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एक्सक्लूसिव: कोरोना काल में डेढ़ गुना बढ़े डायबिटिक रेटिनोपैथी के मरीज, इन बातों का रखें ख्याल

Sat, 09 Jan 2021 11:59 AM IST
मुकेश कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा Published by: मुकेश कुमार Updated Sat, 09 Jan 2021 11:59 AM IST
सार

  • खानपान और जांच में लापरवाही बरतने से अनियंत्रित हुई मधुमेह, नजर कम होने पर कराई जांच
  • चिकित्सक बोले, अधिकतर मरीजों को जांच के बाद पता चलती है बीमारी:

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patients of diabetic retinopathy increased during corona period in agra
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay

विस्तार

कोरोना महामारी में अनियमित खानपान, व्यायाम न करने और जांच कराने में लापरवाही बरतने से मधुमेह-रक्तचाप के मरीजों की परेशानी बढ़ गई। इनकी नजर कम होने पर जांच कराई तो डायबिटिक रेटिनोपैथी मिली। दस महीने में इस बीमारी के डेढ़ गुने मरीज बढ़ गए हैं।

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आगरा के एसएन मेडिकल कॉलेज के मधुमेह रोग विशेषज्ञ डॉ. प्रभात अग्रवाल ने बताया कि टाइप टू के मरीजों में पांच साल से अधिक समय तक अनियंत्रित मधुमेह से कॉर्निया पर धब्बे पड़ने लगते हैं। ओपीडी शुरू होने पर विभाग में 10 से 15 मधुमेह रोगियों की आंखों की जांच कराते हैं। इनमें पांच से आठ में रेटिनोपैथी मिल रही है। 
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कोरोना वायरस से पहले सामान्य दिनों में इतने ही मरीजों की जांच में तीन से पांच मरीज ही मिलते थे। मरीजों ने बताया कि उन्हें कम दिखने और दोहरी दृष्टि की शिकायत थी, लेकिन अस्पतालों में संक्रमण के डर से जांच कराने नहीं गए। मर्ज बढ़ा तब डॉक्टरों के पास पहुंचे।

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30 से 40 साल के लोगों में भी रेटिनोपैथी: डॉ. बीके अग्रवाल
वरिष्ठ मधुमेह रोग विशेषज्ञ डॉ. बीके अग्रवाल ने बताया कि 30 से 40 साल के लोग भी रेटिनोपैथी की वजह से आंखों की नजर कम मिली। सामान्य दिनों के मुकाबले कोरोना काल में यह संख्या अधिक है। सामान्य तौर पर यह बीमारी 50 साल से अधिक उम्र के मधुमेह रोगियों में मिलती है। ऐसे में वजन बढ़ते ही लोग सतर्क हो जाएं।

अधिकतम मरीजों को जांच के बाद पता चलती है बीमारी: डॉ. समीर
नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. समीर प्रकाश ने बताया कि अधिकतर मरीज आंखों में परेशानी होने पर सामान्य रूप से दिखाने आते हैं, लेकिन जांच में उन्हें रेटिनोपैथी की बीमारी पता चलती है। यहां तक कि उन्हें मधुमेह है, इसकी भी कई लोगों को जानकारी नहीं थी।

बीमारी और लक्षण
अनियंत्रित मधुमेह के कारण रक्त नलिकाओं में शर्करा एकत्रित हो जाती है, इससे रक्त प्रवाह प्रभावित होता है, कॉर्निया में धब्बा पड़ जाता है। इसमें नजर घटती-बढ़ती रहती है। धुंधला नजर आना या फिर दोहरी दृष्टि हो जाती है। आंखों में दर्द भी रहता है।

इन बातों का रखें ख्याल
- वजन न बढ़ने दें, व्यायाम-योग नियमित करें। 
- 30 से 40 मिनट रोजाना साइकिल चलाएं।
- फास्ट फूड और तैलीय सामग्री खाने से बचें। 
- 40 साल की उम्र के बाद रेटिनोपैथी की जांच कराएं।
- मधुमेह-उच्च रक्तचाप होने पर आंखों की जांच कराएं।
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