फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Agra News ›   'Model villages' nine days instead - not photo

‘आदर्श गांवों’ के न दिन बदले- न तस्वीर

Wed, 25 May 2016 01:45 AM IST
अमर उजाला आगरा
अमर उजाला आगरा Updated Wed, 25 May 2016 01:45 AM IST
विज्ञापन
'Model villages' nine days instead - not photo
आदर्श गांव - फोटो : Amar Ujala
26 मई 2014...कल पूरे दो साल हो जाएंगे इस तारीख को गुजरे। दावों, वादों और इरादों के बल पर इस दिन केंद्र में बनी पूर्ण बहुमत की सरकार दूसरी वर्षगांठ पर अपना रिपोर्ट कार्ड जारी करने जा रही है। दिल्ली, देश और जनहित की तमाम योजनाओं और उपलब्धियों को गिनाएगी। अपनी पीठ थपथपाएगी। जब ये सब हो रहा होगा, उस वक्त सरकार के सांसदों के गोद लिए गांवों के लोग ठगा सा महसूस कर रहे होंगे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कहने पर भाजपा के सांसदों ने ग्रामीणों को अच्छे दिनों के सपने दिखाकर ‘आदर्श गांव’ की जो तस्वीर दिखाई थी, धरातल पर वह सामान्य गांवों से भी बदतर हालत में हैं। विकास कार्यों के नाम पर उनके साथ सिर्फ छलावा किया गया। फिर चाहे वह मानव संसाधन विकास राज्यमंत्री डा. रामशंकर कठेरिया द्वारा गोद लिए गांव पिलखतरा (जलेसर) के लोग हों या फिर सांसद चौधरी बाबूलाल द्वारा गोद लिए गांव पुसैंता (सैंया) के। सरकार के दोनों सांसदों के रिपोर्ट कार्ड पर ग्रामीणों ने फेल लिख दिया है। कठेरिया और बाबूलाल के दावों और ग्रामीणों द्वारा किए गए इनके मूल्यांकन पर प्रकाश डालती अमर उजाला की ये रिपोर्ट...
विज्ञापन


दो साल में दो कक्षाएं तक नहीं बढ़वा पाए कठेरिया
ऊबड़-खाबड़ सड़क। गलियों का उखड़ा खरंजा। ऐसा ही हाल है आगरा लोकसभा क्षेत्र के पिलखतरा गांव का। जलेसर से लगभग 15 किमी दूर यह गांव सामान्य गांवों जैसा ही है। हालांकि कहने को ये आदर्श गांव है। केंद्रीय राज्यमंत्री डा. रामशंकर कठेरिया ने सरकार बनने के कुछ दिन बाद प्रधानमंत्री के आह्वान पर इसे गोद लिया था। गांव का प्राथमिक विद्यालय बाड़ा बना हुआ है और अस्पताल शोपीस। स्थिति ये है, गांवों में शौचालय बनवाने का दावा करने वाली मोदी सरकार के इस सांसद के गांव में कम ही घरों में शौचालय हैं। बहू-बेटियों को आज भी सूरज ढलने का इंतजार करना पड़ता है।
विज्ञापन

सन् 1997 का पूर्व माध्यमिक विद्यालय है। मगर, इससे आगे की शिक्षा की राह नहीं खुल सकी। इसके अभाव में गांव की अधिकांश बेटियां आठवीं तक ही पढ़कर रह जाती हैं। क्योंकि इससे आगे की पढ़ाई के लिए उन्हें जलेसर, अवागढ़ या फिर निधौली लगभग 15 से 23 किमी जाना पड़ता है। सरकारी अस्पताल भी है लेकिन सिर्फ नाम का। आलीशान और पर्याप्त भवन होने के बाद भी यहां संसाधनों का अभाव है। चिकित्सक भी कम ही बैठते हैं। ग्रामीणों का कहना है कि आदर्श गांव के नाम पर सिर्फ सोलर लाइटें ही मिली हैं। कहते हैं कि विकास कार्य तो नहीं किए, लेकिन दीवारों पर आदर्श गांव के संदेश खूब लिखे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि गांव गोद लेने के बाद कठेरिया ने एक बार भी गांव की तरफ झांककर नहीं देखा। 
विज्ञापन
विज्ञापन


सोलर लाइट को छोड़कर सांसद की तरफ से गांव में एक भी विकास कार्य नहीं कराया गया। शौचालय निर्माण में भी कोई रुचि नहीं दिखाई।
- राकेश कुमार गुप्ता, प्रधान

गांव में सिर्फ आठवीं तक ही विद्यालय है। कठेरिया से हमने मांग की थी कि गांव के पूर्व माध्यमिक विद्यालय को ही हाईस्कूल तक करा दिया जाए। 
- दामोदर

पिलखतरा आदर्श गांव बनकर उभरेगा। बिजली, शौचालय, पानी जैसे विकास कार्य कराए जा चुके हैं। मुख्य सड़क का निर्माण रह गया है, इसके लिए प्रयास किए जा रहे हैं। अस्पताल की व्यवस्थाओं में सुधार आया है। विद्यालय को हाईस्कूल तक की मान्यता दिलवाने के प्रयास किए जा रहे हैं।

- डा. रामशंकर कठेरिया, केंद्रीय राज्यमंत्री

एत्मादपुर का होगा अगला आदर्श गांव 
प्रधानमंत्री के निर्देश के अनुसार, हर सांसद को हर साल एक नया गांव गोद लेना होगा। इसी के तहत कठेरिया अब एत्मादपुर विधानसभा क्षेत्र के किसी गांव को गोद लेने की तैयारी कर रहे हैं। फिलहाल गांव फाइनल नहीं हुआ है।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed