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ओवरलोडिंग के खिलाफ नीरज अग्रवाल ने छेड़ रखी है जंग, लोगों को रहे हैं जागरुक
न्यूज डेस्क, अमर उजाला मथुरा
Updated Fri, 12 Oct 2018 10:57 PM IST
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बेरोक-टोक दौड़ रहे ओवरलोड वाहन
- फोटो : अमर उजाला
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सड़कों पर सबसे बड़ा खतरा ओवरलोड वाहन हैं। सड़कों पर होने वाले 50 फीसदी हादसे की वजह यही वाहन बनते हैं। ओवरलोडिंग रोकने को प्रशासनिक प्रयास भी होते रहते हैं, लेकिन मथुरा के रोटेरियन नीरज अग्रवाल ने बाकायदा जंग छेड़ रखी है।
उनका कहना है कि रावण रूपी ओवरलोडिंग को खत्म करने के लिए सभी को आगे आना होगा। वो अभी तक 48 पत्र अफसरों को भेज चुके। केवल पत्र ही नहीं खुद लोगों को जागरूक करते हैं। वाहन चालकों को समझाते हैं।
जीएलए यूनिवर्सिटी के सेक्रेटरी और कोषाध्यक्ष नीरज अग्रवाल की यह मुहिम सुरक्षित सफर के लिए है। जिंदगियां बचाने के लिए है। जब भी ओवरलोडिंग के खिलाफ प्रशासनिक कसरत होती है तो वह अफसरों से मिलकर बाकायदा उन्हें धन्यवाद देते हैं। उनके उस प्रयास को सराहते हैं।
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उनका कहना है कि रावण रूपी ओवरलोडिंग को खत्म करने के लिए सभी को आगे आना होगा। वो अभी तक 48 पत्र अफसरों को भेज चुके। केवल पत्र ही नहीं खुद लोगों को जागरूक करते हैं। वाहन चालकों को समझाते हैं।
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जीएलए यूनिवर्सिटी के सेक्रेटरी और कोषाध्यक्ष नीरज अग्रवाल की यह मुहिम सुरक्षित सफर के लिए है। जिंदगियां बचाने के लिए है। जब भी ओवरलोडिंग के खिलाफ प्रशासनिक कसरत होती है तो वह अफसरों से मिलकर बाकायदा उन्हें धन्यवाद देते हैं। उनके उस प्रयास को सराहते हैं।
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एक हादसा देख शुरू की मुहिम
नीरज अग्रवाल कहते हैं कि हालात ऐसे हैं कि अगर किसी सवारी वाहन की क्षमता 10 की है तो उसमें 20-20 लोग चढ़ जाते हैं। लटक कर लोग सफर करते हैं। उन्होंने बताया कि तीन साल पहले एक ओवरलोड टेंपो पलट गया था, जिसमें कई लोग हताहत हुए।
उसी दिन से उन्होंने ओवरलोड के खिलाफ आवाज बुलंद कर दी। अब भी जब उन्हें कोई ओवरलोड वाहन मिलता है तो तत्काल संबंधित विभाग को फोन करके जानकारी देते हैं। वो अब तक अफसरों को 48 पत्र भी भेज चुके हैं।
उनके पत्र डीएम, एसएसपी, सिटी मजिस्ट्रेट, एसडीएम, एसपी ट्रैफिक, सर्किल आफिसर, कोतवाली प्रभारी तक को जाते हैं। नीरज अग्रवाल का कहना है कि ओवरलोडिंग के खिलाफ उनकी मुहिम लगातार जारी रहेगी। इस रावण रूपी समस्या का अंत करने के लिए सामूहिक प्रयास की जरूरत है।
उसी दिन से उन्होंने ओवरलोड के खिलाफ आवाज बुलंद कर दी। अब भी जब उन्हें कोई ओवरलोड वाहन मिलता है तो तत्काल संबंधित विभाग को फोन करके जानकारी देते हैं। वो अब तक अफसरों को 48 पत्र भी भेज चुके हैं।
उनके पत्र डीएम, एसएसपी, सिटी मजिस्ट्रेट, एसडीएम, एसपी ट्रैफिक, सर्किल आफिसर, कोतवाली प्रभारी तक को जाते हैं। नीरज अग्रवाल का कहना है कि ओवरलोडिंग के खिलाफ उनकी मुहिम लगातार जारी रहेगी। इस रावण रूपी समस्या का अंत करने के लिए सामूहिक प्रयास की जरूरत है।