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मेट्रो की दौड़ में पिछड़ा आगरा
अमर उजाला आगरा
Updated Fri, 17 Jun 2016 01:47 AM IST
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लखनऊ मेट्रो
- फोटो : amar ujala
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लखनऊ में स्टेशन लेने लगे मूर्त रूप, यहां अभी डीपीआर फाइनल नहीं
कानपुर व वाराणसी की डीपीआर को भी मिल चुकी है शासन से अनुमति
मेट्रो ट्रेन की रेस में अपना शहर दूसरे शहरों से पीछे रह गया है। प्रदेश की राजधानी लखनऊ में जहां मेट्रो के स्टेशन मूर्त रूप लेने लगे हैं वहीं, कानपुर और वाराणसी की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) को मंजूरी मिल चुकी है। इधर, अपने शहर के लिए प्रस्तावित मेट्रो की डीपीआर तैयार भी नहीं हुई है।
बता दें कि पिछले साल मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने प्रदेश के कई शहरों में मेट्रो ट्रेन चलाने की घोषणा की थी। इसमें लखनऊ के अलावा आगरा, कानपुर, वाराणसी और मेरठ प्रमुख थे। इस घोषणा के साथ ही रेल इंडिया टेक्निकल एंड इंजीनियरिंग सर्विसेज (राइट्स) को डीपीआर तैयार करने के लिए नियुक्त किया गया। लखनऊ की डीपीआर पिछले साल ही बनकर तैयार हो गई थी। इसके अनुसार राजधानी में 50 फीसदी ट्रैक भी बिछ चुका है। आठ में से दो (ट्रांसपोर्ट नगर और कृष्णा नगर) स्टेशन भी लगभग बनकर तैयार हैं। यहां दिसंबर में ट्रायल होना है। इसके लिए अक्टूबर में फ्रांस की कंपनी अलस्टॉम को मेट्रो ट्रेन का पहला सेट लखनऊ मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (एलएमआरसी) को देना है। सितंबर तक पटरी बिछाने का काम पूरा कर लिया जाएगा। मेट्रो स्टाफ का इसी महीने से प्रशिक्षण भी शुरू हो गया है। वहीं, वाराणसी में मेट्रो के प्रोजेक्ट की डीपीआर को हरी झंडी मिल चुकी है। लगभग 13 हजार 133 करोड़ रुपये की योजना पर जल्द काम शुरू होने के आसार हैं। यहां लगभग 30 किमी दूरी के दो कॉरिडोर प्रस्तावित हैं। ऐसे ही कानपुर की 13721 करोड़ रुपये की योजना को भी मंजूरी मिल चुकी है। लगभग 32 किमी दूरी के यहां दो कॉरीडोर होंगे। मगर, पर्यटन के क्षेत्र में दुनिया के मानचित्र पर चमकने वाले ताजमहल के शहर में मेट्रो ट्रेन की डीपीआर अभी अधर में ही लटकी है। राइट्स ने प्रस्ताव तैयार कर एलएमआरसी के पास भेजा था। कुछ निर्देशों के साथ ही इस प्रस्ताव को एलएमआरसी ने आगरा विकास प्राधिकरण (एडीए) को अध्ययन के लिए भेज दिया। फिलहाल ये अधर में ही लटका हुआ है। न स्थानीय अधिकारी इसमें रुचि ले रहे और न ही शासन। बैठकें हो रही हैं लेकिन हल कोई नहीं निकल रहा।
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कानपुर व वाराणसी की डीपीआर को भी मिल चुकी है शासन से अनुमति
मेट्रो ट्रेन की रेस में अपना शहर दूसरे शहरों से पीछे रह गया है। प्रदेश की राजधानी लखनऊ में जहां मेट्रो के स्टेशन मूर्त रूप लेने लगे हैं वहीं, कानपुर और वाराणसी की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) को मंजूरी मिल चुकी है। इधर, अपने शहर के लिए प्रस्तावित मेट्रो की डीपीआर तैयार भी नहीं हुई है।
बता दें कि पिछले साल मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने प्रदेश के कई शहरों में मेट्रो ट्रेन चलाने की घोषणा की थी। इसमें लखनऊ के अलावा आगरा, कानपुर, वाराणसी और मेरठ प्रमुख थे। इस घोषणा के साथ ही रेल इंडिया टेक्निकल एंड इंजीनियरिंग सर्विसेज (राइट्स) को डीपीआर तैयार करने के लिए नियुक्त किया गया। लखनऊ की डीपीआर पिछले साल ही बनकर तैयार हो गई थी। इसके अनुसार राजधानी में 50 फीसदी ट्रैक भी बिछ चुका है। आठ में से दो (ट्रांसपोर्ट नगर और कृष्णा नगर) स्टेशन भी लगभग बनकर तैयार हैं। यहां दिसंबर में ट्रायल होना है। इसके लिए अक्टूबर में फ्रांस की कंपनी अलस्टॉम को मेट्रो ट्रेन का पहला सेट लखनऊ मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (एलएमआरसी) को देना है। सितंबर तक पटरी बिछाने का काम पूरा कर लिया जाएगा। मेट्रो स्टाफ का इसी महीने से प्रशिक्षण भी शुरू हो गया है। वहीं, वाराणसी में मेट्रो के प्रोजेक्ट की डीपीआर को हरी झंडी मिल चुकी है। लगभग 13 हजार 133 करोड़ रुपये की योजना पर जल्द काम शुरू होने के आसार हैं। यहां लगभग 30 किमी दूरी के दो कॉरिडोर प्रस्तावित हैं। ऐसे ही कानपुर की 13721 करोड़ रुपये की योजना को भी मंजूरी मिल चुकी है। लगभग 32 किमी दूरी के यहां दो कॉरीडोर होंगे। मगर, पर्यटन के क्षेत्र में दुनिया के मानचित्र पर चमकने वाले ताजमहल के शहर में मेट्रो ट्रेन की डीपीआर अभी अधर में ही लटकी है। राइट्स ने प्रस्ताव तैयार कर एलएमआरसी के पास भेजा था। कुछ निर्देशों के साथ ही इस प्रस्ताव को एलएमआरसी ने आगरा विकास प्राधिकरण (एडीए) को अध्ययन के लिए भेज दिया। फिलहाल ये अधर में ही लटका हुआ है। न स्थानीय अधिकारी इसमें रुचि ले रहे और न ही शासन। बैठकें हो रही हैं लेकिन हल कोई नहीं निकल रहा।
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