तपस्थली को नहीं मिल सका 'वरदान': महाभारत के युद्ध के बाद पांडवों ने किया था तप, यहां पहुंचना मुश्किल
पश्चिमानी घाट को पर्यटक स्थल बनाने के लिए पत्र लिखे थे। मगर प्रक्रिया पूरी नहीं हो पाई है। फतेहपुर सीकरी के वर्तमान विधायक चौधरी बाबूलाल ने मई में पर्यटक स्थल घोषित करने के लिए पत्र लिखा, लेकिन तपस्थली का रास्ता नहीं बन सका।
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आगरा के रुनकता के पश्चिमानी घाट पर कहते हैं पांडवों ने पितरों की आत्मा की शांति के लिए तपस्या की थी। पांडवों की तपस्या पूरी हुई, लेकिन पश्चिमानी घाट की दुर्दशा दूर नहीं हो सकी। इसे पर्यटन स्थल बनाने की लगातार मांग की जा रही है लेकिन अभी तक इसे यह 'वरदान' नहीं मिल सका है।
पांडवों की तपस्थली कहा जाने वाला मांगरोल गुर्जर स्थित पश्चिमानी घाट बदहाल पड़ा है। यहां जाने के लिए पक्की सड़क तक नहीं है। जबकि समय-समय पर विधायकों ने पश्चिमानी घाट को पर्यटक स्थल घोषित करने के लिए पत्र लिखे।
ग्रामीणों के अनुसार जहां पांडवों ने तपस्या की थी वह स्थान अब यमुना में है। यमुना नदी पूरब की ओर बहती है, मगर पश्चिमानी घाट पर पूर्व से पश्चिम की तरफ जाती है। यहां भगवान शिव, एक नाग देवता और राधा कृष्ण का मंदिर सहित अन्य स्थल बने हुए हैं। सोमवती अमावस्या पर यहां विशाल मेला लगता है। पर्यटकों को डेढ़ से दो किलोमीटर रेत मेंं चलना पड़ता है, जिससे उन्हें काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
ग्रामीणों ने बताया कि पूर्व विधायक चौधरी उदयभान सिंह ने अपने कार्यकाल में पश्चिमानी घाट को पर्यटक स्थल बनाने के लिए पत्र लिखे थे। मगर प्रक्रिया पूरी नहीं हो पाई है। फतेहपुर सीकरी के वर्तमान विधायक चौधरी बाबूलाल ने मई में पर्यटक स्थल घोषित करने के लिए पत्र लिखा, लेकिन तपस्थली का रास्ता नहीं बन सका। ग्रामीण राजपाल सिंह ने बताया है कि पूर्व सांसद राजबब्बर के कार्यकाल में एक बार रास्ता बनवाया गया था। उसके बाद में आज तक किसी जनप्रतिनिधि ने सड़क बनाने का कोई ध्यान नहीं दिया है।
पांडवों ने दिया था श्राप
किवदंती के अनुसार यहां पांडवों ने महाभारत युद्ध के बाद पितरों की आत्मा की शांति के लिए यहां तप किया था। वह चाहते थे कि सोमवती अमावस्या पर यहां स्नान करें, लेकिन जब पूरे साल सोमवती अमावस्या नहीं पड़ी तो क्रोधित पांडव यमुना को श्राप देकर चले गए कि अब यहां सोमवती अमावस्या साल में तीन-तीन बार पड़ेगी।