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मथुरा: श्रद्धा और भक्ति के साथ इस्कॉन मंदिर में मनाई बलराम जयंती
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इस्कॉन मंदिर में बलराम जयंती महोत्सव में बलराम जी का पंचामृत अभिषेक करते मंदिर के सेवायत।
- फोटो : VRINDAVAN
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वृंदावन (मथुरा)। श्रावण पूर्णिमा के अवसर पर वृंदावन के श्रीकृष्ण बलराम इस्कॉन मंदिर में भगवान श्रीकृष्ण के ज्येष्ठ भ्राता बलरामजी की जयंती श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाई गई। देश और विदेश से आए भक्तों ने भक्ति का आनंद लिया।
रविवार को इस्कॉन मंदिर के प्रांगण में बलराम जयंती की धूम रही। सुबह मंदिर में बलराम जी के श्री विग्रह का मंत्रोच्चारण के मध्य इस्कॉन के भक्तों के द्वारा अभिषेक किया गया। मंदिर प्रांगण हरिनाम संकीर्तन से गुंजायमान हुआ। सुबह मंदिर को विभिन्न प्रकार के फूलों और गुब्बारों से सजाया गया।
इससे पूर्व मंदिर में सुबह मंगला आरती, शृंगार दर्शन के दर्शन हुए। सुबह 10 बजे शंख, घंटे और घड़ियाल की ध्वनि तथा वेद मंत्रोच्चारण के मध्य ब्रजराज भगवान बलराम का दूध, दही, घी, बूरा, शहद, यमुना जल आदि जड़ी बूटियों से पंचामृत अभिषेक कराया गया। देश और विदेशी से आए भक्त मृदंग की थाप पर हरिनाम संकीर्तन पर थिरकते रहे। मंदिर के मुख्य पुजारी मुकुंददत्त दास ने पूजा-अर्चना कराई।
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कोरोना आपदा के चलते मंदिर में सरकारी गाइडलाइन का अनुपालन करते हुए भक्तों को प्रवेश दिया गया। अध्यक्ष पंचगौड़ा दास, शंखधारी दास, गणपति दास, रविलोचन दास एवं बिमलकृष्ण दास आदि के साथ-साथ अमेरिका, कनाडा, रसिया, आस्ट्रेलिया, ब्राजील आदि देशों के भक्तों के साथ भारत के कई राज्यों से आए भक्त उपस्थित थे।
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रविवार को इस्कॉन मंदिर के प्रांगण में बलराम जयंती की धूम रही। सुबह मंदिर में बलराम जी के श्री विग्रह का मंत्रोच्चारण के मध्य इस्कॉन के भक्तों के द्वारा अभिषेक किया गया। मंदिर प्रांगण हरिनाम संकीर्तन से गुंजायमान हुआ। सुबह मंदिर को विभिन्न प्रकार के फूलों और गुब्बारों से सजाया गया।
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इससे पूर्व मंदिर में सुबह मंगला आरती, शृंगार दर्शन के दर्शन हुए। सुबह 10 बजे शंख, घंटे और घड़ियाल की ध्वनि तथा वेद मंत्रोच्चारण के मध्य ब्रजराज भगवान बलराम का दूध, दही, घी, बूरा, शहद, यमुना जल आदि जड़ी बूटियों से पंचामृत अभिषेक कराया गया। देश और विदेशी से आए भक्त मृदंग की थाप पर हरिनाम संकीर्तन पर थिरकते रहे। मंदिर के मुख्य पुजारी मुकुंददत्त दास ने पूजा-अर्चना कराई।
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कोरोना आपदा के चलते मंदिर में सरकारी गाइडलाइन का अनुपालन करते हुए भक्तों को प्रवेश दिया गया। अध्यक्ष पंचगौड़ा दास, शंखधारी दास, गणपति दास, रविलोचन दास एवं बिमलकृष्ण दास आदि के साथ-साथ अमेरिका, कनाडा, रसिया, आस्ट्रेलिया, ब्राजील आदि देशों के भक्तों के साथ भारत के कई राज्यों से आए भक्त उपस्थित थे।