जन्माष्टमी पर भी अपनों से नहीं मिल पाए 'कान्हा', पुलिस की लापरवाही से अनाथालयों में रहने को मजबूर
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चाइल्ड लाइन समन्वयक ऋतु वर्मा ने बताया कि छह बच्चों के घरों का पता मिल गया है। इनमें परिजनों से भी संपर्क कर लिया गया है। इन बच्चों के लापता होने के मामले में अपहरण के मुकदमे भी दर्ज हैं, लेकिन पुलिस की टीम संबंधित आश्रय गृह से संपर्क नहीं कर रही है।
वहीं आश्रय गृह से बच्चों को आगरा भेजने के लिए बाल कल्याण समिति की ओर से कोई आदेश नहीं किया गया है। इस वजह से बच्चे आश्रय गृह में ही रहने के लिए मजबूर हैं।
दिल्ली के आश्रय गृह में रह रहे पांच बच्चे
ट्रांस यमुना कॉलोनी निवासी श्यामसुंदर का बेटा पीयूष (14 वर्ष) 25 जून को घर से लापता हो गया था। थाना एत्माद्दौला में परिजनों ने मुकदमा दर्ज कराया। सैंया निवासी सोनू का बेटा दीपक (12 वर्ष) 24 जुलाई को घर से लापता हो गया था।
सेंट जोंस चौराहा स्थित फुटपाथ पर रहने वाली वंदना का बेटा सोहेल (14 वर्ष) 24 जून को लापता हुआ। शाहगंज स्थित बारहखंभा निवासी अर्जुन का बेटा वंश (14 वर्ष) 25 जून को लापता हुआ। बिजलीघर पर रहने वाले शाकिर का बेटा साहिल (14 वर्ष) दिल्ली में एक महीने पहले मिला था। उसने अपना पता बताया। चाइल्ड लाइन सदस्यों ने तलाश की, लेकिन बच्चे का पता नहीं मिल सका। सभी दिल्ली के आश्रय गृह में रह रहे हैं।
झारखंड के आश्रय गृह में आगरा की बालिका
गांव श्यामो, ताजगंज निवासी चंद्रशेखर की 11 साल की बेटी वंशिका बड़ी बहन के साथ 24 जुलाई को घर से निकल गई थी। बड़ी बहन घर वापस आ गई। मगर, वंशिका नहीं लौट सकी। वो ट्रेन से झारखंड के दुर्ग पहुंच गई। यहां उसे एक आश्रय गृह में रखा गया है।
छह साल की बच्ची का नहीं मिल रहा घर
चाइल्ड लाइन को छह साल की खुशबू एत्मादपुर क्षेत्र में मिली थी। उसने पूछताछ में बताया कि मां के डांटने पर घर से निकल आई थी। वह अपने पिता का नाम संजय बता रही है। घर का पता टोढ़िया वाली गली, एत्मादपुर। चाइल्ड लाइन सदस्यों ने बच्ची को साथ लेकर घर का पता ढूंढा, लेकिन जानकारी नहीं मिल सकी।
नवजात बच्ची को अस्पताल में भर्ती कराकर चला गया युवक
पांच जुलाई को एक युवक ने नवजात बच्ची एसएन मेडिकल कालेज की इमरजेंसी में भर्ती कराई थी। खुद को बच्ची का पिता सत्येंद्र कहा। मां का नाम पहले कल्पना, बाद में आशा दर्ज कराया। भर्ती कराने के बाद दवा लेने के लिए बाहर निकल गया। इसके बाद वापस नहीं आया। पुलिस ने काफी तलाश किया, लेकिन उसका पता नहीं चल सका। अब बच्ची के परिजनों के बारे में कोई जानकारी नहीं मिल पा रही है।
महफूज संस्था के समन्वयक नरेश पारस ने बताया कि बच्चों के लापता होने पर अपहरण का मुकदमा दर्ज किया जाता है। इस वजह से बच्चे के किसी आश्रय गृह में मिलने पर पुलिस को ही लेकर आना चाहिए। मगर, पुलिस ऐसा नहीं करती है। संस्था के पदाधिकारी और सदस्य ही प्रयास करते हैं। कई बार मां-बाप ही बच्चे को लेकर आते हैं। थानों में बाल कल्याण अधिकारी भी नियुक्त हैं।
इस संबंध में एसपी सिटी प्रशांत वर्मा से पूछा गया तो लापता बच्चों के आश्रय गृह में रहने की जानकारी के बावजूद पुलिस उन्हें लेने क्यों नहीं जा रही है? तो उन्होंने कहा कि लापता बच्चों के बारे में जानकारी मिलने पर पुलिस टीम को भेजा जाता है। अगर, कोई विवेचक लापरवाही करता है तो जांच कर कार्रवाई की जाएगी।