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नगरपालिका की 11 दुकानों पर नोटिस चस्पा
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कासगंज। 60 वर्ष के बाद लोक निर्माण विभाग को कासगंज-अतरौली मार्ग पर राज्य सरकार की भूमि पर अतिक्रमण की सुध आई है। नगरपालिका की ओर से इस जमीन पर बनी दुकानों को किराए पर उठा दिया गया था। तब से दुकानदार किराया नियमित रूप से नगरपालिका को दे रहे है। अब लोक निर्माण विभाग ने कासगंज-अतरौली मार्ग की नगर पालिका की 11 दुकानों व आसपास की निजी स्वामित्व वाली भूमि को राज्य सरकार की भूमि बताते हुए कब्जा छोड़ने के लिए पांच दिन का समय देते हुए नोटिस चस्पा किए हैं। जिससे दुकानदारों में आक्रोश है।
यह दुकानें बिलराम गेट चौराहे से अतरौली रोड के मुख्य बाजार में है। 11 दुकानें नगरपालिका की किराएदारी की हैं। शेष निजी संपत्तियां हैं। अचानक की गई कार्रवाई से दुकानदारों में आक्रोश है। दुकानदारों का कहना है कि राज्य सरकार की दुकानें थीं तो नगरपालिका के द्वारा किस आधार पर दुकानों का आवंटन कर नीलामी राशि वसूल की और किराया लिया गया। दुकानदारों का भूमि पर कोई अतिक्रमण नहीं है। यदि दुकानों का हटाया जाता है तो दुकानदारों को क्षतिपूर्ति दी जाए और दूसरे स्थान पर दुकानें दी जाएं।
बोले दुकानदार -
जो दुकानें नगरपालिका की ओर से किराए पर दी गईं। वह दुकान अवैध कैसे हो सकती है और उन्हें कैसे तोड़ा जा सकता है। दुकानदार कहां जाएं। इस विकल्प पर भी नगरपालिका को ध्यान देना चाहिए। - अशोक कुमार वार्ष्णेय, दुकानदार
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हम नगरपालिका के नियमित किराएदार हैं। परिवार की आजीविका इसी दुकान से चलती है। दुकान तोड़ी गई तो आजीविका कैसे चलेगी। पहले दूसरे स्थान पर दुकान दी जानी चाहिए। - मनोज कुमार, दुकानदार
- नगरपालिका ने जो दुकानें किराए पर दी हैं वह विधिक प्रक्रिया अपनाते हुए दी गई हैं। यदि लोक निर्माण विभाग सड़क का चौड़ीकरण करना चाहता है तो दूसरे स्थान पर दुकान देनी चाहिए। - चाहतमियां, दुकानदार
अचानक दुकानों को अतिक्रमण घोषित कर पांच दिनों में खाली करने का नोटिस दिया जाना तानाशाही की कार्रवाई है। प्रशासन पहले दुकानदारों की समस्या का समाधान करें फिर कार्रवाई आगे बढ़ाए। - सत्य प्रकाश, दुकानदार
वर्जन
अतरौली-कासगंज मार्ग पर कई स्थानों पर अतिक्रमण है। शहर के हिस्से में ही अतिक्रमण है। नगरपालिका ने ही गलत रूप से दुकानों को किराए पर उठाया है। इसका समाधान भी नगरपालिका को करना है। शासन का स्पष्ट निर्देश अतिक्रमण हटाने का है। - एसपी सिंह, सहायक अभियंता, पीडब्ल्यूडी
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यह दुकानें बिलराम गेट चौराहे से अतरौली रोड के मुख्य बाजार में है। 11 दुकानें नगरपालिका की किराएदारी की हैं। शेष निजी संपत्तियां हैं। अचानक की गई कार्रवाई से दुकानदारों में आक्रोश है। दुकानदारों का कहना है कि राज्य सरकार की दुकानें थीं तो नगरपालिका के द्वारा किस आधार पर दुकानों का आवंटन कर नीलामी राशि वसूल की और किराया लिया गया। दुकानदारों का भूमि पर कोई अतिक्रमण नहीं है। यदि दुकानों का हटाया जाता है तो दुकानदारों को क्षतिपूर्ति दी जाए और दूसरे स्थान पर दुकानें दी जाएं।
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बोले दुकानदार -
जो दुकानें नगरपालिका की ओर से किराए पर दी गईं। वह दुकान अवैध कैसे हो सकती है और उन्हें कैसे तोड़ा जा सकता है। दुकानदार कहां जाएं। इस विकल्प पर भी नगरपालिका को ध्यान देना चाहिए। - अशोक कुमार वार्ष्णेय, दुकानदार
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हम नगरपालिका के नियमित किराएदार हैं। परिवार की आजीविका इसी दुकान से चलती है। दुकान तोड़ी गई तो आजीविका कैसे चलेगी। पहले दूसरे स्थान पर दुकान दी जानी चाहिए। - मनोज कुमार, दुकानदार
- नगरपालिका ने जो दुकानें किराए पर दी हैं वह विधिक प्रक्रिया अपनाते हुए दी गई हैं। यदि लोक निर्माण विभाग सड़क का चौड़ीकरण करना चाहता है तो दूसरे स्थान पर दुकान देनी चाहिए। - चाहतमियां, दुकानदार
अचानक दुकानों को अतिक्रमण घोषित कर पांच दिनों में खाली करने का नोटिस दिया जाना तानाशाही की कार्रवाई है। प्रशासन पहले दुकानदारों की समस्या का समाधान करें फिर कार्रवाई आगे बढ़ाए। - सत्य प्रकाश, दुकानदार
वर्जन
अतरौली-कासगंज मार्ग पर कई स्थानों पर अतिक्रमण है। शहर के हिस्से में ही अतिक्रमण है। नगरपालिका ने ही गलत रूप से दुकानों को किराए पर उठाया है। इसका समाधान भी नगरपालिका को करना है। शासन का स्पष्ट निर्देश अतिक्रमण हटाने का है। - एसपी सिंह, सहायक अभियंता, पीडब्ल्यूडी