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चिड़चिड़ापन, तनाव बात-बात पर गुस्सा
अमर उजाला आगरा
Updated Mon, 06 Jun 2016 12:44 AM IST
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मरीज
- फोटो : अमर उजाला ब्यूूराो
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गर्मी में शरीर ही नहीं दिमाग की सेहत भी बिगड़ रही है। बिजली कटौती और बढ़ते तापमान से लोग पर्याप्त नींद नहीं ले पा रहे। नतीजतन, चिड़चिड़ापन, तनाव, बात-बात पर गुस्सा। लोगों का हाजमा भी बिगड़ रहा है। एसएन के मानसिक रोग विभाग में 25 फीसदी मरीज बढ़े हैं। अधिकांश की यही शिकायत है। विभागाध्यक्ष डा. विशाल सिन्हा बताते हैं कि बढ़ता तापमान, पर्याप्त नींद न लिए जाने से भी ये प्रभाव सामने आते हैं।
वरिष्ठ मनोरोग विशेषज्ञ डा. केसी गुरनानी बताते हैं कि कई मरीज तो ऐसे हैं, जो ट्रैफिक में फंस जाने या किसी वाहन के तेज हार्न बजाने पर भी झगड़े पर उतारू हो जाते हैं। पानी पिएं और संभव हो तो तेज गर्मी में जाने से बचें। मेडिसिन विभाग के डा. प्रशांत प्रकाश बताते हैं कि नींद पूरी न होने से पेट का हाजमा बिगड़ रहा है। शाम को भोजन में सलाद अधिक लें और चिकनाईयुक्त भोजन से दूरी बरतने पर जोर रहे।
पंखों के नीचे लू के थपेड़े झेल रहे बंदी
उमस भरी गर्मी में कूलर फेल हो गए हैं। ऐसे में जिला जेल में निरुद्ध बंदियों की हालात खराब है। बैरकों में क्षमता से दो गुना अधिक बंदी हैं। इस वजह से जेल की ओपीडी में मरीजों की संख्या बढ़ रही है।
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जिला जेल में करीब 1100 बंदियों की क्षमता है। वर्तमान में करीब 2,065 बंदी निरुद्ध हैं। अधिकांश बैरक पुरानी हैं जो खपरैल से बनी हैं। उनमें अंग्रेजों के जमाने पंखे लगे हैं। बड़ा सवाल यह है कि ऐसे मौसम में जब कूलर फेल साबित हो रहे हैं तो ये पंखे कैसे राहत पहुंचाएंगे। उस पर बिजली कटौती की मार। जेलर प्रमोद त्रिपाठी का कहना है कि जेल में हरियाली है, खुला स्थान भी काफी है। सीमित संसाधनों का बेहतर प्रयोग कर बंदियों को गर्मी से निजात दिलाने की कोशिश की जाती है। गर्मी की वजह से ओपीडी में भीड़ जरूर बढ़ी है। सामान्य दिनों की तुलना में 40 फीसदी मरीज अधिक आ रहे हैं। 24 पलंग का अस्पताल है।
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वरिष्ठ मनोरोग विशेषज्ञ डा. केसी गुरनानी बताते हैं कि कई मरीज तो ऐसे हैं, जो ट्रैफिक में फंस जाने या किसी वाहन के तेज हार्न बजाने पर भी झगड़े पर उतारू हो जाते हैं। पानी पिएं और संभव हो तो तेज गर्मी में जाने से बचें। मेडिसिन विभाग के डा. प्रशांत प्रकाश बताते हैं कि नींद पूरी न होने से पेट का हाजमा बिगड़ रहा है। शाम को भोजन में सलाद अधिक लें और चिकनाईयुक्त भोजन से दूरी बरतने पर जोर रहे।
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पंखों के नीचे लू के थपेड़े झेल रहे बंदी
उमस भरी गर्मी में कूलर फेल हो गए हैं। ऐसे में जिला जेल में निरुद्ध बंदियों की हालात खराब है। बैरकों में क्षमता से दो गुना अधिक बंदी हैं। इस वजह से जेल की ओपीडी में मरीजों की संख्या बढ़ रही है।
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जिला जेल में करीब 1100 बंदियों की क्षमता है। वर्तमान में करीब 2,065 बंदी निरुद्ध हैं। अधिकांश बैरक पुरानी हैं जो खपरैल से बनी हैं। उनमें अंग्रेजों के जमाने पंखे लगे हैं। बड़ा सवाल यह है कि ऐसे मौसम में जब कूलर फेल साबित हो रहे हैं तो ये पंखे कैसे राहत पहुंचाएंगे। उस पर बिजली कटौती की मार। जेलर प्रमोद त्रिपाठी का कहना है कि जेल में हरियाली है, खुला स्थान भी काफी है। सीमित संसाधनों का बेहतर प्रयोग कर बंदियों को गर्मी से निजात दिलाने की कोशिश की जाती है। गर्मी की वजह से ओपीडी में भीड़ जरूर बढ़ी है। सामान्य दिनों की तुलना में 40 फीसदी मरीज अधिक आ रहे हैं। 24 पलंग का अस्पताल है।