रविवार को अग्रोहा सेवा सदन में परिवार संवाद को लेकर कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस दौरान महिलाओं पुरुषों और छात्र छात्राओं से खुलकर जागरूकता संवाद किया।
एसीपी ने आजकल चर्चित विषय डिजिटल अरेस्ट और साइबर क्राइम पर गंभीरता से लोगों से संवाद कर, उसके बारे में विस्तार से समझाया। इसके अलावा महिला सशक्तिकरण, बाल अपराध, डायल 112 एवं डिजिटल अपराध के बारे में भी जागरूक किया। साथ ही पुलिस ने जनता को भी खुलकर बात करने और अपनी समस्याओं को रखने का मौका दिया।
एसीपी ने बताया कि, डिजिटल अरेस्ट एक तरह का साइबर फ्रॉड कहलाता है, जिसमें अपराधी लोगों को डरा धमकाकर, उनसे पैसे ऐंठने की कोशिश करते हैं। वे लोगों को यह बताते हैं कि, वे किसी कानूनी पचड़े में फंस गए हैं, और उन्हें गिरफ्तार किया जा सकता है। यह धोखा अक्सर फोन कॉल, ईमेल या सोशल मीडिया मैसेज के माध्यम से किया जाता है। असल में कानून में कोई डिजीटल अरेस्ट होता ही नहीं है।
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मुख्य रूप से थाना प्रभारी अछनेरा विनोद कुमार मिश्रा, क्राइम विजय वर्मा, बरिष्ट सब इंस्पेक्टर जितेन्द्र सिंह,उपनिरीक्षक नवनीत सिंह,एस आई, राघवेन्द्र सिंह, गुलशन गर्ग सभासद, चैयरमेन प्रति निधि महेंद्र सिंह भगत ,कुंवर बहादुर मिश्रा,प्रधान संभ्रांत व्यक्ति मौजूद रहे।
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एसीपी ने आजकल चर्चित विषय डिजिटल अरेस्ट और साइबर क्राइम पर गंभीरता से लोगों से संवाद कर, उसके बारे में विस्तार से समझाया। इसके अलावा महिला सशक्तिकरण, बाल अपराध, डायल 112 एवं डिजिटल अपराध के बारे में भी जागरूक किया। साथ ही पुलिस ने जनता को भी खुलकर बात करने और अपनी समस्याओं को रखने का मौका दिया।
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एसीपी ने बताया कि, डिजिटल अरेस्ट एक तरह का साइबर फ्रॉड कहलाता है, जिसमें अपराधी लोगों को डरा धमकाकर, उनसे पैसे ऐंठने की कोशिश करते हैं। वे लोगों को यह बताते हैं कि, वे किसी कानूनी पचड़े में फंस गए हैं, और उन्हें गिरफ्तार किया जा सकता है। यह धोखा अक्सर फोन कॉल, ईमेल या सोशल मीडिया मैसेज के माध्यम से किया जाता है। असल में कानून में कोई डिजीटल अरेस्ट होता ही नहीं है।
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मुख्य रूप से थाना प्रभारी अछनेरा विनोद कुमार मिश्रा, क्राइम विजय वर्मा, बरिष्ट सब इंस्पेक्टर जितेन्द्र सिंह,उपनिरीक्षक नवनीत सिंह,एस आई, राघवेन्द्र सिंह, गुलशन गर्ग सभासद, चैयरमेन प्रति निधि महेंद्र सिंह भगत ,कुंवर बहादुर मिश्रा,प्रधान संभ्रांत व्यक्ति मौजूद रहे।