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भाजपा के लिए उतार-चढ़ाव भरी रही जिले की सियासत

Mon, 17 Jan 2022 11:33 PM IST
Agra Bureau आगरा ब्यूरो
Updated Mon, 17 Jan 2022 11:33 PM IST
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patiyali 80 vidhan sabha 2022
कासगंज। भारतीय जनता पार्टी का 42 साल का राजीनतिक सफर जिले की सियासत में काफी उतार-चढ़ाव भरा रहा। भाजपा की स्थापना के बाद सबसे पहले 1989 में सोरों विधान सभा कमल की खुशबू से महकी। इसके बाद राम मंदिर आंदोलन ने भाजपा को जिले की सियासत का सिरमौर बना दिया तो फिर अपनी जमीन खो चुकी भाजपा को मोदी लहर ने संजीवनी दे दी।
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जनता पार्टी के टूटने के बाद 1980 में भाजपा अस्तित्व में आई। इस वर्ष हुए चुनाव में भाजपा ने जिले की तीनों सीटों पर अपने प्रत्याशी उतारे, लेकिन पार्टी कोई करिश्मा नहीं दिखा सकी। पार्टी कासगंज में उपविजेता बनी, लेकिन सोरों एवं पटियाली में पार्टी को तीसरे स्थान पर संतोष करना पड़ा। इसके बाद फिर 1985 में हुए चुनाव में पार्टी ने फिर से तीनों सीटों पर चुनाव लड़ा, लेकिन किसी सीट पर पार्टी को सफलता नहीं मिली। कासगंज व सोरों में पार्टी को दूसरे स्थान पर संतोष करना पड़ा। जबकि पटियाली में पार्टी फिर से तीसरे स्थान पर रही। प्रदेश में 57 सीट जीतने वाली भाजपा के लिए 1989 का चुनाव जिले की सियासत में सुखद संदेश लेकर आया। इस चुनाव में भाजपा सोरों में कमल खिलाने में सफल हो गई।
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यहां से भाजपा के ओंकार सिंह ने कांग्रेस से दो बार विधायक रहीं उर्मिला अग्निहोत्री को 1220 वोटों से हराकर जीत दर्ज की, लेकिन राम मंदिर आंदोलन ने भाजपा को जिले की सियासत में सिरमौर बना दिया। वर्ष 1991 में हुए चुनाव में भाजपा ने जिले की तीनों सीटों पर कब्जा जमा लिया। 1993 के चुनाव में फिर से भाजपा ने तीनों सीटों पर अपना कब्जा बरकरार रखा, लेकिन 1996 के चुनाव में कासगंज व सोरों सीट पर ही कमल खिल सका।
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जबकि पटियाली सीट पर भाजपा दूसरे स्थान तक ही पहुंच पाई, लेकिन कल्याण सिंह के पार्टी से अलग हो जाने से जिले की सियासत में भाजपा को तगड़ा झटका लगा। भाजपा जिले की एक भी सीट नहीं जीत सकी। कासगंज में पार्टी दूसरे स्थान तक पहुंचने में सफल रही, लेकिन पटियाली में तीसरे और सोरों में चौथे स्थान पर सिमट गई। 2007 एवं 2012 के चुनाव में भाजपा फिर से एक भी सीट नहीं जीत पाई, लेकिन 2017 के चुनाव में मोदी लहर में भाजपा का तीन चुनावों से चला आ रहा बनवास खत्म हो गया और फिर से जिले की तीनों सीट जीतने में सफलता हांसिल कर ली।

कल्याण सिंह के चुनाव लड़ने से सीट बन गई वीआईपी
पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह ने वर्ष 1993 के चुनाव में अतरौली के अलावा कासगंज विधानसभा से भी चुनाव लड़ा। इसके बाद जिला वीआईपी की श्रेणी में आ गया। बाद में उन्होंने इस सीट से अपना त्यागपत्र दे दिया। इसके बाद हुए उपचुनाव में भी भाजपा ने अपनी जीत बरकरार रखी।
भाजपा से जीतने वाले प्रत्याशी
वर्ष विधानसभा प्रत्याशी का नाम
1989 सोरों ओंमकार सिंह
1991 सोरों ओमकार सिंह
1991 कासगंज नेतराम सिंह
1991 पटियाली राजेंद्र सिंह
1993 सोरों ओमकार सिंह
1993 कासगंज कल्याण सिंह
1993 पटियाली रज्जनपाल सिंह
1994 कासगंज राम स्वरूप(उपचुनाव)
1996 सोरों ओमकार सिंह
1996 कासगंज नेतराम सिंह
2017 कासगंज देवेंद्र राजपूत
2017 अमांपुर देवेंद्र प्रताप
2017 पटियाली ममतेश शाक्य
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