{"_id":"5edfc0dd8ebc3e42c0411f3a","slug":"mastermind-tric-of-interview-of-teacher","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"फर्जी शिक्षिका प्रकरणः बेहद शातिर है मास्टरमाइंड, जालसाज ने साक्षात्कार में अपनाई थी ये 'रणनीति'","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
फर्जी शिक्षिका प्रकरणः बेहद शातिर है मास्टरमाइंड, जालसाज ने साक्षात्कार में अपनाई थी ये 'रणनीति'
Wed, 10 Jun 2020 12:04 AM IST
Abhishek Saxena
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कासगंज
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कासगंज
Published by: Abhishek Saxena
Updated Wed, 10 Jun 2020 12:04 AM IST
सार
- हाई मैरिट के आधार पर मिलती थी नौकरी
- कई जिलों में सामने आया मामला
विज्ञापन
कासगंज की शिक्षिका
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
बेसिक शिक्षा विभाग के कस्तूरबा विद्यालयों में अनामिका के नाम पर नौकरी दिलाने का फर्जीवाड़ा करने वाला मास्टरमाइंड बेहद ही शातिर है। इसी के चलते अनामिका के नाम पर नौकरी करने वालीं युवतियां साक्षात्कार खत्म होने के समय से कुछ देर पहले ही पहुंचती थी। इस दौरान उनसे विस्तृत पूछताछ नहीं हो पाती थी। हाई मेरिट होने के कारण नौकरी उन्हें मिल जाती थी।
कासगंज में मिली फर्जी अनामिका शुक्ला की जांच में पता चला कि वह साक्षात्कार में अंतिम समय में पहुंची थी। उस समय साक्षात्कार कमेटी उठने ही वाली थी, लेकिन उसने कमेटी के समक्ष अपनी परेशानियां बताते हुए हाई मैरिट दस्तावेज दिखाए तो कमेटी ने उसे दस्तावेजों के आधार पर नियुक्त कर दिया। पूछताछ में फर्जी शिक्षिका अनामिका उर्फ प्रिया उर्फ सुप्रिया ने यह स्वीकार किया है कि जालसाज ने ही उसे देरी से पहुंचने के लिए कहा था, ताकि ना ही उससे विस्तृत पूछताछ हो ना ही भीड़भाड़ का सामना करना पड़े।
अन्य जिलों में हुई जांच में भी यही बात सामने आई है। सहारनपुर के बीएसए रमेंद्र कुमार ने बताया कि यहां साक्षात्कार देने वाली अनामिका शुक्ला भी देरी से पहुंची थी। कासगंज बीएसए ने रायबरेली, आजमगढ़ सहित अन्य जिलों के बीएसए से भी इस तथ्य पर बातचीत की। वहां भी लेट पहुंचने की बात कही गई।
विज्ञापन
विज्ञापन
कासगंज में मिली फर्जी अनामिका शुक्ला की जांच में पता चला कि वह साक्षात्कार में अंतिम समय में पहुंची थी। उस समय साक्षात्कार कमेटी उठने ही वाली थी, लेकिन उसने कमेटी के समक्ष अपनी परेशानियां बताते हुए हाई मैरिट दस्तावेज दिखाए तो कमेटी ने उसे दस्तावेजों के आधार पर नियुक्त कर दिया। पूछताछ में फर्जी शिक्षिका अनामिका उर्फ प्रिया उर्फ सुप्रिया ने यह स्वीकार किया है कि जालसाज ने ही उसे देरी से पहुंचने के लिए कहा था, ताकि ना ही उससे विस्तृत पूछताछ हो ना ही भीड़भाड़ का सामना करना पड़े।
विज्ञापन
अन्य जिलों में हुई जांच में भी यही बात सामने आई है। सहारनपुर के बीएसए रमेंद्र कुमार ने बताया कि यहां साक्षात्कार देने वाली अनामिका शुक्ला भी देरी से पहुंची थी। कासगंज बीएसए ने रायबरेली, आजमगढ़ सहित अन्य जिलों के बीएसए से भी इस तथ्य पर बातचीत की। वहां भी लेट पहुंचने की बात कही गई।
विज्ञापन
लेट पहुंचने के कारण नहीं मिली थी एटा में नौकरी
