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तोते ने खोला था हत्या का राज: कई अपनों पर था शक, फिर 'मिटठू' ने पकड़वाया था कातिल भांजा, नौ साल बाद मिली सजा

Thu, 23 Mar 2023 09:58 PM IST
धीरेन्द्र सिंह अमर उजाला ब्यूरो, आगरा
अमर उजाला ब्यूरो, आगरा Published by: धीरेन्द्र सिंह Updated Thu, 23 Mar 2023 09:58 PM IST
सार

बल्केश्वर में पत्रकार विजय शर्मा की पत्नी नीलम शर्मा की हत्या के मामले में हत्यारों तक पालतू ताते ने पहुंचाया था, जिसके बाद पुलिस ने आरोपी भांजे को गिरफ्तार किया था।

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Parrot had caught the murderer nephew got life imprisonment after nine years in agra up
पालतू तोता, जिसकी वजह से पकड़ा गया था कातिल - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

आगरा में नौ साल पहले स्वराज्य टाइम्स के संपादक विजय शर्मा की पत्नी नीलम की लूट के दौरान हत्या की गई थी। परिजन और पुलिस को पालतू तोते से सुराग मिला था। भांजा आशु उर्फ आशुतोष गोस्वामी पकड़ा गया। उसने अपने दोस्त रॉनी मैसी के साथ हत्याकांड को अंजाम दिया था। मामले में बृहस्पतिवार को विशेष न्यायाधीश दस्यु प्रभावी क्षेत्र मोहम्मद राशिद ने दोनों आरोपियों को दोषी पाया। दोनों को आजीवन कारावास और 72 हजार रुपये अर्थदंड से दंडित किया।
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घटना 20 फरवरी 2014 की है। स्वराज्य टाइम्स के संपादक विजय शर्मा बल्केश्वर के रहने वाले थे। वह बेटी निवेदिता, बेटे अजेश शर्मा के साथ रिश्तेदार के यहां फिरोजाबाद शादी में शामिल होने गए थे। रात में लौटे तो घर में पत्नी नीलम शर्मा और पालतू कुत्ते जैकी की लाश मिली। उनको चाकू से गोदकर मारा गया था। परिजन ने कई परिचितों पर शक जताया था। इसके बाद पुलिस ने संदिग्ध लोगों को हिरासत में लिया था। पुलिस ने 25 फरवरी 2014 को घटना का खुलासा किया।
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भांजे को बेटे की तरह मानती थीं नीलम

लूट और हत्या के मामले में नीलम शर्मा के सगे भांजे आशु उर्फ आशुतोष गोस्वामी और उसके दोस्त रॉनी मैसी को गिरफ्तार किया गया। दोनों लक्ष्मण नगर अर्जुन नगर के रहने वाले थे। उन्होंने घर से सोने-चांदी के जेवर, नकदी, घड़ी आदि लूटे थे। नीलम शर्मा आशु को बेटे की तरह मानती थीं। विजय शर्मा ने उसे एमबीए करने के लिए 80 हजार रुपये भी दिए थे। घटना के खुलासे के बाद सभी सन्न रह गए।
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एडीजीसी आदर्श चौधरी और अभियोजन अधिकारी मनीष मिश्रा ने बताया कि अभियोजन की तरफ से 14 गवाह पेश किए गए। बचाव पक्ष की ओर से एक गवाह पेश किया गया। दोनों अभियुक्त जमानत पर थे। उन्हें कोर्ट में पेश किया गया था। सजा मिलने पर दोनों को जेल भेज दिया गया। एडीजीसी ने बताया कि तोता पुलिस की विवेचना का हिस्सा रहा था। मगर, साक्ष्य का हिस्सा नहीं था। उसकी गवाही नहीं हो सकती थी क्योंकि इसके लिए कोई कानूनन विधि नहीं है।


 

सजा और अर्थदंड

- आशुतोष और रॉनी मैसी को धारा 394 आईपीसी में 10 वर्ष के कठिन कारावास और 10 हजार रुपये अर्थदंड की सजा।

