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मात्र 14 दवाओं से हर बीमारी का इलाज कर रह आगरा का जिला अस्पताल

Wed, 10 Jan 2018 04:09 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला आगरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला आगरा Updated Wed, 10 Jan 2018 04:09 PM IST
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only a few types of medicines left in the agra district hospital
दवाएं
आगरा जिला अस्पताल में भले ही सुविधाएं बढ़ाने का दावा किया जा रहा हो, लेकिन हकीकत में चिकित्सकीय सेवाएं चौपट हैं। यहां मौसमी बीमारियों की दवाओं तक के लाले हैं। यहां आने वाले 2500 मरीजों का महज 14 तरह की दवाओं से इलाज किया जा रहा। मरीज को पर्चे पर लिखी दवाओं में से एक-दो ही मिल पा रही हैं।
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डिजिटल एक्सरे की सुविधा बंद पड़ी है तो एंटी रैबीज वैक्सीन ही नहीं लग पा रही। मरीज मायूस लौट रहे हैं। एसआईसी डा. सुबोध कुमार का कहना है कि साल का 1.50 करोड़ रुपये का बजट है। 30 लाख ही आए थे। बाकी के बजट की मांग शासन से की है। जल्द दवाएं उपलब्ध कराई जाएंगी।
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सर्द मौसम में जुकाम-खांसी के सबसे ज्यादा मरीज आ रहे हैं। ऐसे मरीजों के लिए खांसी-सर्दी के सीरप नहीं है। एलर्जी, खुजली की दवा नहीं आ रही। एंटीबायोटिक दवा के नाम पर सिर्फ एक उपलब्ध है। हृदय, ईएनटी, मधुमेह जैसी बीमारियों की दवाएं लंबे समय से नहीं है। मजबूरी में मरीज बाजार से दवा खरीद रहा है।
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नहीं हो पा रहे हैं डिजिटल एक्सरे

जिला अस्पताल में मरीजों को डिजिटल एक्सरे की सुविधा नहीं मिल रही है। मशीन चार-पांच दिन से कार्य नहीं कर रही है। अस्पताल में मौजूद साधारण एक्सरे कई बीमारियों में उपयोगी साबित नहीं हो रहे हैं। ऐसे में  मरीजों को मजबूरी में प्राइवेट में एक्सरे कराके लाना पड़ रहा है। अस्पताल में रोजाना विभिन्न बीमारियों के लगभग 100 मरीज डिजिटल एक्सरे कराने के लिए आते हैं।
 
जिला अस्पताल में लंबे समय से एंटी रैबीज वैक्सीन नहीं हैं। इसकी शिकायत शासन तक भी है। इन दिनों रोजाना 150 से अधिक मरीज वैक्सीन लगवाने के आ रहे हैं। इसके लिए 350 रुपये खर्च करने पड़ रहे हैं। अस्पताल में लंबे समय से वैक्सीन न होने की वजह से सत्यमेव जयते संस्था की ओर से 1000 वैक्सीन दान में दी गई थी। वह भी खत्म हो गई हैं।

मोतियाबिंद के मरीजों से कर्मचारी उगाही कर रहे हैं। इसमें मरीजों से प्राइवेट लैंस और सरकारी लैंस के बारे में पूछा जाता है। मरीज को बताया जाता है कि प्राइवेट लैंस से नजर ज्यादा आएगा, सरकारी लैंस की कोई गारंटी नहीं है। ऐसे में कुछ मरीज बातों में आ जाते हैं। कर्मचारी उनसे प्राइवेट लैंस के नाम पर 1500 से 2500 रुपये तक वसूल लेते हैं।

दयालबाग के कुमार का कहना है कि कुत्ते ने काट लिया था, यहां आया पता चला कि इंजेक्शन नहीं है। प्राइवेट में खरीदकर इंजेक्शन लगवाया है। शाहगंज के किशन ने बताया कि इंजेक्शन की तीन डोज लगेंगे, हर बार यहां प्राइवेट में खरीदकर लगवा रहा हूं। बताते हैं कि अभी सप्लाई नहीं हो रही है।
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