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झोलाछाप पर मेहरबानी पड़ी भारी, शासन तक पहुंची शिकायत के बाद अधिकारी पर 'बड़ी कार्रवाई'

Sun, 20 Oct 2019 02:06 PM IST
Abhishek Saxena न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा Published by: Abhishek Saxena Updated Sun, 20 Oct 2019 02:06 PM IST
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nodal incharge removed Complaint was reached to Principal Secretary
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : amar ujala
झोलाछाप और अवैध अस्पतालों पर कार्रवाई में ढिलाई बरतने पर अपंजीकृत अस्पताल के प्रभारी डॉ. अजय कपूर को हटा दिया गया है। प्रमुख सचिव चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण ने अब तक झोलाछाप पर क्या कार्रवाई हुई है, इसकी रिपोर्ट डीएम से तलब की है। 
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दो दिन के निरीक्षण पर आए प्रमुख सचिव चिकित्सा सेवाएं डॉ. देवेश चतुर्वेदी के पास शिकायत पहुंची कि झोलाछाप के अस्पतालों में मरीजों की मौत की निष्पक्ष जांच नहीं की गई। अब भी तीन जांचें लंबित हैं। इलाज करते हुए पकड़े गए सभी झोलाछाप पर एफआइआर नहीं कराई।
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इन शिकायतों पर प्रमुख सचिव ने शुक्रवार को इसकी रिपोर्ट डीएम से मांगी थी। शनिवार को समीक्षा बैठक में प्रमुख सचिव झोलाछाप पर की गई कार्रवाई पर असंतोष जताया। उन्होंने सीएमओ को तत्काल प्रभारी को हटाने के निर्देश दिए।
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इस पर सीएमओ डॉ. मुकेश वत्स ने उनको हटाते हुए एसीएमओ डॉ. आरके अग्निहोत्री को प्रभारी बना दिया है। डॉ. अग्निहोत्री अभी तक संचारी रोग विभाग का जिम्मा संभाल रहे थे।

किसी अन्य को पदभार न मिलने तक वह दोनों काम देखेंगे। सीएमओ डॉ. मुकेश वत्स ने बताया कि प्रमुख सचिव के निर्देश पर अपंजीकृत सेल प्रभारी डॉ. अजय कपूर को हटाकर उनके स्थान पर डॉ. आरके अग्निहोत्री को जिम्मेदारी दी गई है। 

बता दें कि एसीएमओ के नेतृत्व में 12 अस्पतालों में डॉक्टर न मिलने पर मरीज भर्ती पर रोक लगा दी। धनौली स्थित आर मधुराज में फिर भी मरीज भर्ती किए, इसमें इलाज से एक की मौत भी हो गई। ऐसे अन्य अस्पतालों में भी मरीज भर्ती किए जाने लगे। उन्होंने बिना मानक निरीक्षण किए अस्पतालों से मरीज भर्ती पर रोक भी हटा दी। सरोज हॉस्पिटल, संजीवनी हॉस्पिटल, श्री बांकेबिहारी हॉस्पिटल में प्रसूता की मौत की जांच भी पूरी नहीं की। 
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