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परीक्षकों की लापरवाही छात्रों के भविष्य पर भारी, विश्वविद्यालय की छवि हो रही खराब

Sun, 02 Jun 2019 12:53 PM IST
मुकेश कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा Published by: मुकेश कुमार Updated Sun, 02 Jun 2019 12:53 PM IST
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many mistake found in mark sheets of dr bhimrao ambedkar university agra
डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय आगरा
आगरा के डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय के परीक्षकों की लापरवाही छात्रों के भविष्य पर भारी पड़ रही है। सूचना अधिकार अधिनियम (आरटीआई) के तहत छात्र-छात्राओं को जो उत्तर पुस्तिकाएं दी जा रही हैं, उनमें मूल्यांकन कार्य में बरती गई लापरवाही सामने आ रही है। जिससे विश्वविद्यालय की छवि भी खराब हो रही है।
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परीक्षकों की लापरवाही के तीन मामले एक माह के अंदर सामने आ चुके हैं। एसएन मेडिकल कॉलेज के छात्र की कॉपी में कुछ प्रश्नों का मूल्यांकन ही नहीं किया गया था। हाईकोर्ट ने तीन परीक्षकों से कॉपी का मूल्यांकन कराया और छात्र को छह की जगह 20 अंक प्रदान किए। पहले वो अनुत्तीर्ण था, बाद में उत्तीर्ण हो गया। 
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शुक्रवार को एफएच मेडिकल कॉलेज के एमबीबीएस के छात्र अभिषेक गुप्ता, हेमंत खत्री का प्रकरण सामने आया। इन दोनों छात्रों को अनुत्तीर्ण दर्शाया गया है। आरटीआई के तहत कापी देखी तो पाया कि परीक्षक ने अंकों का जोड़ ठीक से नहीं किया था। 
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मूल्यांकन कार्य पर सवाल

वहीं, कई कॉलेजों के छात्र-छात्राएं अधिकारियों के समक्ष मूल्यांकन कार्य पर सवाल खड़ा कर रहे हैं। कुछ विषयों में बड़ी संख्या में छात्र-छात्राओं को शून्य अंक प्रदान किए गए हैं। आरटीआई के तहत कॉपी मांगने वाले छात्रों की संख्या बढ़ती जा रही है। 

‘परीक्षा परिणाम जल्द देने के चक्कर में बाहर से परीक्षक बुलाए जाते हैं। इनका संबंधित विश्वविद्यालयों से सत्यापन कराया जाना चाहिए। अयोग्य शिक्षक को परीक्षक नहीं बनाया जाना चाहिए। एक दिन में निर्धारित कापियों का ही मूल्यांकन कराया जाए। छात्र हित सर्वोपरि है, इस तरह की गलतियां न हो, इसके लिए परीक्षकों पर अंकुश जरूरी है।’ - डॉ. निशांत चौहान, महामंत्री, औटा

‘छात्रों के साथ अन्याय न हो, इसके लिए आरटीआई के तहत कापी दिखाने की व्यवस्था की गई है। अब चैलेंज मूल्यांकन की व्यवस्था की जा रही है। परीक्षकों को अपने दायित्व को समझना होगा। परीक्षक की लापरवाही सामने आने पर चेतावनी भी दी जा रही है। अभी हुई परीक्षा समिति की बैठक में आठ परीक्षकों को नोटिस जारी करने का निर्णय लिया गया।’ - डॉ. गिरजाशंकर शर्मा, पीआरओ, विश्वविद्यालय 
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