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Health News: मामूली दर्द में भी बच्चों को देते हैं दवाएं...तो हो जाएं सावधान, किडनी फेल होने का खतरा
Mon, 16 Sep 2024 09:45 AM IST
धीरेन्द्र सिंह
अमर उजाला नेटवर्क, आगरा
अमर उजाला नेटवर्क, आगरा
Published by: धीरेन्द्र सिंह
Updated Mon, 16 Sep 2024 09:45 AM IST
सार
मामूली दर्द में भी बच्चों को दवाएं न दें। चिकित्सक का कहना है कि इससे बच्चों की किडनी फेल होने का खतरा है।
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दवाएं
- फोटो : संवाद
विस्तार
आगरा के संजय प्लेस स्थित होटल में इंडियन सोसाइटी ऑफ पीडियाट्रिक नेफ्रोलॉजी के सेमिनार में रविवार को बताया गया कि बच्चों को मामूली दर्द पर दवाएं देने से बच्चों की किडनी बीमार पड़ रही है।
दिल्ली के लेडी हार्डिंग मेडिकल कॉलेज के पीडियाट्रिक नेफ्रोलॉजी डिवीजन के निदेशक डॉ. अभिजीत शाह ने कहा कि पीआईसीयू में भर्ती 25-30 फीसदी बच्चों में किडनी की गंभीर परेशानी मिल रही है। बच्चों को मामूली दर्द हुआ और बिना डॉक्टरी परामर्श के झट से दर्द निवारक दवा दे दी। ऐसी स्थिति में कई बार बच्चों की किडनी भी फेल हो जाती है।
यूनिवर्सिटी कॉलेज ऑफ मेडिकल साइंस एंड जीटीबी हॉस्पिटल दिल्ली के निदेशक प्रो. प्रेरणा बत्रा ने कहा कि समय पूर्व पैदा होने वाले, वजन कम होने और सांस लेने में दिक्कत वाले, सेप्सिस वाले शिशुओं में से 30 फीसदी में एक्यूट किडनी इंजरी प्रभावित करती है, जिससे मौत की दर बढ़ जाती है।
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संयोजक डॉ. समृद्धि गुप्ता ने बताया कि 5 साल से कम उम्र के किडनी फेल होने वाले बच्चों की खून की डायलिसिस आसान नहीं है। ऐसे में परिजन को प्रशिक्षण देकर पेट के पानी की डायलिसिस कर सकते हैं। कार्यक्रम में आईपीए के अध्यक्ष डॉ. अमरकांत गुप्ता, सचिव डाॅ. योगेश दीक्षित, डॉ. विन मित्तल, डॉ. प्रवेगगोयल, डॉ. मधुकर गुप्ता, डॉ. राकेश गुप्ता मौजूद रहे।
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दिल्ली के लेडी हार्डिंग मेडिकल कॉलेज के पीडियाट्रिक नेफ्रोलॉजी डिवीजन के निदेशक डॉ. अभिजीत शाह ने कहा कि पीआईसीयू में भर्ती 25-30 फीसदी बच्चों में किडनी की गंभीर परेशानी मिल रही है। बच्चों को मामूली दर्द हुआ और बिना डॉक्टरी परामर्श के झट से दर्द निवारक दवा दे दी। ऐसी स्थिति में कई बार बच्चों की किडनी भी फेल हो जाती है।
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यूनिवर्सिटी कॉलेज ऑफ मेडिकल साइंस एंड जीटीबी हॉस्पिटल दिल्ली के निदेशक प्रो. प्रेरणा बत्रा ने कहा कि समय पूर्व पैदा होने वाले, वजन कम होने और सांस लेने में दिक्कत वाले, सेप्सिस वाले शिशुओं में से 30 फीसदी में एक्यूट किडनी इंजरी प्रभावित करती है, जिससे मौत की दर बढ़ जाती है।
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संयोजक डॉ. समृद्धि गुप्ता ने बताया कि 5 साल से कम उम्र के किडनी फेल होने वाले बच्चों की खून की डायलिसिस आसान नहीं है। ऐसे में परिजन को प्रशिक्षण देकर पेट के पानी की डायलिसिस कर सकते हैं। कार्यक्रम में आईपीए के अध्यक्ष डॉ. अमरकांत गुप्ता, सचिव डाॅ. योगेश दीक्षित, डॉ. विन मित्तल, डॉ. प्रवेगगोयल, डॉ. मधुकर गुप्ता, डॉ. राकेश गुप्ता मौजूद रहे।