मथुरा में 2.5 लाख बंदरों ने मचा रखा है उत्पात, घर बने पिंजरे, लोग बोले- कब चेतेगा प्रशासन
- बंदरों के कारण धार्मिक नगरी मथुरा-वृंदावन की छवि हो रही खराब
- स्थानीय लोग बोले- जब आबादी के बराबर हो जाएंगे बंदर, तब चेतेगा प्रशासन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
श्रीकृष्ण की नगरी मथुरा-वृंदावन में बंदरों का उत्पात है। कब किस पर हमला कर दें, हाथ से सामान छीन लें और आंखों पर लगा चश्मा कर उतार ले जाएं, कह नहीं सकते। इनके उत्पात का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि सांसद हेमा मालिनी ने संसद में भी इस समस्या को उठाया था।
परिणाम यह हुआ कि बोर्ड गठित हुआ, सेमिनार हुए और मंकी सफारी की योजना भी बनी, लेकिन योजना परवान नहीं चढ़ सकी। स्थानीय लोगों का कहना है कि धार्मिक नगरी की छवि बंदरों के कारण खराब हो रही है। जब आबादी के बराबर बंदर हो जाएंगे तब प्रशासन चेतेगा।
दो गुनी हो गई है प्रजनन क्षमता
मथुरा-वृंदावन में मौजूदा समय में बंदरों की संख्या करीब 2.5 लाख हैं। प्राकृतिक भोजन मिलना बंद हो चुका है। फ्रूटी और अन्य खाद्य पदार्थ खा रहे हैं। वैज्ञानिक मानते हैं कि खानपान के कारण ही बंदरों का प्रजनन काल बदल गया है। पहले एक साल में बच्चे देते थे, अब करीब छह माह में बच्चे होते हैं।
सांसद प्रतिनिधि जनार्दन शर्मा ने बताया कि लोगों की शिकायत पर सांसद हेमा मालिनी ने जिले में बंदरों के उत्पात का मुद्दा संसद में उठाया था। इसके बाद मंकी सफारी की योजना बनी। बोर्ड गठित हुआ और कई सेमिनार आयोजित किए गए। दो हजार बंदरों को सीमा से बाहर ले जाने की योजना बनी। मंजूरी भी मिली लेकिन कोई संस्था इसके लिए आगे नहीं आई।
लोग पिंजरों में कैद, बंदर बाहर घूम रहे
स्थानीय निवासी प्रमोद गर्ग ने बताया कि बंदरों से बचने के लिए मथुरा, वृंदावन, गोवर्धन, बलदेव समेत अन्य स्थानों पर घर बनवाते समय लोहे की जाली लगवाई जाती है। इसके बाद भी आए दिन बंदरों के हमले होते रहते हैं।
बंदर बढ़े, पक्षी गायब हो रहे
मथुरा में बड़ा क्षेत्र वन विभाग का है। यहां मोर समेत तमाम तरह के पक्षी रहते हैं। बंदर पक्षियों के अंडों को नष्ट कर देते हैं। घोंसला उजाड़ देते हैं। इसलिए पक्षी कम हो रहे हैं।
गंभीर बीमारी हो सकती
जिले में प्रतिदिन बंदर करीब 300 लोगों को काट या नोंच रहे हैं। लोग सरकारी और निजी अस्पतालों में कुत्तों के काटने से कम, बंदरों के काटने के बाद रैबीज का टीका लगाने पहुंच रहे हैं। डॉ. अभिषेक के मुताबिक बंदरों के काटने अथवा नोंचने से डायरिया, अमीवाइसिस, अपच, बुखार, पेट में अल्सर-कैंसर, टीबी, लीवर में सूजन, रैबीज आदि गंभीर बीमारियां होती हैं।
फल-सब्जी नहीं उगाते किसान
किसान सुनील भारद्वाज ने बताया कि जिले में बड़ी मात्रा में खेती होती है लेकिन किसान फल और सब्जी नहीं उगा पाते है। इसका प्रमुख कारण बंदर हैं। अब मथुरा-वृंदावन शहर में ही नहीं बंदर गांवों तक पहुंच चुके हैं और खेतों में नुकसान पहुंचा रहे हैं।
गोवर्धन के समाजसेवी गौतम खंडेलवाल ने कहा कि सांसद से मिलकर मंकी सफारी की मांग की थी। वन विभाग के पास काफी जमीन है। वहां सफारी बन जाए तो श्रद्धालु वहां जाकर बंदरों को खाना खिला सकते हैं।
शिक्षिका सोनिका शर्मा ने कहा कि वृंदावन में मेरी मां सुमन शर्मा पर बंदरों ने हमला कर दिया था। पहले होली गेट पर रहती थीं। स्कूल जाते समय बच्चों पर हमला करते थे। घर छोड़ना पड़ा। बाहरी इलाके में भी बंदर आ गए हैं।
समाजसेविका राधिका गोस्वामी ने कहा कि बंदरों से निजात पाने के लिए ब्रज वृंदावन हैरिटेज अलाइव संस्था की ओर से इलाहाबाद हाईकोर्ट में रिट दायर की जा चुकी है। बंदरों के उत्पात से यहां आने वाले देशी-विदेशी श्रद्धालु हमले का शिकार हो रहे हैं।
जल्द निकाला जाएगा टेंडर- नगर आयुक्त
नगर आयुक्त रविंद्र कुमार मांदड़ ने कहा कि बंदरों की संख्या कम करने के लिए शीघ्र ही 2000 बंदरों को पकड़कर बाहरी क्षेत्र में छोड़ने के लिए टेंडर निकाला जाएगा। हर साल इतने बंदरों को टीका लगेगा तो संख्या कम हो जाएगी।
क्षेत्रीय वन अधिकारी एमके मीणा ने कहा कि केंद्र सरकार से पैसे रिलीज होने का इंतजार है। प्रतिवर्ष 2000 बंदरों को वेटरनेरी विश्वविद्यालय में टीका लगवाने के बाद दोबारा उन्हीं स्थानों पर छोड़ा जाएगा। इससे उनकी संख्या पर काबू रखा जा सकेगा।