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रात नौ बजे फोन कर पूछा मासूम बेटे का हाल, तीन घंटे बाद आ गई पिता के शहादत की खबर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला मथुरा
Updated Tue, 29 May 2018 10:26 AM IST
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शहीद विक्रम सिंह अधाना- फाइल फोटो
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देश की हिफाजत के लिए सरहद पर तैनात मथुरा का एक और बेटा शहीद हो गया। जम्मू कश्मीर के पुलवामा में आतंकियों ने रविवार देर रात सेना के 50 राष्ट्रीय राइफल्स के कैंप पर हमला किया।
हमले में मथुरा की छाता तहसील के गांव लाड़पुर निवासी सेना के जवान विक्रम सिंह अधाना शहीद हो गए। वहीं एक नागरिक की भी मौत हो गई। विक्रम के शहीद होने की खबर से परिवार में कोहराम मच गया।
परिवार वालों का बुरा हाल था। गांव वाले ढांढस बंधाते, लेकिन जिसका बेटा चला जाए उसे भला कौन संभाल सकता है। विक्रम सिंह दो महीने की छुट्टी लेकर गांव आए थे।
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हमले में मथुरा की छाता तहसील के गांव लाड़पुर निवासी सेना के जवान विक्रम सिंह अधाना शहीद हो गए। वहीं एक नागरिक की भी मौत हो गई। विक्रम के शहीद होने की खबर से परिवार में कोहराम मच गया।
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परिवार वालों का बुरा हाल था। गांव वाले ढांढस बंधाते, लेकिन जिसका बेटा चला जाए उसे भला कौन संभाल सकता है। विक्रम सिंह दो महीने की छुट्टी लेकर गांव आए थे।
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'मैं वापस आऊंगा...'
रोते बिखलते परिजन
- फोटो : अमर उजाला
छुट्टी बिताने के बाद 13 मई को पुलवामा के लिए निकले थे। जाते वक्त घर वालों से कहकर गए कि जल्द ही वापस आऊंगा। लेकिन कौन जानता था कि विक्रम सिंह अब कभी लौटकर नहीं आएंगे।
विक्रम सिंह ने रविवार की रात को करीब सवा नौ बजे पिता बलराम और भाई से बात की थी। दरअसल पिछले कुछ दिनों से विक्रम के दो वर्षीय बेटे वंश की तबीयत खराब चल रही थी।
पिता ने उसका हाल पूछा था। कहा था कि उसका ख्याल रखें। छोटे भाई से भी बात की थी। सभी का हालचाल पूछा था। इसके बाद रात 12 बजे उनकी शहादत की खबर आई गई।
पुलवामा में आतंकियों से लड़ते हुए विक्रम के पैर में गोली लगी थी। उन्हें आर्मी अस्पताल ले जाया गया। जहां उन्होंने दम तोड़ दिया। इस खबर से परिवार में कोहराम मच गया।
विक्रम सिंह ने रविवार की रात को करीब सवा नौ बजे पिता बलराम और भाई से बात की थी। दरअसल पिछले कुछ दिनों से विक्रम के दो वर्षीय बेटे वंश की तबीयत खराब चल रही थी।
पिता ने उसका हाल पूछा था। कहा था कि उसका ख्याल रखें। छोटे भाई से भी बात की थी। सभी का हालचाल पूछा था। इसके बाद रात 12 बजे उनकी शहादत की खबर आई गई।
पुलवामा में आतंकियों से लड़ते हुए विक्रम के पैर में गोली लगी थी। उन्हें आर्मी अस्पताल ले जाया गया। जहां उन्होंने दम तोड़ दिया। इस खबर से परिवार में कोहराम मच गया।