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मुशायरा व कवि सम्मेलन
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कासगंज के सिढपुरा में आयोजित कवि सम्मेलन में काव्य पाठ करते कवि ।
- फोटो : KASGANJ
सिढ़पुरा। दादा मियां हजरत मजार पर आयोजित उर्स में शनिवार की रात ऑल इंडिया मुशायरा और कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। गजलकार हाशिम फिरोजाबादी ने अपनी गजल में कहा कि ...और क्या चाहिए एक वतन के लिए यह तिरंगा बहुत है कफन के लिए प्रस्तुत की।
मुख्य अतिथि अतिथि पूर्व विधायक नजीबा खान जीनत, नाशी खान एवं डॉ. नवल किशोर शाक्य ने शमां जलाकर मुशायरे का शुभारंभ किया गया। इंतजामिया कमेटी के अध्यक्ष निजाम अहमद बब्बन व अन्य पदाधिकारियों ने मुख्य अतिथि का चांदी का मुकुट व माला पहनाकर स्वागत किया। कवि विकास बौखल ने पढ़ा कि क्या कहूं इस दौर का इंसान कैसा हो गया...।
कवि सबा बलरामपुरी ने सुनाया कि तुम्हारी मोहब्बत पर हम मर मिटेंगे। शायर वाहिद अंसारी ने गजल पढ़ी कि उसकी आंखें बोल रही है वह कितना रोया होगा। शायर साइस्ता सना ने गजल प्रस्तुत की कि - और वो नादान इसे प्यार समझ लेता है। कवि अनवर अमान ने सुनाया कि उसने नजरों से गिराया तो संभलने ना दिया...।
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कवि विपिन शर्मा ने कविता पढ़ी कि तुम क्या जानो, तुम क्या हो...। कवि डॉ. अजय अटल ने गीत पढ़ा कि नीलिया झील के पानी में नहाओ तो सही। मंच संचालक कवि नदीम फर्रूख ने गीत पढ़ा कि हमीं को कातिल कहेगी दुनिया। उनके अतिरिक्त अन्य कवियों ने भी कविता पाठ किया। इस दौरान तौहीद सिद्दीकी, शानू सैफी, अपीस सिद्दीकी, रियाज सैफी, नासिर सिद्दीकी, अख्तियार कुरैशी, अंसार, इजराइल व्यवस्था में जुटे रहे।
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मुख्य अतिथि अतिथि पूर्व विधायक नजीबा खान जीनत, नाशी खान एवं डॉ. नवल किशोर शाक्य ने शमां जलाकर मुशायरे का शुभारंभ किया गया। इंतजामिया कमेटी के अध्यक्ष निजाम अहमद बब्बन व अन्य पदाधिकारियों ने मुख्य अतिथि का चांदी का मुकुट व माला पहनाकर स्वागत किया। कवि विकास बौखल ने पढ़ा कि क्या कहूं इस दौर का इंसान कैसा हो गया...।
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कवि सबा बलरामपुरी ने सुनाया कि तुम्हारी मोहब्बत पर हम मर मिटेंगे। शायर वाहिद अंसारी ने गजल पढ़ी कि उसकी आंखें बोल रही है वह कितना रोया होगा। शायर साइस्ता सना ने गजल प्रस्तुत की कि - और वो नादान इसे प्यार समझ लेता है। कवि अनवर अमान ने सुनाया कि उसने नजरों से गिराया तो संभलने ना दिया...।
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कवि विपिन शर्मा ने कविता पढ़ी कि तुम क्या जानो, तुम क्या हो...। कवि डॉ. अजय अटल ने गीत पढ़ा कि नीलिया झील के पानी में नहाओ तो सही। मंच संचालक कवि नदीम फर्रूख ने गीत पढ़ा कि हमीं को कातिल कहेगी दुनिया। उनके अतिरिक्त अन्य कवियों ने भी कविता पाठ किया। इस दौरान तौहीद सिद्दीकी, शानू सैफी, अपीस सिद्दीकी, रियाज सैफी, नासिर सिद्दीकी, अख्तियार कुरैशी, अंसार, इजराइल व्यवस्था में जुटे रहे।