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नया धमाका, ताजमहल नहीं ममी महल
ब्यूरो, अमर उजाला
Updated Mon, 26 Jan 2015 01:29 AM IST
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सात समंदर पार से भी सैलानियों को आकर्षित करने वाले ताजमहल के बारे में धमाके सरीखा नया खुलासा हुआ है। आगरा निवासी लेखक अफसर अहमद ने अपनी पुस्तक ‘ताजमहल या ममी महल’ में दावा किया है कि मुमताज महल का शव को मिस्र की ममी सरीखा के मिकल ट्रीटमेंट कर सुरक्षित करने के बाद दफनाया गया। किताब में इसका ब्योरा ही नहीं है बल्कि ताज से जुड़े कई और राज भी खोले गए हैं। 14 साल तक अध्ययन के बाद लिखी गई इस किताब का ई-वर्जन शुक्रवार को अमेजन डाट कॉम पर लांच हुआ।
आगरा के मूल निवासी और दिल्ली में पत्रकार अफसर अहमद की पुस्तक ‘ताजमहल या ममी महल’ में मुमताज की मौत के वक्त रहस्यमय गतिविधियों से पर्दा उठाने के साथ वह लिखा है जो अबतक लिखे गए इतिहास में सामने नहीं आया है। अफसर अहमद के मुताबिक मुगल बादशाह शाहजहां ने मुमताज के दफन के राज लोगों से छिपाने की कोशिश क्यों की, इसे सबूतों के साथ बताया गया है। इस्लामिक परंपरा और पद्वतियों के मुताबिक शव का सरंक्षण नहीं किया जा सकता था, लेकिन शहंशाह ने इसे वक्त की जरूरत के मुताबिक न केवल कराया, बल्कि इसे छिपाया भी। किताब में इन सवालों का जवाब भी खोजती है कि क्या मुगल सिर्फ इस्लामिक रिवाजों को ही मानते थे। अमेजन डाट कॉम पर किंडल फार्मेट में यह किताब उपलब्ध है।
ऐसे किया गया शव का ट्रीटमेंट
बुरहानपुर में मौत के बाद ताजमहल के बागीचे और फिर मुख्य गुंबद में दफनाई गई मुमताज महल के शव को कई सालों तक किस तरीके और किन तत्वों से संरक्षित किया गया, किताब के चौथे अध्याय में इसकी जानकारी दी गई है। शव सरंक्षण के आधुनिक तरीकों से मुगलिया दौर की तुलना की गई है। बताया गया है कि मुमताज के शव को गम, रेजिन, तेल, कपूर, कस्तूरी, नेट्रोन नमक, एलोवेरा, आंवला, एलम, सिरका, पारा, गुलाब जल, लिनेन, आबनूस और केसिया जैसे पदार्थों से संरक्षित किया गया था। मिस्र और राजी सभ्यता में शव का संरक्षण कैसे किया जाता था, इसकी जानकारी भी दी गई है।
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तो मुश्किल हो जाता ताज निर्माण
मुमताज महल के दो अमानती दफन और एक आखिरी दफन हुआ। इस दौरान शव को केमिकल फार्मूला से सुरक्षित रखा गया। मुगलों में इससे पहले शव संरक्षित करने की परंपरा नहीं थी, इसलिए तत्कालीन लेखकों ने इसे छिपाया। अगर तब शव को मिस्र की ममी की तरह सुरक्षित रखने की जानकारी फैलती तो शायद ताजमहल के निर्माण में बाधाएं आ सकती थीं।
अफसर अहमद, लेखक एवं पत्रकार
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आगरा के मूल निवासी और दिल्ली में पत्रकार अफसर अहमद की पुस्तक ‘ताजमहल या ममी महल’ में मुमताज की मौत के वक्त रहस्यमय गतिविधियों से पर्दा उठाने के साथ वह लिखा है जो अबतक लिखे गए इतिहास में सामने नहीं आया है। अफसर अहमद के मुताबिक मुगल बादशाह शाहजहां ने मुमताज के दफन के राज लोगों से छिपाने की कोशिश क्यों की, इसे सबूतों के साथ बताया गया है। इस्लामिक परंपरा और पद्वतियों के मुताबिक शव का सरंक्षण नहीं किया जा सकता था, लेकिन शहंशाह ने इसे वक्त की जरूरत के मुताबिक न केवल कराया, बल्कि इसे छिपाया भी। किताब में इन सवालों का जवाब भी खोजती है कि क्या मुगल सिर्फ इस्लामिक रिवाजों को ही मानते थे। अमेजन डाट कॉम पर किंडल फार्मेट में यह किताब उपलब्ध है।
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ऐसे किया गया शव का ट्रीटमेंट
बुरहानपुर में मौत के बाद ताजमहल के बागीचे और फिर मुख्य गुंबद में दफनाई गई मुमताज महल के शव को कई सालों तक किस तरीके और किन तत्वों से संरक्षित किया गया, किताब के चौथे अध्याय में इसकी जानकारी दी गई है। शव सरंक्षण के आधुनिक तरीकों से मुगलिया दौर की तुलना की गई है। बताया गया है कि मुमताज के शव को गम, रेजिन, तेल, कपूर, कस्तूरी, नेट्रोन नमक, एलोवेरा, आंवला, एलम, सिरका, पारा, गुलाब जल, लिनेन, आबनूस और केसिया जैसे पदार्थों से संरक्षित किया गया था। मिस्र और राजी सभ्यता में शव का संरक्षण कैसे किया जाता था, इसकी जानकारी भी दी गई है।
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तो मुश्किल हो जाता ताज निर्माण
मुमताज महल के दो अमानती दफन और एक आखिरी दफन हुआ। इस दौरान शव को केमिकल फार्मूला से सुरक्षित रखा गया। मुगलों में इससे पहले शव संरक्षित करने की परंपरा नहीं थी, इसलिए तत्कालीन लेखकों ने इसे छिपाया। अगर तब शव को मिस्र की ममी की तरह सुरक्षित रखने की जानकारी फैलती तो शायद ताजमहल के निर्माण में बाधाएं आ सकती थीं।
अफसर अहमद, लेखक एवं पत्रकार