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मौजूदा व पूर्व कुलसचिव पर चार लाख का जुर्माना
ब्यूरो अमर उजाला, आगरा
Updated Fri, 16 Oct 2015 01:54 AM IST
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डिग्री और मार्कशीट के लिए भटक रहे डा. भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय के एक
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सौ छात्रों को जन सूचना अधिकार आयोग ने बड़ी राहत दी है। आयोग ने सूचना
नहीं देने पर विश्वविद्यालय के कुलसचिव केएन सिंह और तत्कालीन कुलसचिव बीके
पांडेय पर चार लाख रुपये का जुर्माना लगाया है। आयोग के दखल के बाद इन
छात्र-छात्राओं को डिग्रियां दे दी गईं।
विश्वविद्यालय में पढ़ाई पूरी करने के बाद भी चार से पांच साल तक विद्यार्थियों को डिग्री और मार्कशीट नहीं दी जा रही है। ऐसे में विद्यार्थियों ने सूचना का अधिकार अधिनियम (आरटीआई) का सहारा लिया था। राज्य सूचना आयुक्त गजेंद्र यादव ने विश्वविद्यालय को सूचना देने का आदेश दिया। विवि के अफसरों ने इस आदेश को भी तवज्जो नहीं दी। इस पर सूचना आयुक्त ने विश्वविद्यालय के जन सूचना अधिकारी/कुलसचिव केएन सिंह और पूर्व में तैनात रहे कुलसचिव बीके पांडेय पर अलग-अलग 16 मामलों में चार लाख रुपये का जुर्माना लगाया। इसका असर कुछ ही दिनों में दिखाई पड़ा। विश्वविद्यालय ने आयोग का दरवाजा खटखटाने वाले विद्यार्थियों की मार्कशीट और डिग्रियां देना शुरू कर दिया। हाथरस की रुकइया, जालौन के प्रदीप कुमार, फर्रुखाबाद के पुनीत, राजस्थान के मनीष, ग्वालियर की अनीता, मथुरा के पवन तिवारी को आयोग के दखल के बाद डिग्री मिल सकी।
विश्वविद्यालय में पढ़ाई पूरी करने के बाद भी चार से पांच साल तक विद्यार्थियों को डिग्री और मार्कशीट नहीं दी जा रही है। ऐसे में विद्यार्थियों ने सूचना का अधिकार अधिनियम (आरटीआई) का सहारा लिया था। राज्य सूचना आयुक्त गजेंद्र यादव ने विश्वविद्यालय को सूचना देने का आदेश दिया। विवि के अफसरों ने इस आदेश को भी तवज्जो नहीं दी। इस पर सूचना आयुक्त ने विश्वविद्यालय के जन सूचना अधिकारी/कुलसचिव केएन सिंह और पूर्व में तैनात रहे कुलसचिव बीके पांडेय पर अलग-अलग 16 मामलों में चार लाख रुपये का जुर्माना लगाया। इसका असर कुछ ही दिनों में दिखाई पड़ा। विश्वविद्यालय ने आयोग का दरवाजा खटखटाने वाले विद्यार्थियों की मार्कशीट और डिग्रियां देना शुरू कर दिया। हाथरस की रुकइया, जालौन के प्रदीप कुमार, फर्रुखाबाद के पुनीत, राजस्थान के मनीष, ग्वालियर की अनीता, मथुरा के पवन तिवारी को आयोग के दखल के बाद डिग्री मिल सकी।