बीजेपी से रूठे दलितों को मनाएगा संघ
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माना जा रहा है कि संघ प्रमुख का दलित के घर भोजन करना बड़े मकसद का एक हिस्सा है। जिस तरह पिछले दिनों केंद्र की मोदी सरकार पर विपक्ष ने दलित उत्पीड़न के मुद्दे पर हमला बोल रखा है, उसे देखते हुए अब संघ ने मोर्चा संभाल लिया है। उत्तर प्रदेश में चुनाव होने हैं और यहाँ दलित वोटर की फैक्टर है। लोकसभा चुनाव में मोदी के करिश्मे से बीजेपी ने दलित वोट बैंक में सेंध लगाई थी। नतीजा में 80 में से 71 सीट बीजेपी को मिली और बसपा 00 पर पहुँच गई।
इस बार कहानी अलग है। मायावती फॉर्म में हैं । बीजेपी के लिए दलित वोट पाना आसान नहीं। रोहित वेमुला, ऊना कांड जैसे मामले टेंशन बढ़ा रहे हैं। ऐसे में बीजेपी और संघ ने वही प्लान बनाया है जो 2009 में राहुल गांधी का था। राहुल भी दलितों के घर जाते थे, भोजन करते थे। असर शानदार रहा। कांग्रेस को कामयाबी मिली। अब पहले बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह ने वाराणसी में दलित के घर भोजन किया ।
अब आगरा में मोहन भागवत ने। यानो बीजेपी और संघ के शीर्षथ नेतृव ने दलितों के साथ होने का सन्देश दिया है। आगरा से इसके खास मायने हैं भो हैं। यहाँ दलित आबादी 30 प्रतिशत है। जति की राजनीती में ताजनगरी को दलितों की राजधानी कहा जाता है। जाहिर है आरएसएस का दलितों को गले लगाने का सन्देश दूर तक जाएगा।