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मनी लॉन्ड्रिंग केस: अंसल ग्रुप की 598 करोड़ रुपये की संपत्तियां अटैच
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नई दिल्ली/आगरा। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने रियल एस्टेट कंपनी अंसल प्रॉपर्टीज एंड इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड (एपीआईएल) के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए उत्तर प्रदेश के आगरा में 598 करोड़ रुपये की भूमि अटैच कर ली है। यह कार्रवाई गुरुग्राम के विभिन्न सेक्टरों में भूमि अधिग्रहण और उसे अवैध रूप से रिलीज करने से जुड़ी मनी लॉन्ड्रिंग जांच के तहत की गई है।
जांच एजेंसी के अनुसार यह मामला गुरुग्राम के सेक्टर 58-63 और 65-67 में भूमि अधिग्रहण में हुई व्यापक अनियमितताओं से जुड़ा है। ईडी का आरोप है कि मूल रूप से सार्वजनिक विकास (हुडा) के लिए अधिसूचित भूमि को एक भ्रष्ट प्रक्रिया के तहत निजी बिल्डरों को लाभ पहुंचाने के लिए छोड़ दिया गया था। जांच में सामने आया कि अंसल ग्रुप ने संबंधित अधिकारियों के साथ मिलकर औने-पौने दामों पर जमीन हथियाने के लिए मुखौटा कंपनियों का सहारा लिया। आगरा में अंसल ग्रुप की शास्त्रीपुरम के पास दहतोरा से बिचपुरी रोड के बीच और शमशाबाद रोड पर काॅलोनियां हैं।
जमीन मालिकों को आर्थिक नुकसान
ईडी ने बताया कि अधिग्रहण की अधिसूचना जारी होने के बाद किसानों और जमीन मालिकों की स्थिति कमजोर हो गई थी, जिसका फायदा उठाकर उनसे बाजार भाव से काफी कम कीमत पर जमीनें लिखवा ली गईं। यह मामला सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर 2019 में दर्ज की गई सीबीआई की एफआईआर पर आधारित है। ईडी ने पाया कि जिस विवादित जमीन पर एसेंसियां और वर्सालिया जैसे प्रोजेक्ट विकसित किए गए, वह अब बेची जा चुकी है, इसलिए उसके बदले आगरा में स्थित समूह की अन्य संपत्तियों को जब्त किया गया है।
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जांच एजेंसी के अनुसार यह मामला गुरुग्राम के सेक्टर 58-63 और 65-67 में भूमि अधिग्रहण में हुई व्यापक अनियमितताओं से जुड़ा है। ईडी का आरोप है कि मूल रूप से सार्वजनिक विकास (हुडा) के लिए अधिसूचित भूमि को एक भ्रष्ट प्रक्रिया के तहत निजी बिल्डरों को लाभ पहुंचाने के लिए छोड़ दिया गया था। जांच में सामने आया कि अंसल ग्रुप ने संबंधित अधिकारियों के साथ मिलकर औने-पौने दामों पर जमीन हथियाने के लिए मुखौटा कंपनियों का सहारा लिया। आगरा में अंसल ग्रुप की शास्त्रीपुरम के पास दहतोरा से बिचपुरी रोड के बीच और शमशाबाद रोड पर काॅलोनियां हैं।
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जमीन मालिकों को आर्थिक नुकसान
ईडी ने बताया कि अधिग्रहण की अधिसूचना जारी होने के बाद किसानों और जमीन मालिकों की स्थिति कमजोर हो गई थी, जिसका फायदा उठाकर उनसे बाजार भाव से काफी कम कीमत पर जमीनें लिखवा ली गईं। यह मामला सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर 2019 में दर्ज की गई सीबीआई की एफआईआर पर आधारित है। ईडी ने पाया कि जिस विवादित जमीन पर एसेंसियां और वर्सालिया जैसे प्रोजेक्ट विकसित किए गए, वह अब बेची जा चुकी है, इसलिए उसके बदले आगरा में स्थित समूह की अन्य संपत्तियों को जब्त किया गया है।
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