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नव प्रतिष्ठित प्रतिमा को विराजमान किया
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शहर में जैन समाज के कार्यक्रम में मौजूद जैन मुनि व लोग
- फोटो : MAINPURI
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मैनपुरी। आचार्य प्रमुख सागर महाराज का ससंघ नगर प्रवेश रविवार को हुआ। प्रभाकर सागर महाराज, क्षुल्लक प्रगुण सागर महाराज, क्षुल्लिका प्रतिज्ञाश्री, प्रीतिश्री, परीक्षाश्री, प्रेक्षाश्री, आराधनाश्री भी साथ रहीं। इस दौरान नव प्रतिष्ठित प्रतिमा के साथ रथयात्रा निकाली गई। पांडुकशिला पर श्रीजी का अभिषेक और शांतिधारा की गई।
श्री पार्श्रवनाथ जिनालय उपवन मंदिर में आचार्यश्री का पाद प्रक्षालन करके आरती भक्ति की गई। नव प्रतिष्ठित प्रतिमा को मंत्रोच्चारण के साथ स्वर्णमय रथ पर विराजमान किया गया। रथ पर प्रतिमा को लेकर दिव्यांश जैन तथा इंद्रों के रूप में साहिल जैन, क्रिश जैन, शुभम जैन, आयुष जैन मौजूद रहे। सारथी के रूप में अनंत कुमार जैन, डॉक्टर सौरव जैन चल रहे थे। रथयात्रा में सर्वप्रथम आचार्य श्री का संघ और उनके पीछे पुरुष एवं महिला व बच्चे चल रहे थे। रथयात्रा में जगह-जगह आचार्य श्री का पाद प्रक्षालन एवं आरती करके पुष्प वर्षा भी की गई।
रथयात्रा उपवन मंदिर से चलकर कटरा जिनालय स्थित श्री अजीतनाथ जिनालय पहुंची। प्रतिमाओं को पांडुकशिला पर विराजमान कर आचार्यश्री द्वारा शांतिधारा की गई। शांतिधारा करने का सौभाग्य विजयकांत जैन, गौरव जैन पंजाबी कॉलोनी परिवार को मिला।
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आचार्य प्रमुख सागर ने कहा कि वह सर्वप्रथम 1995 में मैनपुरी नगर में रंगीन वस्त्रों में आए थे। यहीं से उनके जीवन में प्रथम संयम उपजा था। जैनाचार्य ने कहा कि ‘मैनपुरी नगरी मेरे संयास की प्रथम स्थली है’। जिसके बाद एलक अवस्था में, मुनि अवस्था में और उसके पश्चात आचार्य अवस्था में ससंघ लोगों की श्रद्धा और भक्ति हमें दोबारा लाई है।
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श्री पार्श्रवनाथ जिनालय उपवन मंदिर में आचार्यश्री का पाद प्रक्षालन करके आरती भक्ति की गई। नव प्रतिष्ठित प्रतिमा को मंत्रोच्चारण के साथ स्वर्णमय रथ पर विराजमान किया गया। रथ पर प्रतिमा को लेकर दिव्यांश जैन तथा इंद्रों के रूप में साहिल जैन, क्रिश जैन, शुभम जैन, आयुष जैन मौजूद रहे। सारथी के रूप में अनंत कुमार जैन, डॉक्टर सौरव जैन चल रहे थे। रथयात्रा में सर्वप्रथम आचार्य श्री का संघ और उनके पीछे पुरुष एवं महिला व बच्चे चल रहे थे। रथयात्रा में जगह-जगह आचार्य श्री का पाद प्रक्षालन एवं आरती करके पुष्प वर्षा भी की गई।
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रथयात्रा उपवन मंदिर से चलकर कटरा जिनालय स्थित श्री अजीतनाथ जिनालय पहुंची। प्रतिमाओं को पांडुकशिला पर विराजमान कर आचार्यश्री द्वारा शांतिधारा की गई। शांतिधारा करने का सौभाग्य विजयकांत जैन, गौरव जैन पंजाबी कॉलोनी परिवार को मिला।
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आचार्य प्रमुख सागर ने कहा कि वह सर्वप्रथम 1995 में मैनपुरी नगर में रंगीन वस्त्रों में आए थे। यहीं से उनके जीवन में प्रथम संयम उपजा था। जैनाचार्य ने कहा कि ‘मैनपुरी नगरी मेरे संयास की प्रथम स्थली है’। जिसके बाद एलक अवस्था में, मुनि अवस्था में और उसके पश्चात आचार्य अवस्था में ससंघ लोगों की श्रद्धा और भक्ति हमें दोबारा लाई है।