एटा में भी अनामिका शुक्ला के नाम पर वर्ष 2018 में एक युवती नौकरी के लिए साक्षात्कार देने पहुंची थी। लेकिन साक्षात्कार खत्म होने के दो घंटे लेट होने के कारण उसे नौकरी नहीं मिली थी।
अनामिका के दस्तावेजों के आधार पर नियुक्ति की गई थी। फर्जी शिक्षिका साक्षात्कार के बिल्कुल अंतिम समय में पहुंची थी। अन्य जिलों में भी इस नाम के लोगों का देरी से पहुंचने की बात सामने आई है। इससे प्रतीत हो रहा है कि निश्चित ही जालसाज रणनीति के तहत ही सभी को लेट भेज रहा था। - मनोजगिरी, डायट प्राचार्य।
एटा में भी अनामिका शुक्ला के नाम पर वर्ष 2018 में एक युवती नौकरी के लिए साक्षात्कार देने पहुंची थी। लेकिन साक्षात्कार खत्म होने के दो घंटे लेट होने के कारण उसे नौकरी नहीं मिली थी।
अनामिका के दस्तावेजों के आधार पर नियुक्ति की गई थी। फर्जी शिक्षिका साक्षात्कार के बिल्कुल अंतिम समय में पहुंची थी। अन्य जिलों में भी इस नाम के लोगों का देरी से पहुंचने की बात सामने आई है। इससे प्रतीत हो रहा है कि निश्चित ही जालसाज रणनीति के तहत ही सभी को लेट भेज रहा था। - मनोजगिरी, डायट प्राचार्य।
फर्जी शिक्षिका से मानदेय की रिकवरी की तैयारी
अनामिका के नाम फर्जी शिक्षिका बन मानदेय लेती रही सुप्रिया से अब रिकवरी की तैयारी की जा रही है। बीएसए ने सहायक लेखाधिकारी और खंड शिक्षाधिकारी को रिकवरी की जिम्मेदारी सौंपी है।
वर्ष 2018 से अब तक यह फर्जी शिक्षिका कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालय से मानदेय लेती रही। फर्जीवाडा खुलने पर रिकवरी करने का जिम्मा बीएसए ने सहायक लेखाधिकारी बेसिक सुरेश कुमार और कासगंज ब्लॉक के खंड शिक्षाधिकारी राजेंद्र सिंह बोरा को सौंपा है। बीएसए ने परियोजना निदेशक को पत्र लिखकर भी मार्गदर्शन मांगा है कि इस प्रकरण की रिकवरी के लिए और क्या प्रयास किए जा सकते हैं।
कैसे बने दो आधार कार्ड
अब तक की जांच में सभी दस्तावेज फर्जी ही पाए गए हैं। लेकिन सबसे ज्यादा चौकाने वाली बात दो आधार कार्ड का होना है। आधार कार्ड एक व्यक्ति का एक ही बन सकता है। ऐसे में फर्जी शिक्षिका के दो आधार कार्ड कैसे बन गए। एक अनामिका नाम के आधार कार्ड से उसने बैंक में खाता खुलवाया है। दूसरा उसके घर से पुलिस को मिला है। इसमें सुप्रिया नाम दर्ज है।
अनामिका के नाम फर्जी शिक्षिका बन मानदेय लेती रही सुप्रिया से अब रिकवरी की तैयारी की जा रही है। बीएसए ने सहायक लेखाधिकारी और खंड शिक्षाधिकारी को रिकवरी की जिम्मेदारी सौंपी है।
वर्ष 2018 से अब तक यह फर्जी शिक्षिका कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालय से मानदेय लेती रही। फर्जीवाडा खुलने पर रिकवरी करने का जिम्मा बीएसए ने सहायक लेखाधिकारी बेसिक सुरेश कुमार और कासगंज ब्लॉक के खंड शिक्षाधिकारी राजेंद्र सिंह बोरा को सौंपा है। बीएसए ने परियोजना निदेशक को पत्र लिखकर भी मार्गदर्शन मांगा है कि इस प्रकरण की रिकवरी के लिए और क्या प्रयास किए जा सकते हैं।
कैसे बने दो आधार कार्ड
अब तक की जांच में सभी दस्तावेज फर्जी ही पाए गए हैं। लेकिन सबसे ज्यादा चौकाने वाली बात दो आधार कार्ड का होना है। आधार कार्ड एक व्यक्ति का एक ही बन सकता है। ऐसे में फर्जी शिक्षिका के दो आधार कार्ड कैसे बन गए। एक अनामिका नाम के आधार कार्ड से उसने बैंक में खाता खुलवाया है। दूसरा उसके घर से पुलिस को मिला है। इसमें सुप्रिया नाम दर्ज है।