ताजनगरी के उद्योगों को मिलेगी संजीवनी: आगरा में 50 साल के बाद बन रहा है नया औद्योगिक क्षेत्र
नए औद्योगिक क्लस्टर के लिए 1050 एकड़ जमीन चिन्हित की गई है। इसके बनने से आगरा में रोजगार के अवसर बढ़ेंगे।
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आगरा में 50 साल बाद नया औद्योगिक क्लस्टर मिलने जा रहा है। एक्सप्रेसवे के पास 1,050 एकड़ जमीन को इंटीग्रेटेड मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर के रूप में चयनित किया गया है। इसके लिए कंसलटेंट चयन का काम जारी है। 10 अगस्त तक कंसलटेंट का चयन करके मास्टर प्लान बनाने की जिम्मेदारी दे दी जाएगी। जनवरी तक कंसलटेंट को मास्टर प्लान बनाकर सरकार को सौंपना होगा।
नेशनल इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट कारपोरेशन (एनआईडीसी) के रीजनल डिजाइन प्लानर (एकेआइसी- अमृतसर कोलकाता इंडस्ट्रियल कॉरिडोर) दिव्यांशु ने बताया कि टोल प्लाजा के निकट एक्सप्रेसवे के दोनों ओर इंटीग्रेटेड मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर (आईएमसी) विकसित किया जाएगा।
विस्तृत मास्टर प्लान तैयार करने के लिए कंसलटेंट चयन की प्रक्रिया चल रही है। इसका टेंडर आदि का कार्य पूरा हो चुका है। अभी 10 दिन का समय शेष है। 10 दिन बाद कंसलटेंट का चयन हो जाएगा। कंसलटेंट 6 माह के अंदर आईएमसी का विस्तृत मास्टर प्लान तैयार करेगा।
इंटीग्रेटेड मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर के जरिए आगरा के उद्योगों को संजीवनी मिल जाएगी। नेशनल चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज के अध्यक्ष मनीष अग्रवाल के मुताबिक लंबे समय से उद्यमी नए औद्योगिक क्षेत्र की मांग कर रहे थे। एक्सप्रेसवे के पास बनने से इसकी कनेक्टिविटी पूरे देश के साथ होगी।
यमुना एक्सप्रेसवे, आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे, बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे के नजदीक होने के कारण यहां से कंपनियां अपने उत्पादों को पूरे देश में आसानी से भेज सकेंगी। आगरा का यह औद्योगिक क्लस्टर पूरी दुनिया की कंपनियों को निवेश के लिए आकर्षित करेगा, वहीं स्थानीय लोगों को यहां कंपनियों में रोजगार मिल पाएगा।
तय कैटेगरी के उत्पाद बनेंगे
इस क्लस्टर में सरकार की अनुमति के बाद क्लस्टर के प्रोडक्ट तय होंगे। इस आईएमसी प्रोजेक्ट को चालू होने में डेढ़ से दो साल का समय लग सकता है।
स्मार्ट शहरों की तरह विकसित करने की योजना
नोडल एजेंसी के रूप में यूपीसीडा ने स्मार्ट शहरों में अपनाई गई विश्वस्तरीय सुविधाओं के लिहाज से इन्हें विकसित करने की योजना बनाई है। इन आईएमसी की स्थापना से प्रयागराज और आगरा में औद्योगिक गतिविधियों के साथ ही आवासीय और कॉमर्शियल गतिविधियां बढ़ेंगी।
अमृतसर-कोलकाता औद्योगिक गलियारे (एकेआईसी) की कुल लंबाई 1839 किलोमीटर है। कुल सात राज्यों से गुजरने वाले इस गलियारे का लगभग 57 प्रतिशत भाग उत्तर प्रदेश में आता है।
हैंडीक्राफ्ट एसोसिएशन के अध्यक्ष रजत अस्थाना ने कहा कि इंटीग्रेटेड मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर में हैंडीक्राफ्ट, लेदर, गारमेंट के साथ हर कैटेगरी के उद्योगों के लिए जमीन आरक्षित की जाए। इन्हें ब्लाक बार जगह दी जाए। इससे बड़ा क्षेत्र वहां शिफ्ट हो सकेगा।
नेशनल चैंबर के पूर्व अध्यक्ष नरिंदर सिंह ने कहा कि प्रस्तावित मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर इस ढंग से बनाया जाए कि उद्योगों की सभी जरूरतें उसी इलाके में पूरी हो सकें। कच्चे माल से लेकर पैकिंग की सुविधा और गोदाम तक बनाए जाएं। आगरा को इस क्लस्टर से काफी फायदा होगा।
फेम के उपाध्यक्ष भूपेंद्र सिंह सोबती ने कहा कि यमुना एक्सप्रेसवे से लेकर आगरा लखनऊ एक्सप्रेसवे और इनर रिंग रोड के एक ओर औद्योगिक इकाइयां तो दूसरी ओर आवासीय कॉलोनी के लिए जगह तय की जाए। ताकि कर्मचारी पास में ही निवास कर सकें।