यूपी चुनाव 2022: आगरा शहर में एक बार भी नहीं, देहात में पांच बार चुनीं गईं महिला विधायक
आगरा जिले में आधी आबादी की राजनीति में भागीदारी बेहद कम रही। आजादी के बाद से अब तक के 17 विधानसभा चुनावों के दौरान केवल पांच बार महिला विधायक चुनी गईं हैं। यह भी देहात क्षेत्र की सीटों पर। शहर की तीनों विधानसभा आगरा छावनी, आगरा उत्तर और आगरा दक्षिण सीटों पर कोई महिला उम्मीदवार चुनाव नहीं जीत सकी है।
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विस्तार
पहली बार 1962 में फतेहपुर सीकरी और बाह क्षेत्र से महिला विधायक चुनी गई थीं। उसके बाद 1974 में और फिर 2017 में दो विधायक बनीं। पूरे 43 साल बाद मतदाताओं ने दो महिला उम्मीदवारों पर भरोसा जताया। 2017 में ही सबसे ज्यादा 16 महिलाएं चुनाव मैदान में उतरीं।
साल विधानसभा क्षेत्र विधायक वोट मिले वोट प्रतिशत दल
1962 फतेहपुरसीकरी चंपावती 17,393 37.39% कांग्रेस
1962 बाह विद्यावती 14,554 33.53% कांग्रेस
1974 फतेहपुरसीकरी चंपावती 30,089 39.26% कांग्रेस
2017 बाह रानी पक्षालिका सिंह 80,567 42.28% भाजपा
2017 आगरा ग्रामीण हेमलता दिवाकर 1,29,887 52.36% भाजपा
छह चुनावों में चंपावती ने किया मुकाबला
आजादी के बाद के दूसरे चुनाव में 1957 से फतेहपुर सीकरी विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस की प्रत्याशी चंपावती पहली बार चुनावी मैदान में उतरीं और छह बार उन्होंने कांटे की टक्कर दी। वह दो बार फतेहपुर सीकरी से विधायक चुनीं गईं और दो बार बेहद मामूली अंतर से विधायक बनते-बनते रह गईं, लेकिन उन्होंने कदम पीछे नहीं खींचे। 1980 तक वह लगातार चुनाव लड़ती रहीं। उसके बाद पार्टी ने अपना प्रत्याशी बदल लिया। वह सबसे ज्यादा समय तक फतेहपुर सीकरी विधानसभा में चुनाव लड़ने वाली महिला प्रत्याशी भी हैं।
सबसे ज्यादा वोट हेमलता दिवाकर ने किये हासिल
आजादी के बाद से अब तक 84 महिला प्रत्याशियों में सबसे ज्यादा वोट और मत प्रतिशत आगरा ग्रामीण की विधायक रहीं हेमलता दिवाकर ने पाए हैं। उन्हें 2017 के विधानसभा चुनाव में भाजपा प्रत्याशी के तौर पर 1,29,887 वोट मिले, जबकि 52.36 मत प्रतिशत पाए। इसी चुनाव में बाह से पक्षालिका सिंह को 80,567 वोट मिले और वह पहली बार विधायक चुनी गईं। उनके मुकाबले में सपा की हंसकली तीसरे नंबर पर आईं, लेकिन उन्हें भी 46,885 वोट मिले। इसी तरह एत्मादपुर में सपा की राजबेटी 43,925 वोट पाकर तीसरे नंबर पर और आगरा छावनी से सपा की ममता टपलू 64,683 वोट पाकर तीसरे नंबर पर रहीं थीं।
दूसरे नंबर पर रहकर दी कड़ी टक्कर
1957 के चुनाव में कांग्रेस की चंपावती फतेहपुर सीकरी सीट से दूसरे नंबर पर रहीं। साल 1967 में भी वह दूसरे नंबर पर रहीं और केवल 1784 वोट से जनसंघ प्रत्याशी आर सिंह से चुनाव हार गईं। 1969 में फिर से भारतीय क्रांति दल के रघुनाथ सिंह से केवल 1069 वोट से हार गईं, लेकिन हिम्मत नहीं हारी। 1974 में उन्होंने पलटवार करते हुए बीकेडी के रघुनाथ सिंह को 4575 वोट से हराकर बदला पूरा किया।
1980 में जनता पार्टी के बदन सिंह से चंपावती 17 हजार वोटों से हार गईं और उसके बाद चुनाव मैदान में नहीं उतरीं। 1980 में ही खेरागढ़ में मंडलेश्वर सिंह के खिलाफ कांग्रेस की सरोज कुमारी 27,594 वोट पाकर दूसरे नंबर पर रहीं। दयालबाग में आरके वर्मा कांग्रेस से 19906 वोट पाकर कड़ी टक्कर दे पाईं। इसके बाद साल 2007 में एत्मादपुर सीट से भाजपा की बेबीरानी मौर्य बसपा के नरायन सिंह सुमन से 9623 वोट से हारीं। उन्हें 37915 वोट मिले थे।