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आगराः गुजरात से स्पेशल ट्रेन में आए सैकड़ों श्रमिक, कहा, सरकार ने आखिरकार सुन ली
Mon, 04 May 2020 12:05 AM IST
Abhishek Saxena
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
Published by: Abhishek Saxena
Updated Mon, 04 May 2020 12:05 AM IST
सार
सोशल डिस्टेसिंग के लिए सर्किल बनवाए गए
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आगरा कैंट स्टेशन पर पहुंचे श्रमिकों की थर्मल स्क्रीनिंग करते चिकित्सक
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
गुजरात के साबरमती से 1196 श्रमिकों को लेकर स्पेशल ट्रेन रविवार को शाम को आगरा कैंट स्टेशन पर पहुंची। यहां रेलवे के साथ ही पुलिस प्रशासनिक व स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों की मौजूदगी में श्रमिकों को रोडवेज की 66 बसों से उनके घरों तक पहुंचाने की व्यवस्था की गई।
स्टेशन पर सभी यात्रियों की थर्मल स्क्रीनिंग की गई। इनमें 595 यात्री आगरा के ग्रामीण क्षेत्रों के थे, जिन्हें 14 दिन तक क्वारंटीन सेंटर में रखा जाएगा। मजदूरों का कहना था कि उन्हें खुशी है कि मुश्किल वक्त में अपने घर में रह सकेंगे।
अहमदाबाद और आसपास के जिलों में काम करने वाले 1196 श्रमिकों के लिए साबरमती से स्पेशल ट्रेन शनिवार की रात्रि तीन बजे चली थी। श्रमिकों को जयपुर में रेलवे प्रशासन ने खाना व पानी दिया। 22 बोगी की इस ट्रेन के यहां पहुंचने से पहले आगरा कैंट स्टेशन पर दोनों गेटों को खोला गया।
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स्टेशन पर सभी यात्रियों की थर्मल स्क्रीनिंग की गई। इनमें 595 यात्री आगरा के ग्रामीण क्षेत्रों के थे, जिन्हें 14 दिन तक क्वारंटीन सेंटर में रखा जाएगा। मजदूरों का कहना था कि उन्हें खुशी है कि मुश्किल वक्त में अपने घर में रह सकेंगे।
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अहमदाबाद और आसपास के जिलों में काम करने वाले 1196 श्रमिकों के लिए साबरमती से स्पेशल ट्रेन शनिवार की रात्रि तीन बजे चली थी। श्रमिकों को जयपुर में रेलवे प्रशासन ने खाना व पानी दिया। 22 बोगी की इस ट्रेन के यहां पहुंचने से पहले आगरा कैंट स्टेशन पर दोनों गेटों को खोला गया।
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सोशल डिस्टेसिंग के लिए सर्किल बनवाए गए। इसके बाद जिलाधिकारी प्रभु एन सिंह व एसएसपी बबलू कुमार, डीआरएम सुशील कुमार श्रीवास्तव, एसपी सिटी बोत्रे रोहन प्रमोद, एडीएम प्रोटोकाल ने व्यवस्थाओं का जायजा लिया। शाम चार बजे जैसे ही ट्रेन पहुंची। एक बोगी के मजदूरों को बाहर निकाला गया। इसके बाद मजदूरों की थर्मल स्क्रीनिंग की गई।
मजदूरों को एक-एक करके दोनों गेटों से निकाला गया। स्टेशन के बाहर रोडवेज बसें खड़ी थीं। इनमें प्रदेश के विभिन्न जिलों के मजदूरों के साथ ही आगरा के भी 595 श्रमिक शामिल थे। ट्रेन से उतरने पर उनके चेहरे पर राहत का भाव था। उनका कहना था कि सरकार ने आखिरकार उनकी सुन ली। जिन जिलों में काम करते थे, वहां एक माह तो काट लिया मगर अब मुश्किलें सामने आने लगी थीं।
सवा महीने झेलीं परेशानियां
अहमदाबाद में कारखानों में काम करने वाले और ठेल ढकेल लगाकर जीवन यापन करने वाले मजदूरों का कहना था कि सवा महीने से परेशानियां झेली हैं, लेकिन अब किसी तरह घर पहुंचना चाहते हैं। ट्रेन में सफर के दौरान उन्हें किसी तरह की परेशानी नहीं हुई। हालांकि अब भी 14 दिन तक घर से अलग ही रहना पड़ेगा।
