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मोहर्रमः यहां रखा जाता है फूलों का ताजिए, जानिए उसकी तारीख और खासियत
Fri, 30 Aug 2019 12:05 AM IST
Abhishek Saxena
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
Published by: Abhishek Saxena
Updated Fri, 30 Aug 2019 12:05 AM IST
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मोहर्रम का जुलूस (फाइल फोटो)
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मोहर्रम का चांद दिखाई देने के साथ ही मोहर्रम शुरू हो जाएंगे। एक सितंबर से मोहर्रम शुरू हो सकते हैं। शिया इमामबाड़ों में ताजियों और अलम को सजाने का काम शुरू हो गया है।
मोहर्रम की पहली तारीख से मजलिसों का दौर शुरू हो जाएगा। पाय चौकी पर रखे जाने वाला ऐतिहासिक फूलों का ताजिया मोहर्रम की सातवीं तारीख को रखा जाएगा।
नायब काजी मौलाना मोहम्मद उजैर आलम ने बताया कि इसी महीने की 10 तारीख को हजरत इमाम हुसैन ने करबला की सरजमीं पर इस्लाम को बचाने के लिए अपने अहले खानदान के साथ खुद को शहीद कर दिया था। ऐतिहासिक फूलों का ताजिया पाय चौकी में रखा जाता है।
ये भी पढ़ें: तस्वीरें: गमगीन माहौल में निकले ताजिये के जुलूस, या हुसैन और या अली की गूंजी सदाएं
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मोहर्रम की पहली तारीख से मजलिसों का दौर शुरू हो जाएगा। पाय चौकी पर रखे जाने वाला ऐतिहासिक फूलों का ताजिया मोहर्रम की सातवीं तारीख को रखा जाएगा।
नायब काजी मौलाना मोहम्मद उजैर आलम ने बताया कि इसी महीने की 10 तारीख को हजरत इमाम हुसैन ने करबला की सरजमीं पर इस्लाम को बचाने के लिए अपने अहले खानदान के साथ खुद को शहीद कर दिया था। ऐतिहासिक फूलों का ताजिया पाय चौकी में रखा जाता है।
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इस ताजिये पर जियारत करने पूरे शहर के लोग आते हैं। इसके अलावा मुस्लिम बस्तियों में भी लोग ताजिए रखते हैं। दूसरी ओर, शिया समुदाय के इमामबाड़ों में मोहर्रम की पहली तारीख से मजलिसें शुरू हो जाएंगी। इनमें मुस्लिम विद्वान हजरत इमाम हुसैन की शहादत का जिक्र करेंगे। घरों में जिक्र-ए-हुसैन शुरू हो जाएगा।
अंजुमन-ए-पंजेतनी के संचालक प्यारे मियां ने बताया कि मोहर्रम की पहली तारीख से लेकर आठ रवि उल अव्वल तक शिया समुदाय की औरतें शोक मनाती हैं। इस दौरान काले लिबास पहने जाते हैं।
ये भी पढ़ें: ...लहू में तर वो इमाम-ए-हुसैन आते हैं
शिया समुदाय के इमामबाड़े
1-शाहगंज स्थित अजाखाना
2-इमामबाड़ा मीर नियाज अली
3-पुराना इमामबाड़ा गांधी चौक
4-इमामबाड़ा जियाबलु हसन
5-इमामबाड़ा हुसैनिया घास की मंडी
6-इमामबाड़ा हाजी हसन फाटक लोहामंडी
7-इकान हैदर घास की मंडी
अंजुमन-ए-पंजेतनी के संचालक प्यारे मियां ने बताया कि मोहर्रम की पहली तारीख से लेकर आठ रवि उल अव्वल तक शिया समुदाय की औरतें शोक मनाती हैं। इस दौरान काले लिबास पहने जाते हैं।
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शिया समुदाय के इमामबाड़े
1-शाहगंज स्थित अजाखाना
2-इमामबाड़ा मीर नियाज अली
3-पुराना इमामबाड़ा गांधी चौक
4-इमामबाड़ा जियाबलु हसन
5-इमामबाड़ा हुसैनिया घास की मंडी
6-इमामबाड़ा हाजी हसन फाटक लोहामंडी
7-इकान हैदर घास की मंडी