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यूपी: एक भी पीजी और हॉस्टल पंजीकृत नहीं, चल रहे सैकड़ों; दिल्ली हादसे से भी नहीं ले रहे सबक
Tue, 08 Sep 2026 10:22 AM IST
Dhirendra Singh
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
Published by: Dhirendra Singh
Updated Tue, 08 Sep 2026 10:22 AM IST
सार
दिल्ली में इमारत ढहने की घटना के बाद आगरा में चल रहे सैकड़ों पीजी और हॉस्टल सवालों के घेरे में हैं। एडीए के सरकारी आंकड़ों में एक भी हॉस्टल पंजीकृत नहीं है, जबकि कई जगह बिना नक्शे और सुरक्षा इंतजामों के संचालन का आरोप है।
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हाॅस्टल सांकेतिक
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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विस्तार
दिल्ली की घटना के बाद आगरा में भी चल रहे सैकड़ों पीजी हाॅस्टल सवालों के घेरे में आ गए हैं। यहां भी नियमों को ताक पर रखकर हॉस्टल और पीजी (पेइंग गेस्ट) का कारोबार धड़ल्ले से फल-फूल रहा है। आगरा विकास प्राधिकरण (एडीए) के सरकारी आंकड़ों में शहर का एक भी हॉस्टल पंजीकृत नहीं है।
शहर में राजा की मंडी, खंदारी और दयालबाग जैसे शैक्षणिक व रिहायशी इलाकों में सैकड़ों हॉस्टल और पीजी बेधड़क चलाए जा रहे हैं। बड़े पैमाने पर लोगों ने अपने आवासीय मकानों में छोटे-छोटे कमरे बनाकर उन्हें हॉस्टल का रूप दे दिया है। व्यावसायिक गतिविधियों के लिए अनिवार्य नक्शा पास कराए बिना और बिना किसी पंजीकरण के चल रहे इन हॉस्टलों में सुरक्षा मानकों की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं।
अधिकांश हॉस्टलों के पास न तो अग्निशमन विभाग की एनओसी है और न ही आग या आपात स्थिति से निपटने के लिए सुरक्षा के कोई इंतजाम। कुछ हॉस्टलों में छात्रों के सुरक्षित बाहर निकलने के लिए खुले रास्ते तक नहीं हैं। ऐसे में यदि कोई अप्रिय घटना होती है तो रह रहे छात्र-छात्राओं की जान सीधे खतरे में पड़ सकती है। प्राधिकरण की उपाध्यक्ष एन. अरुन्मोली ने स्पष्ट किया कि हाॅस्टल जैसी व्यावसायिक गतिविधि को बिना सही मानचित्र के जरिये बनवाए भवन में संचालित नहीं किया जा सकता। ऐसे लोगों को चिह्नित कर उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
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शहर में राजा की मंडी, खंदारी और दयालबाग जैसे शैक्षणिक व रिहायशी इलाकों में सैकड़ों हॉस्टल और पीजी बेधड़क चलाए जा रहे हैं। बड़े पैमाने पर लोगों ने अपने आवासीय मकानों में छोटे-छोटे कमरे बनाकर उन्हें हॉस्टल का रूप दे दिया है। व्यावसायिक गतिविधियों के लिए अनिवार्य नक्शा पास कराए बिना और बिना किसी पंजीकरण के चल रहे इन हॉस्टलों में सुरक्षा मानकों की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं।
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अधिकांश हॉस्टलों के पास न तो अग्निशमन विभाग की एनओसी है और न ही आग या आपात स्थिति से निपटने के लिए सुरक्षा के कोई इंतजाम। कुछ हॉस्टलों में छात्रों के सुरक्षित बाहर निकलने के लिए खुले रास्ते तक नहीं हैं। ऐसे में यदि कोई अप्रिय घटना होती है तो रह रहे छात्र-छात्राओं की जान सीधे खतरे में पड़ सकती है। प्राधिकरण की उपाध्यक्ष एन. अरुन्मोली ने स्पष्ट किया कि हाॅस्टल जैसी व्यावसायिक गतिविधि को बिना सही मानचित्र के जरिये बनवाए भवन में संचालित नहीं किया जा सकता। ऐसे लोगों को चिह्नित कर उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
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