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परेशानी: कोरोना में की ऑनलाइन पढ़ाई, ‘चिंटू-मिंटू’ की नजर हुई कम, यह बरतें सावधानी
Fri, 22 Oct 2021 07:55 AM IST
Abhishek Saxena
अमर उजाला ब्यूरो, आगरा
अमर उजाला ब्यूरो, आगरा
Published by: Abhishek Saxena
Updated Fri, 22 Oct 2021 07:55 AM IST
सार
एसएन मेडिकल कॉलेज नेत्र रोग विभाग और निजी चिकित्सकों के पास 30 फीसदी मरीज ऐसे पहुंच रहे हैं। वहीं 20 फीसदी बच्चे ड्राई आंख, फोटो फोबिया के शिकार हुए हैं। बच्चों की आंखों पर चश्मा लग रहा है।
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eye doctor
- फोटो : Video Blocks
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विस्तार
कोरोना महामारी में मोबाइल-लैपटॉप से पढ़ाई के कारण बच्चों की आंखों पर खास असर पड़ा। नजर कमजोर हुईं, फोटो फोबिया, कॉनियां में सूखापन आ गया। स्कूल खुलने के बाद परेशानी बढ़ने पर परिजन बच्चों को लेकर डॉक्टरों के पास पहुंच रहे हैं। महीने भर में नेत्र रोग विशेषज्ञों पर 30 फीसदी मरीज बढ़ गए हैं। इनमें 20 फीसदी बच्चे और बाकी कामकाजी लोग हैं।
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ओपीडी में 180 से 200 मरीज आ रहे
एसएन मेडिकल कॉलेज के नेत्र रोग विभागाध्यक्ष डॉ. हिमांशु यादव ने बताया कि ओपीडी में 180 से 200 मरीज आ रहे हैं। इनमें औसतन 50 मरीज बच्चे हैं। इनमें फोटो फोबिया (आंखों में रोशनी चुभना), कॉर्निया में सूखापन, करकराहट, लाल होना, पानी आना, नजर कम होने की शिकायत मिली। 10 से 15 ऐसे बच्चे रहे, जिनका चश्मे का नंबर बढ़वाना पड़ा। परिजनों से पता चला कि बच्चे चार से छह घंटे नियमित मोबाइल-लैपटॉप से पढ़ाई करते हैं। स्कूल में ब्लैक बोर्ड देखने में दिक्कत होने, सिरदर्द की परेशानी बताने पर यहां लाए हैं। डेढ़ साल पहले की ओपीडी पर नजर डालें तो ऐसी परेशानी वाले 30 से 35 बच्चे ही होते थे।
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लगातार मोबाइल देखे से कॉर्निया होती प्रभावित
वरिष्ठ नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. निखिल गुप्ता ने बताया कि मोबाइल-लैपटॉप की स्क्रीन पर नजर गड़ाए रहने से कॉर्निया की प्रारंभिक परत प्रभावित होने लगती है। दो से तीन घंटे लगातार और लंबे समय तक ऐसा करने से नजर कमजोर पड़ने के साथ आंखों की अन्य परेशानी भी मिल रही हैं। ऐसे मरीजों की संख्या 30 से 40 फीसदी तक बढ़ी है। इनमें कॉनिया में नमी की कमी, करकराहट, पानी आना, लाल होना अस्थायी परेशानी है, जो ड्रॉप से ठीक हो रही हैं। ओपीडी में आए कुल बच्चों में से 15 फीसदी बच्चों में चश्मा लगवाना पड़ रहा है।
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चश्मा बनवाने वाले 40 फीसदी लोग बढ़े
नयन ऑप्टिक के निदेशक ध्रुव जैन ने बताया कि बीते महीने में 35 से 40 फीसदी लोग चश्मा बनवाने वाले आ रहे हैं। इनमें से आधे से अधिक बच्चे शामिल हैं। इनमें ऐसे भी हैं, जो पहली बार बनवा रहे हैं, जो पहले चश्मा लगाते थे, उनका नंबर बढ़ गया है। 10 से 15 फीसदी वह हैं जिन्होंने वर्क फ्रॉम होम के दौरान इलेक्ट्रॉनिक गजट का इस्तेमाल किया।
केस स्टडी एक:
जयपुर हाउस के 10 साल की बच्ची कान्वेंट स्कूल में पढ़ती है। ऑनलाइन कक्षा लेने के साथ मोबाइल पर आए होमवर्क को भी पूरा करती थी। करीब पांच से सात घंटे मोबाइल का उपयोग करती थी। स्कूल खुलने के बाद धुंधला दिखना, सिर में दर्द रहने की परेशानी पर डॉक्टर को दिखाया, चश्मा लगावाना पड़ा।
केस स्टडी दो:
फतेहाबाद रोड कान्वेंट स्कूल में कक्षा पांच का छात्र चश्मा लगाता था। कोरोना महामारी के दौरान पढ़ाई फिर टीवी-मोबाइल पर पसंदीदा कार्यक्रम भी देखते थे। स्कूल खुलने पर बोर्ड धुंधला दिखता, बोर्ड पर लिखे अक्षर पढ़ने में भी दिक्कत होती। परेशानी होने पर परिजनों ने नेत्र रोग विशेषज्ञ को दिखाया, नंबर बढ़ा मिला।
यह बरतें सावधानी:
- मोबाइल पर 20-30 मिनट कार्य करने के बाद पांच से 10 मिनट का अंतराल लें।
- आंखों पर हथेली रखकर आराम दें। साफ और ठंडे पानी से आंखों को धोएं।
- कंप्यूटर, मोबाइल से नजर हटाकर कुछ देर तक दूर तक देखें, फिर कार्य करें।
- डॉक्टरी परामर्श पर लुब्रीकेंट आईड्रॉप का इस्तेमाल करें।
- बच्चों को लेटकर टीवी-मोबाइल नहीं देखने दें।
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केस स्टडी एक:
जयपुर हाउस के 10 साल की बच्ची कान्वेंट स्कूल में पढ़ती है। ऑनलाइन कक्षा लेने के साथ मोबाइल पर आए होमवर्क को भी पूरा करती थी। करीब पांच से सात घंटे मोबाइल का उपयोग करती थी। स्कूल खुलने के बाद धुंधला दिखना, सिर में दर्द रहने की परेशानी पर डॉक्टर को दिखाया, चश्मा लगावाना पड़ा।
केस स्टडी दो:
फतेहाबाद रोड कान्वेंट स्कूल में कक्षा पांच का छात्र चश्मा लगाता था। कोरोना महामारी के दौरान पढ़ाई फिर टीवी-मोबाइल पर पसंदीदा कार्यक्रम भी देखते थे। स्कूल खुलने पर बोर्ड धुंधला दिखता, बोर्ड पर लिखे अक्षर पढ़ने में भी दिक्कत होती। परेशानी होने पर परिजनों ने नेत्र रोग विशेषज्ञ को दिखाया, नंबर बढ़ा मिला।
यह बरतें सावधानी:
- मोबाइल पर 20-30 मिनट कार्य करने के बाद पांच से 10 मिनट का अंतराल लें।
- आंखों पर हथेली रखकर आराम दें। साफ और ठंडे पानी से आंखों को धोएं।
- कंप्यूटर, मोबाइल से नजर हटाकर कुछ देर तक दूर तक देखें, फिर कार्य करें।
- डॉक्टरी परामर्श पर लुब्रीकेंट आईड्रॉप का इस्तेमाल करें।
- बच्चों को लेटकर टीवी-मोबाइल नहीं देखने दें।
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