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रिश्वत: खुलें पुरानी फाइलें, तो सामने आएगा रिश्वतखोर प्रधान सहायक का खेल; रंगे हाथों पकड़ा गया
Sat, 09 Mar 2024 08:18 AM IST
धीरेन्द्र सिंह
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
Published by: धीरेन्द्र सिंह
Updated Sat, 09 Mar 2024 08:18 AM IST
सार
जिला विद्यालय निरीक्षक कार्यालय के प्रधान सहायक को रिश्वत लेते भ्रष्टाचार निवारण संगठन की टीम ने पकड़ा। इस मामले में शिक्षक संगठनों ने एसटीएफ और एसआईटी से जांच कराने की मांग की है।
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शिक्षा विभाग का बाबू रिश्वत लेते गिरफ्तार
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
आगरा में जिला विद्यालय निरीक्षक कार्यालय के प्रधान सहायक को भ्रष्टाचार निवारण संगठन ने रिश्वत लेने के आरोप में पकड़ा है। मृतक आश्रित कोटे में नौकरी, पेंशन और वेतन के नाम पर यह खेल लंबे समय से चलता आ रहा है। पुरानी फाइलों को खोला जाए तो भ्रष्टाचार की कई कहानी सामने आ सकती है।
शासन का निर्देश है कि जिला विद्यालय निरीक्षक कार्यालय में कोई भी शिक्षक या कर्मचारी अटैच नहीं किया जाएगा। इसके बाद भी कई कर्मचारी और शिक्षक बिना अटैच के कार्य करने में लगे हैं। राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ के वरिष्ठ उपाध्यक्ष डॉ. देवी सिंह नरवार का कहना है कि जिला विद्यालय निरीक्षक (डीआईओएस) कार्यालय की एसटीएफ और एसआईटी से जांच कराई जाए। इससे भ्रष्टाचार के कई खुलासे होंगे। प्रधान सहायक का पकड़ा जाना विभाग में भ्रष्टाचार की पुष्टि करता है।
उन्होंने डीआईओएस पर भी आरोप लगाया है। इससे पहले भी फर्जी नियुक्तियों की कई शिकायत हुई है लेकिन विभागीय कर्मचारी मामलों को दबाते रहे हैं। एक शिक्षक बिना स्कूल जाए, हर माह एक अधिकारी की मेहरबानी से वेतन ले रहा है। वह बच्चों को पढ़ाने से अधिक कार्यालय संबंधी कार्य करता है। कई बार शिक्षक की शिकायत होने पर भी कोई कार्रवाई नहीं की गई।
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शासन का निर्देश है कि जिला विद्यालय निरीक्षक कार्यालय में कोई भी शिक्षक या कर्मचारी अटैच नहीं किया जाएगा। इसके बाद भी कई कर्मचारी और शिक्षक बिना अटैच के कार्य करने में लगे हैं। राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ के वरिष्ठ उपाध्यक्ष डॉ. देवी सिंह नरवार का कहना है कि जिला विद्यालय निरीक्षक (डीआईओएस) कार्यालय की एसटीएफ और एसआईटी से जांच कराई जाए। इससे भ्रष्टाचार के कई खुलासे होंगे। प्रधान सहायक का पकड़ा जाना विभाग में भ्रष्टाचार की पुष्टि करता है।
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उन्होंने डीआईओएस पर भी आरोप लगाया है। इससे पहले भी फर्जी नियुक्तियों की कई शिकायत हुई है लेकिन विभागीय कर्मचारी मामलों को दबाते रहे हैं। एक शिक्षक बिना स्कूल जाए, हर माह एक अधिकारी की मेहरबानी से वेतन ले रहा है। वह बच्चों को पढ़ाने से अधिक कार्यालय संबंधी कार्य करता है। कई बार शिक्षक की शिकायत होने पर भी कोई कार्रवाई नहीं की गई।
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