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सरकारी व्यवस्था से नहीं लड़ सकी...और जिंदगी की जंग हार गई कुपोषण की शिकार महिला

Tue, 16 Jun 2020 09:43 AM IST
Abhishek Saxena न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कासगंज
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कासगंज Published by: Abhishek Saxena Updated Tue, 16 Jun 2020 09:43 AM IST
सार

पांच दिन पहले एंबुलेंस चालक अस्पताल के गेट पर छोड़कर चला गया था
 

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Malnourished Woman Died In Hospital Kasganj News
जमीन पर लेटे मां-बेटे (फाइल फोटो) - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

कासगंज के थाना दरियावगंज निवासी कुपोषण की शिकार सुनीता सरकारी व्यवस्था में लापरवाही से पांच दिन बाद जिंदगी की जंग हार गई। सही ढंग से इलाज न मिलने से उसने रविवार देर शाम दम तोड़ दिया।   
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कुपोषण के कारण सुनीता काफी बीमार हो गई थी। 11 जून को उसकी तबियत खराब होने पर ग्राम प्रधान बाबूराम ने एंबुलेंस बुलाकर उसे व उसके बेटे नगेंद्र को अस्पताल भेजा, लेकिन चालक दोनों को अस्पताल के गेट पर ही छोड़कर चला गया। इसके बाद चिकित्साधिकारी डॉ. अंजू ने जानकारी मिलने पर उसका प्राथमिक उपचार करवाया और जिला अस्पताल रेफर कर दिया। वहां भी सही से उपचार नहीं मिला।
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शर्मनाक: कुपोषित मां-बेटे को अस्पताल के बाहर छोड़कर चला गया एंबुलेंस चालक
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दोनों की कोई जांच नहीं की गई। यहां तक कि अगले दिन दोनों को कुछ दवा देकर डिस्चार्ज कर दिया। इसके बाद से दोनों की हालत बिगड़ती गई। आखिर रविवार देर रात सुनीता की मौत हो गई। परिवार के पास इतने भी पैसे नहीं थे कि सुनीता का अंतिम संस्कार हो सके। परिवार की हालत देखकर आसपास के लोगों ने चंदा करके अंत्येष्टि के लिए पैसे की व्यवस्था की। इसके बाद गांव में ही उसका अंतिम संस्कार कर दिया गया। उसके सबसे बड़े बेटे अंशू ने मां को मुखाग्नि दी। 
 

मामले की जांच होगी: सीडीओ
कुपोषण की शिकार महिला की मौत का मामला संज्ञान में आया है। मामले की जांच कराई जाएगी। मां की मौत के बाद अनाथ हुए बच्चों की प्रशासन पूरी मदद करेगा। उनको योजनाओं का लाभ दिलाया जाएगा।  -तेज प्रताप मिश्र, मुख्य विकास अधिकारी

कुपोषण के शिकार थे मां -बेटा
मां बेटे को जब अस्पताल में भर्ती कराया गया तो वह कुपोषण के शिकार थे। इसकी कोई भी बजह हो सकती है। यह जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकता था। पटियाली से उन्हें जिला अस्पताल रेफर किया गया था- डा. अंजू चिकित्साधिकारी पटियाली स्वास्थ्य केंद्र
 
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