- आशुतोष और रॉनी मैसी को 302 आईपीसी में आजीवन कारावास और 20 हजार रुपये अर्थदंड की सजा।
- आशुतोष और रॉनी मैसी को धारा 429 आईपीसी में 4 वर्ष के कारावास और 3000 रुपये अर्थदंड की सजा।

- आशुतोष और रॉनी मैसी को धारा 411 में तीन वर्ष के कारावास और 2000 रुपये के अर्थदंड की सजा।
- आशुतोष गोस्वामी उर्फ आशू को धारा 4/25 आयुध अधिनियम में 2 वर्ष के कारावास और 2000 रुपये अर्थदंड की सजा।

(सभी सजाएं साथ-साथ चलेंगी)




 

तोते ने देखी थी घटना

नीलम शर्मा की बेटी निवेदिता शर्मा ने बताया कि बुआ का बेटा होने के कारण आशु का घर आना-जाना था। वह कई साल उनके घर में रहा था। उसे पता था कि घर में जेवर और नकदी कहां है। इसलिए लूट की योजना बनाई थी। उसने पालतू कुत्ते पर नौ वार किए थे, जबकि मां नीलम पर 14 वार किए थे। घटना के समय पालतू तोता भी मौजूद था। उसने पूरी घटना देखी थी।

आशु बोलते ही चिल्लाने लगता था मिट्ठू

मिट्ठू मां (नीलम शर्मा) के साथ ही खाना खाता था। उनसे बातें भी करता था। गुस्सा करता था। इसलिए जब उनकी हत्या हुई तो गुमसुम हो गया। दो दिन तक खाना भी नहीं खाया। इस पर शक हुआ। पिता विजय शर्मा ने मिट्ठू से बात की। शक था कि घटना किसी जानकार ने अंजाम दी है। इसलिए उन्हें किसी ने बताया था कि मिटठू के सामने नाम लेने पर कुछ प्रतिक्रिया देगा। ऐसा ही हुआ। उन्होंने तीन नाम बोले। इसमें कहा कि आशु घर आया था क्या? यह नाम सुनते ही मिट्ठू चिल्लाने लगा। आंख दिखाकर गुस्सा करने लगा। इससे शक बढ़ गया। पिता ने पुलिस बुलाई। इसके बाद आशु को पकड़वाया। पुलिस ने अपनी विवेचना में भी तोते का जिक्र किया है।
 

बेटी बोलीं- फांसी की सजा के लिए उच्च कोर्ट में जाएंगे

निवेदिता ने कहा कि कोर्ट के फैसले से खुशी मिली है। मां की हत्या कर दी गई थी। पिता विजय शर्मा की 14 नवंबर 2020 को कोरोना में मृत्यु हो गई। भाई अजेश की बीमारी के चलते मृत्यु हो गई। पिता चाहते थे कि आशु को फांसी की सजा हो। इसके लिए चारों बहन मिलकर पैरवी कर रहे थे। कोर्ट ने आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। अब दोनों दोषियों को फांसी की सजा दिलाने के लिए उच्च कोर्ट में जाएंगे।
 

 घटना व साक्ष्य


- आशु की मामा से रहन-सहन को लेकर अनबन रहने लगी थी।
- आशु को पता था कि घर के जेवरात और नकदी कहां रखी रहती है।

- मामा के शादी में जाने का पता चलने पर घटना को अंजाम दिया।
- घर पर आते ही कुत्ते को मारा। इसके बाद मामी पर वार किए थे।

- एक गवाह ने बताया कि अंतिम बार आशु को देखा था। वो क्या कर रहा था? यह साक्ष्य बना।
- उपस्थिति दर्ज हुई। हाथ पर कुत्ते के नाखूनों के निशान मिले थे।

- पुलिस ने तोते का जिक्र किया। इसमें लिखा कि परिजन ने तोते के सामने नाम लिया था, उसकी प्रतिक्रिया सामने आई।
(एडीजीसी आदर्श चौधरी के मुताबिक)
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