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बकरी का स्वर्गवास और तेरहवीं की दावत, कॉमेडी नहीं ये है सच्ची खबर
ब्यूरो/अमर उजाला भोगांव (मैनपुरी)
Updated Tue, 25 Jul 2017 01:50 PM IST
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बकरी मरने के बाद तेरहवीं का भोज
- फोटो : अमर उजाला
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आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में जहां लोग इंसान की परवाह नहीं करते। वहीं दूसरी ओर मैनपुरी के थाना भोगांव क्षेत्र के गांव तोलकपुर में पशुपालक ने पशु प्रेम की मिसाल पेश की है। एक बकरी मरने के बाद पशु मालिक ने उसकी तेरहवीं का भोज किया। सोमवार को आयोजित भंडारा में सैकड़ों ग्रामीण शामिल हुए।
पशु स्वामी की मानें तो उसने बकरी को बच्चे की तरह पाला था। उसकी आत्मा की शांति के लिए यह कार्यक्रम किया। 14 जुलाई को उनकी बकरी मर गई थी। भंडारे में आए ग्रामीण भी बता रहे थे कि महावीर ने बकरी को बचपन से बेहद लाड़ प्यार से पाला था।
वह उसकी अपने बच्चे की तरह की देखभाल किया करते थे। मरने के बाद वह बेहद परेशान है। वहीं पशु प्रेम के चलते सोमवार को महावीर ने घर पर बकरी की आत्मा की शांति के लिए भंडारा किया।
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बाकायदा कार्ड छपवाकर गांव में बांटे गए, जिसमें लोगों से भंडारे में शामिल होकर बकरी की आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना करने की बात कही गई। शाम को भंडारा आयोजन में सैकड़ों ग्रामीण शामिल हुए।
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पशु स्वामी की मानें तो उसने बकरी को बच्चे की तरह पाला था। उसकी आत्मा की शांति के लिए यह कार्यक्रम किया। 14 जुलाई को उनकी बकरी मर गई थी। भंडारे में आए ग्रामीण भी बता रहे थे कि महावीर ने बकरी को बचपन से बेहद लाड़ प्यार से पाला था।
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वह उसकी अपने बच्चे की तरह की देखभाल किया करते थे। मरने के बाद वह बेहद परेशान है। वहीं पशु प्रेम के चलते सोमवार को महावीर ने घर पर बकरी की आत्मा की शांति के लिए भंडारा किया।
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बाकायदा कार्ड छपवाकर गांव में बांटे गए, जिसमें लोगों से भंडारे में शामिल होकर बकरी की आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना करने की बात कही गई। शाम को भंडारा आयोजन में सैकड़ों ग्रामीण शामिल हुए।