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MBBS: एसएन मेडिकल कालेज में एमबीबीएस की बढ़ीं 72 सीटें, 200 छात्र ले सकेंगे प्रवेश
Thu, 27 Jun 2024 04:43 PM IST
धीरेन्द्र सिंह
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
Published by: धीरेन्द्र सिंह
Updated Thu, 27 Jun 2024 04:43 PM IST
सार
एसएन मेडिकल कालेज में अभी तक एमबीबीएस की 128 सीटों पर छात्रों को प्रवेश दिया जाता था। सीट बढ़ाये जाने के प्रस्ताव को राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (एनएमसी), नई दिल्ली द्वारा मंजूरी दे दी है।
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एसएन मेडिकल कॉलेज
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
मिनी एम्स बनने जा रहे एसएन मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस की 72 सीटें बढ़ गई हैं। अब 200 सीटें हो गई हैं, अभी 128 थीं। नए सत्र से 200 छात्र-छात्राएं प्रवेश ले सकेंगे। प्राचार्य डॉ. प्रशांत गुप्ता ने बताया कि 1000 करोड़ रुपये से एसएन कॉलेज मिनी एम्स की तर्ज पर विकसित किया जा रहा है। इसमें करीब 1800 बेड हो जाएंगे। ऐेसे में कॉलेज ने नेशनल मेडिकल कमीशन (एनएमसी) को 72 सीट बढ़ाने के लिए प्रस्ताव भेजा था। इस पर मंजूरी मिल गई है। अब परास्नातक की सीटें भी बढ़ने की उम्मीद बंध गई हैं।
अभी एसएन में पीजी की 166 सीटें हैं, इसको भी 200 सीट करने के लिए प्रस्ताव भेजा है। एसएन में 200 सीटें होने से मेडिकल में प्रवेश पाने वाले छात्रों को राहत मिलेगी। नए सत्र (2024-25) से काउंसिलिंग के जरिये इसमें प्रवेश होगा।
1939 में शुरू हुई थी डिग्री
ब्रिटिश काल में उत्तर प्रदेश के तत्कालीन लेफ्टिनेंट गवर्नर सर जेम्स थॉमसन के नाम पर 1854 में थॉमसन स्कूल की स्थापना हुई। इसी साल आगरा मेडिकल स्कूल से संबद्ध किया गया। 1857 में भारतीय चिकित्सकों का पहला बैच पास हुआ। पहले प्रधानाचार्य सर्जन डॉ. जॉन मरे थे। 1872 में एलएमपी कोर्स शुरू हुआ, जिसे उत्तर प्रदेश राज्य मेडिकल फैक्ल्टी की ओर से एलएसएमएफ में बदल दिया गया। 1939 में एमबीबीएस की डिग्री शुरू हुई, तब 47 सीटें थीं। इसे आगरा विश्वविद्यालय से संबद्ध किया। 1944 में एमबीबीएस का पहला बैच पास हुआ। 1947 में उतर प्रदेश की राज्यपाल डॉ. सरोजनी नायडू के नाम पर नाम रखा गया। 1962 में एमबीबीएस की 60 सीटें की और 1976 में 128 हो गईं। 2011-12 में इसकी सीटें बढ़ाकर 150 कीं, लेकिन एक सत्र के बाद मानक पूरे नहीं कर पाने के चलते 2013-14 में फिर 128 सीटें ही रह गईं।
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अभी एसएन में पीजी की 166 सीटें हैं, इसको भी 200 सीट करने के लिए प्रस्ताव भेजा है। एसएन में 200 सीटें होने से मेडिकल में प्रवेश पाने वाले छात्रों को राहत मिलेगी। नए सत्र (2024-25) से काउंसिलिंग के जरिये इसमें प्रवेश होगा।
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1939 में शुरू हुई थी डिग्री
ब्रिटिश काल में उत्तर प्रदेश के तत्कालीन लेफ्टिनेंट गवर्नर सर जेम्स थॉमसन के नाम पर 1854 में थॉमसन स्कूल की स्थापना हुई। इसी साल आगरा मेडिकल स्कूल से संबद्ध किया गया। 1857 में भारतीय चिकित्सकों का पहला बैच पास हुआ। पहले प्रधानाचार्य सर्जन डॉ. जॉन मरे थे। 1872 में एलएमपी कोर्स शुरू हुआ, जिसे उत्तर प्रदेश राज्य मेडिकल फैक्ल्टी की ओर से एलएसएमएफ में बदल दिया गया। 1939 में एमबीबीएस की डिग्री शुरू हुई, तब 47 सीटें थीं। इसे आगरा विश्वविद्यालय से संबद्ध किया। 1944 में एमबीबीएस का पहला बैच पास हुआ। 1947 में उतर प्रदेश की राज्यपाल डॉ. सरोजनी नायडू के नाम पर नाम रखा गया। 1962 में एमबीबीएस की 60 सीटें की और 1976 में 128 हो गईं। 2011-12 में इसकी सीटें बढ़ाकर 150 कीं, लेकिन एक सत्र के बाद मानक पूरे नहीं कर पाने के चलते 2013-14 में फिर 128 सीटें ही रह गईं।
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