मैनपुरी में संक्रामक बीमारियों का प्रकोप, 75 दिन में 50 लोगों की मौत, प्रशासन बेखबर

न्यूज डेस्क, अमर उजाला मैनपुरी Updated Thu, 20 Sep 2018 05:53 PM IST
जिले में संक्रामक बीमारियों का प्रकोप
जिले में संक्रामक बीमारियों का प्रकोप
विज्ञापन
ख़बर सुनें
मैनुपरी जिले में संक्रामक बीमारियां लोगों को अपनी गिरफ्त में ले चुकी हैं। लोग बुखार, डायरिया और सांस की बीमारी से अपनी जान तक गंवा रहे हैं। जिले में संक्रामक बीमारी से बीते 75 दिनों 50 लोगों की मौत हो चुकी है। 
विज्ञापन


औसतन हर 36 घंटे में एक व्यक्ति की मौत हो रही है। वहीं, मरीजों की भीड़ बढ़ने से सरकारी अस्पतालों की व्यवस्थाएं भी जवाब दे गई हैं। बदहाल स्वास्थ्य
सेवाओं के चलते भी जिले में मौत का आंकड़ा बढ़ रहा है।      
 
बरसात शुरू होते ही जिले में संक्रामक बीमारियों ने दस्तक दे दी थी। जैसे-जैसे बारिश हुई, मरीजों की संख्या में भी इजाफा होता गया। जिले में अब तक पिछले 75 दिनों में 50 मरीजों की मौत हो चुकी है। लगातार हो रही मौत का प्रमुख कारण बदहाल स्वास्थ्य सेवाएं भी हैं। 

गांव-देहात का मरीज सबसे पहले प्राथमिक और उच्च प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर इलाज के लिए पहुंचता है, लेकिन यहां मरीजों को समुचित उपचार नहीं मिल रहा है। कई दिनों तक स्थानीय अस्पतालों पर निर्भर रहने के बाद जब हालत बिगड़ती है तब जाकर मरीज जिला अस्पताल पहुंचता है। वहीं, इन दिनों जिला अस्पताल भी डॉक्टरों और दवाओं की कमी से जूझ रहा है।        
   
दूषित पानी से फैल रहीं बीमारियां    
 
 
जिला अस्पताल में तैनात वरिष्ठ फिजीशियन डॉ. जेजे राम का कहना है कि बारिश के बाद जनपद में अचानक संक्रामक बीमारियां हावी हुई हैं। इसका मुख्य कारण बारिश के बाद पानी का दूषित होना है। उन्होंने बताया कि जनपद के लोग मात्र 35 से 40 फुट की गहराई में ही बोरिंग करके पानी निकाल रहे हैं। यह पानी शुद्ध नहीं है। उन्होंने कहा कि डब्ल्यूएचओ ने 180 फुट की गहराई पर शुद्ध पानी की बात कही है। 
       
जलभराव और गंदगी के लगे ढेर       

संक्रामक बीमारियां फैलने का एक कारण जगह-जगह जलभराव और फैली गंदगी भी है। क्यों कि गंदगी और जलभराव वाले स्थानों पर बैक्टीरिया जल्दी
पनपता है। यहां मक्खी और मच्छर भी पनपते हैं और यह भी बीमारियों का कारण बनते हैं। जिले में जगह-जगह जलभराव और गंदगी के ढेर लगे रहते हैं।   

50 मौत पर भी नहीं जागे अफसर 

जिले में संक्रामक बीमारियों से पचास लोगों की मौत हो चुकी है, लेकिन अफसरों की नींद अभी तक नहीं टूटी है। स्थिति यह है कि नगरीय क्षेत्र में फॉगिंग नहीं कराई गई है। अधिकांश पानी की टंकियों की नियमित सफाई नहीं हो रही है। साथ ही टंकियों में क्लोरीन का छिड़काव नहीं हो रहा है। इसके साथ ही गांवों में साफ सफाई की व्यवस्था नहीं है। यहां भी फॉगिंग नहीं कराई गई है। साथ ही बैक्टीरिया नाशक दवाओं का छिड़काव नहीं हुआ है।   

सीएमओ डॉ एके पांडेय ने बताया कि बारिश के बाद पानी भी दूषित हुआ है। ऐसे में लोगों के लिए आवश्यक होगा कि वह आरओ का पानी इस्तेमाल करें। यहां इंडिया मार्क हैंडपंप जिसकी बोरिंग 80 फुट से अधिक गहराई तक है उसका ही पानी पिएं। कम गहराई वाले हैंडपंप का पानी न पिएं।  

ईओ मनोज कुमार रस्तोगी ने कहा कि नगर पालिका का पानी दूषित नहीं है, हम लगातार पानी को ट्रीट कर रहे हैं। पानी की टंकियों की नियमित सफाई की जा रही है। बैक्टीरिया की रोकथाम के लिए कीटनाशक का छिड़काव कराया जा रहा है। निजी संसाधनों से उपयोग होने वाला पानी दूषित है। लोग अपने पानी की जांच कराएं और स्वास्थ्य के प्रति सावधानी बरतें।
 
विज्ञापन

आपकी राय हमारे लिए महत्वपूर्ण है। खबरों को बेहतर बनाने में हमारी मदद करें।

खबर में दी गई जानकारी और सूचना से आप संतुष्ट हैं?
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
  • Downloads

Follow Us

प्रिय पाठक

कृपया अमर उजाला प्लस के अनुभव को बेहतर बनाने में हमारी मदद करें।
डेली पॉडकास्ट सुनने के लिए सब्सक्राइब करें

क्लिप सुनें

00:00
00:00