मजदूरों को एक-एक करके दोनों गेटों से निकाला गया। स्टेशन के बाहर रोडवेज बसें खड़ी थीं। इनमें प्रदेश के विभिन्न जिलों के मजदूरों के साथ ही आगरा के भी 595 श्रमिक शामिल थे। ट्रेन से उतरने पर उनके चेहरे पर राहत का भाव था। उनका कहना था कि सरकार ने आखिरकार उनकी सुन ली। जिन जिलों में काम करते थे, वहां एक माह तो काट लिया मगर अब मुश्किलें सामने आने लगी थीं।
सवा महीने झेलीं परेशानियां
अहमदाबाद में कारखानों में काम करने वाले और ठेल ढकेल लगाकर जीवन यापन करने वाले मजदूरों का कहना था कि सवा महीने से परेशानियां झेली हैं, लेकिन अब किसी तरह घर पहुंचना चाहते हैं। ट्रेन में सफर के दौरान उन्हें किसी तरह की परेशानी नहीं हुई। हालांकि अब भी 14 दिन तक घर से अलग ही रहना पड़ेगा।
घर वापसी ही रास्ता बचा
अहमदाबाद में पति फैक्टरी में काम करते थे। सवा महीने से काम बंद पड़ा है। खाने-पीने की किल्लत पैदा हो गई थी। ऐसे में गांव लौटने के सिवा कोई चारा नहीं बचा है। कम से कम वहां घर के अन्य लोग तो हैं। - गीता देवी, उरई
सभी गांव लौट रहे तो हम भी चल दिए
जब सभी बाहरी लोग अपने गांव लौट रहे हैं तो ऐसे में हम रुककर क्या करते। काफी दिनों से निकलने की सोच रहे थे, मगर रास्ता नहीं मिल पा रहा था। अब सरकार ने मौका दिया है तो अपने गांव जाकर रहेंगे। मेहनत मजदूरी कर लेंगे। - अंकिता, मऊ
परेशानियां बढ़ीं तो घर की राह पकड़ी
सवा महीने तक किसी तरह रहे मगर किराए के घर में कब तक रुकते। किराया भी नहीं देने को था। ऐसे में घर पर जाकर कुछ खेतीबाड़ी कर लेंगे। इसलिए परिवार के साथ लौट रहे हैं। - सोनू, आजमगढ़
अहमदाबाद में पति फैक्टरी में काम करते थे। सवा महीने से काम बंद पड़ा है। खाने-पीने की किल्लत पैदा हो गई थी। ऐसे में गांव लौटने के सिवा कोई चारा नहीं बचा है। कम से कम वहां घर के अन्य लोग तो हैं। - गीता देवी, उरई
सभी गांव लौट रहे तो हम भी चल दिए
जब सभी बाहरी लोग अपने गांव लौट रहे हैं तो ऐसे में हम रुककर क्या करते। काफी दिनों से निकलने की सोच रहे थे, मगर रास्ता नहीं मिल पा रहा था। अब सरकार ने मौका दिया है तो अपने गांव जाकर रहेंगे। मेहनत मजदूरी कर लेंगे। - अंकिता, मऊ
परेशानियां बढ़ीं तो घर की राह पकड़ी
सवा महीने तक किसी तरह रहे मगर किराए के घर में कब तक रुकते। किराया भी नहीं देने को था। ऐसे में घर पर जाकर कुछ खेतीबाड़ी कर लेंगे। इसलिए परिवार के साथ लौट रहे हैं। - सोनू, आजमगढ़
काम-धंधा बंद है, वहां कैसे रुकते
चाट-पकौड़ी बेचता था, लॉकडाउन में स्थितियां खराब हो गईं। खाने पीने को कोई कब तक देगा। ऐसे में भाई के साथ घर लौटने का फैसला किया। अब घर पर कुछ काम करेंगे। फिलहाल तो अहमदाबाद नहीं लौटेंगे। - रविंद्र कुमार, औरेया
घर के पास तो पहुंच गया
अपने गांव के पास तक पहुंच गए, यह बड़ी बात है। अहमदाबाद में मजदूरी करते थे, लेकिन अब यहां कोई काम तलाश करेंगे। फिलहाल तो किसी तरह गांव पहुंच जाएं। - मोती राम, किरावली
चाट-पकौड़ी बेचता था, लॉकडाउन में स्थितियां खराब हो गईं। खाने पीने को कोई कब तक देगा। ऐसे में भाई के साथ घर लौटने का फैसला किया। अब घर पर कुछ काम करेंगे। फिलहाल तो अहमदाबाद नहीं लौटेंगे। - रविंद्र कुमार, औरेया
घर के पास तो पहुंच गया
अपने गांव के पास तक पहुंच गए, यह बड़ी बात है। अहमदाबाद में मजदूरी करते थे, लेकिन अब यहां कोई काम तलाश करेंगे। फिलहाल तो किसी तरह गांव पहुंच जाएं। - मोती राम, किरावली