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अनुच्छेद 370 की तरह न्याय व्यवस्था से अंग्रेजी को हटाएं पीएम मोदी, जानें किसने की यह मांग
Mon, 25 Nov 2019 12:53 AM IST
मुकेश कुमार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
Published by: मुकेश कुमार
Updated Mon, 25 Nov 2019 12:53 AM IST
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उत्तराखंड विधि आयोग के सदस्य चंद्रशेखर उपाध्याय
- फोटो : अमर उजाला
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उत्तराखंड के विधि आयोग के सदस्य एवं पूर्व एडिशनल एडवोकेट जनरल चंद्रशेखर उपाध्याय का कहना है कि जिस तरह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 को हटाया, उसी तरह अदालतों में कामकाज और फैसले अंग्रेजी में दिए जाने की व्यवस्था को खत्म करें।
उन्होंने कहा कि जैसे अनुच्छेद 370 अस्थाई रूप से लगाया गया था, वैसे ही अनुच्छेद 349 को अस्थाई रूप से 15 वर्ष के लिए लागू किया गया था। 349 के तहत ही अदालतों का कामकाज अंग्रेजी में किया जा रहा है। यह राजभाषा में होना चाहिए। जिस राज्य में जो राजभाषा है, उसी में अदालती कामकाज किया जाए।
1990 से चला रहे अभियान
मूल रूप से ही आगरा के रहने वाले चंद्रशेखर 23 मार्च 1990 से इस मुद्दे पर अभियान चला रहे हैं। शहीद-ए-आजम भगत सिंह के बलिदान दिवस पर उन्होंने इसका आगाज आगरा से ही किया था। रविवार को लोक निर्माण विभाग के गेस्ट हाउस में अमर उजाला से बातचीत में उन्होंने कहा कि हिंदीभाषी वादकारी आजादी के 70 साल बाद भी अदालत की कार्यवाही को न तो पढ़ पा रहे हैं, न ही समझ पा रहे हैं।
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उन्होंने कहा कि जैसे अनुच्छेद 370 अस्थाई रूप से लगाया गया था, वैसे ही अनुच्छेद 349 को अस्थाई रूप से 15 वर्ष के लिए लागू किया गया था। 349 के तहत ही अदालतों का कामकाज अंग्रेजी में किया जा रहा है। यह राजभाषा में होना चाहिए। जिस राज्य में जो राजभाषा है, उसी में अदालती कामकाज किया जाए।
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1990 से चला रहे अभियान
मूल रूप से ही आगरा के रहने वाले चंद्रशेखर 23 मार्च 1990 से इस मुद्दे पर अभियान चला रहे हैं। शहीद-ए-आजम भगत सिंह के बलिदान दिवस पर उन्होंने इसका आगाज आगरा से ही किया था। रविवार को लोक निर्माण विभाग के गेस्ट हाउस में अमर उजाला से बातचीत में उन्होंने कहा कि हिंदीभाषी वादकारी आजादी के 70 साल बाद भी अदालत की कार्यवाही को न तो पढ़ पा रहे हैं, न ही समझ पा रहे हैं।
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एक सवाल पर उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा है कि नए भारत में अब कुछ अस्थाई नहीं चलेगा, तो फिर 349 की अस्थाई व्यवस्था क्यों चल रही है? मौजूदा शीतकालीन सत्र में ही सांसदों को संकल्प लेना चाहिए कि वे इसे खत्म कर भारतीय भाषाओं में न्याय की व्यवस्था लागू करेंगे।
'विशेष सत्र बुलाकर प्रस्ताव भेजें योगी'
चंद्रशेखर उपाध्याय का कहना है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को विधान सभा का विशेष सत्र बुलाकर केंद्र के पास प्रस्ताव भेजना चाहिए कि अदालतों में कामकाज अंग्रेजी में खत्म करके हिंदी में किया जाए। इसके लिए विधायकों को सामूहिक संकल्प लेना चाहिए। मुख्यमंत्री को चाहिए कि वह उत्तर प्रदेश हिंदी ग्रंथ अकादमी को फिर से शुरू करें। इसे 1977 में उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान में परिवर्तित कर दिया गया था।
लौटा चुके हैं न्याय मित्र पुरस्कार
अदालती कामकाज और फैसले हिंदी में न किए जाने के विरोध स्वरूप चंद्रशेखर उपाध्याय प्रतिष्ठित न्याय मित्र पुरस्कार लौटा चुके हैं। यह पुरस्कार मुकदमों की सुनवाई और निर्णयों में विशेष गुणवत्ता कायम करने वाले और जल्द से जल्द निस्तारण करने वाले ईमानदार न्यायाधीश को दिया जाता है। उन्हें यह 2005 में मिला था लेकिन इसे लौटा दिया था।
'विशेष सत्र बुलाकर प्रस्ताव भेजें योगी'
चंद्रशेखर उपाध्याय का कहना है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को विधान सभा का विशेष सत्र बुलाकर केंद्र के पास प्रस्ताव भेजना चाहिए कि अदालतों में कामकाज अंग्रेजी में खत्म करके हिंदी में किया जाए। इसके लिए विधायकों को सामूहिक संकल्प लेना चाहिए। मुख्यमंत्री को चाहिए कि वह उत्तर प्रदेश हिंदी ग्रंथ अकादमी को फिर से शुरू करें। इसे 1977 में उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान में परिवर्तित कर दिया गया था।
लौटा चुके हैं न्याय मित्र पुरस्कार
अदालती कामकाज और फैसले हिंदी में न किए जाने के विरोध स्वरूप चंद्रशेखर उपाध्याय प्रतिष्ठित न्याय मित्र पुरस्कार लौटा चुके हैं। यह पुरस्कार मुकदमों की सुनवाई और निर्णयों में विशेष गुणवत्ता कायम करने वाले और जल्द से जल्द निस्तारण करने वाले ईमानदार न्यायाधीश को दिया जाता है। उन्हें यह 2005 में मिला था लेकिन इसे लौटा दिया था।