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2008 प्रवासी मजदूरों के बने जॉब कार्ड
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कासगंज के अहरौली में मनरेगा के तहत कार्य करते मजदूर
- फोटो : KASGANJ
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कासगंज। कोरोना संकट के चलते अपने गांव लौटे प्रवासी मजदूरों के लिए मनरेगा योजना से जोड़ने के लिए प्रयास शुरू हो गए है। ग्राम पंचायतों में इनका जॉबकार्ड बनाकर काम दिया जा रहा है। ताकि वे अपने परिवार का भरण पोषण कर सकें। अब तक 2008 मजदूरों के जॉब कार्ड बन गए हैं।
कोरोना संकट के चलते लॉकडाउन हो जाने के बाद बड़ी संख्या में प्रवासी मजदूरों के सामने जीवन यापन करने की समस्या हो गई। राजस्थान, गुजरात, महाराष्ट्र सहित अन्य राज्यों में अपना सबकुछ छोड़कर चले आए। ऐसे मेेें इनके सामने परिवार के भरण पोषण की समस्या हो गई।
इसी के चलते शासन ने क्वारंटीन की अवधि पूरी होने के बाद इन मजदूरों को ग्राम पंचायत में ही काम देने शुरू कर दिया। जिले की 423 ग्राम पंचायतों में अब तक 2008 प्रवासी मजदूरों के जॉब कार्ड बनाए जा चुके हैं। जिले में मनरेगा के तहत अब तक 20 हजार 456 मजदूरों को काम दिया गया है।
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मनरेगा योजना के तहत प्रवासी मजदूरों के काम मांगने पर उनके जॉब कार्ड बनाकर काम से से जोड़ा जा रहा है। अब तक जिन प्रवासी मजदूरों ने काम मांगा उनके जॉब कार्ड बनाए जा चुके है। -अजय कुमार, डीसी मनरेगा
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कोरोना संकट के चलते लॉकडाउन हो जाने के बाद बड़ी संख्या में प्रवासी मजदूरों के सामने जीवन यापन करने की समस्या हो गई। राजस्थान, गुजरात, महाराष्ट्र सहित अन्य राज्यों में अपना सबकुछ छोड़कर चले आए। ऐसे मेेें इनके सामने परिवार के भरण पोषण की समस्या हो गई।
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इसी के चलते शासन ने क्वारंटीन की अवधि पूरी होने के बाद इन मजदूरों को ग्राम पंचायत में ही काम देने शुरू कर दिया। जिले की 423 ग्राम पंचायतों में अब तक 2008 प्रवासी मजदूरों के जॉब कार्ड बनाए जा चुके हैं। जिले में मनरेगा के तहत अब तक 20 हजार 456 मजदूरों को काम दिया गया है।
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मनरेगा योजना के तहत प्रवासी मजदूरों के काम मांगने पर उनके जॉब कार्ड बनाकर काम से से जोड़ा जा रहा है। अब तक जिन प्रवासी मजदूरों ने काम मांगा उनके जॉब कार्ड बनाए जा चुके है। -अजय कुमार, डीसी मनरेगा