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UP: दही-पनीर और घी सबके बढ़ेंगे दाम, मुंह मीठा कराना भी होगा महंगा; त्योहार से पहले लगेगा महंगाई का तगड़ा झटका
Fri, 14 Aug 2026 01:46 PM IST
Dhirendra Singh
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
Published by: Dhirendra Singh
Updated Fri, 14 Aug 2026 01:46 PM IST
सार
रक्षाबंधन और जन्माष्टमी से पहले दूध, घी, पनीर, मक्खन और खोया के दाम बढ़ने से घरेलू बजट पर असर पड़ने लगा है। दूध 70 रुपये लीटर तक पहुंच गया है, जबकि घी, मक्खन और खोया के दाम बढ़ने से त्योहारों पर मिठाइयां भी 10 से 15 फीसदी तक महंगी होने की आशंका है।
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महंगाई का तगड़ा झटका
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
रक्षाबंधन और जन्माष्टमी जैसे त्योहारों की दहलीज पर रसोई का बजट गड़बड़ा गया है। त्योहारी सीजन से ठीक पहले दूध, घी, पनीर और मक्खन की कीमतों में भारी उछाल आया है। इसका सीधा असर न केवल घरेलू बजट पर पड़ा है, बल्कि त्योहारों पर बनने वाली मिठाइयों की मिठास भी फीकी पड़ने के आसार हैं।
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अगस्त माह में विभिन्न दुग्ध संघों और उत्पादकों ने कीमतों में बदलाव किया है। जिसका असर अब खुदरा बाजार में दिख है। दूध की कीमत 70 रुपये लीटर तक पहुंच गई है। प्रति किलोग्राम करीब पांच रुपये का अंतर आया है। सबसे अधिक उछाल खोया और मक्खन के दामों में देखने को मिला है। इसमें 40 से 50 रुपये प्रति किलोग्राम तक की वृद्धि दर्ज की गई है, जिससे मक्खन कीमत नई कीमत लगभग 600 और खोया 300 रुपये प्रति किलो हो गया है।
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प्रमुख ब्रांड्स ने घी की कीमतों में 40 से 60 रुपये प्रति लीटर तक का इजाफा किया है। खुदरा बाजार में एक लीटर घी का भाव अब 715 से 750 रुपये के पार पहुंच गया है। दूध के दाम बढ़ने से खुले और पैकेट बंद, दोनों तरह के पनीर की कीमतों में उछाल आया है। पनीर 350 रुपये किलो बिक रहा है।
चारे और परिवहन की लागत बनी मुख्य कारण
डेयरी संघ के मनोज गुप्ता ने बताया कि इस महंगाई के पीछे मुख्य वजह पशुओं के चारे की बढ़ती कीमतें, परिवहन लागत में इजाफा और कच्चे दूध की खरीद दरों में हुई वृद्धि है। त्योहारी मांग और आपूर्ति के बीच का यह अंतर छोटे दुग्ध उत्पादकों और खुदरा व्यापारियों के बजट पर भी भारी दबाव डाल रहा है।
डेयरी संघ के मनोज गुप्ता ने बताया कि इस महंगाई के पीछे मुख्य वजह पशुओं के चारे की बढ़ती कीमतें, परिवहन लागत में इजाफा और कच्चे दूध की खरीद दरों में हुई वृद्धि है। त्योहारी मांग और आपूर्ति के बीच का यह अंतर छोटे दुग्ध उत्पादकों और खुदरा व्यापारियों के बजट पर भी भारी दबाव डाल रहा है।
आगरा के मिष्ठान्न कारोबार पर दोहरी मार
आगरा और ब्रज क्षेत्र जहां पेठा और दूध से बनी मिठाइयों का बड़े पैमाने पर कारोबार होता है, इस मूल्य वृद्धि का गहरा असर दिख रहा है। एक तरफ चीनी की कीमतों में रिकॉर्ड उछाल आया है। 500 रुपये क्विंटल तक भाव बढ़ गया है। आगरा स्वीट्स एंड नमकीन एसोसिएशन अध्यक्ष राजकुमार भगत का कहना है कि कच्चे माल की महंगाई के साथ-साथ ट्रेड लाइसेंस शुल्क और अन्य प्रशासनिक खर्चों जैसी व्यावसायिक देनदारियों को चुकाने का दबाव भी मुनाफे को सीमित कर रहा है। इसके परिणामस्वरूप इन त्योहारों पर मिठाइयों के दाम 10 से 15 फीसदी तक बढ़ने की संभावना है।
आगरा और ब्रज क्षेत्र जहां पेठा और दूध से बनी मिठाइयों का बड़े पैमाने पर कारोबार होता है, इस मूल्य वृद्धि का गहरा असर दिख रहा है। एक तरफ चीनी की कीमतों में रिकॉर्ड उछाल आया है। 500 रुपये क्विंटल तक भाव बढ़ गया है। आगरा स्वीट्स एंड नमकीन एसोसिएशन अध्यक्ष राजकुमार भगत का कहना है कि कच्चे माल की महंगाई के साथ-साथ ट्रेड लाइसेंस शुल्क और अन्य प्रशासनिक खर्चों जैसी व्यावसायिक देनदारियों को चुकाने का दबाव भी मुनाफे को सीमित कर रहा है। इसके परिणामस्वरूप इन त्योहारों पर मिठाइयों के दाम 10 से 15 फीसदी तक बढ़ने की संभावना है।