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मथुरा: सूरदास की साधनास्थली परासौली को मिला अपना नाम, राजस्व रिकॉर्ड से महमूदपुर नाम हटा
Sun, 11 Apr 2021 09:02 AM IST
मुकेश कुमार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मथुरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मथुरा
Published by: मुकेश कुमार
Updated Sun, 11 Apr 2021 09:02 AM IST
सार
- राजस्व रिकॉर्ड में महमदपुर से परासौली हुआ नाम
- राजस्व विभाग ने 24 मार्च को जारी की थी अधिसूचना
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महाकवि सूरदास की प्रतिमा
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
मथुरा जिले की गोवर्धन तहसील में महाकवि सूरदास की साधनास्थली परासौली राजस्व रिकॉर्ड में अब इसी नाम से जानी जाएगी। इससे पहले परासौली का नाम महमदपुर या महमूदपुर था, जिसे बदल दिया गया है। शासन की ओर अधिसूचना जारी होने की मिलने पर गुरुवार को परासौली गांव में मिठाई बांटी गई।
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सूरदास ब्रज रासस्थली विकास समिति परासौली मथुरा के सचिव हरिबाबू कौशिक वर्ष 1982 से परासौली गांव का नामकरण पुन: महमूदपुर से परासौली कराने के लिए मांग करते चले आ रहे थे। प्रदेश शासन के राजस्व विभाग द्वारा गत 24 मार्च को जारी की गई अधिसूचना की प्रतिलिपि के माध्यम से कौशिक ने बताया कि कई मुख्यमंत्रियों ने आश्वासन तो दिया लेकिन वे अपना वादा पूरा न कर सके।
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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने वर्ष 2018 में मांग किए जाने पर कार्रवाई शुरू कर दी और भारत सरकार के भी सभी संबंधित विभागों से अनापत्ति प्रमाणपत्र लेकर विगत 24 मार्च को राज्यपाल की ओर से अधिसूचना भी जारी करा दी गई। इस पर अब सरकार ने मुहर लगा दी है।
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असल में इस गांव का नाम ऋषि पाराशर की जन्मस्थली होने के कारण परासौली पड़ा था। वल्लभाचार्य के अनुसार भगवान कृष्ण एवं राधारानी ने यहां चंद्र सरोवर के निकट ब्रह्मा जी के एक क्षण यानि छह मास तक रास किया था। जिससे इस स्थली का माहात्म्य बढ़ गया।
इसके बाद महाकवि सूरदास की साधनास्थली के रूप में विख्यात होने के बाद यह गांव साहित्य एवं संस्कृति की दृष्टि से और भी ज्यादा महत्वपूर्ण हो गया। मुगल काल में इसका नाम बदलकर महमूदपुर कर दिया गया। अब ब्रजतीर्थ विकास समिति के उपाध्यक्ष शैलजाकांत मिश्र की मदद से मुख्यमंत्री एवं समिति के अध्यक्ष योगी आदित्यनाथ के माध्यम से यह संभव हो सका है।
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इसके बाद महाकवि सूरदास की साधनास्थली के रूप में विख्यात होने के बाद यह गांव साहित्य एवं संस्कृति की दृष्टि से और भी ज्यादा महत्वपूर्ण हो गया। मुगल काल में इसका नाम बदलकर महमूदपुर कर दिया गया। अब ब्रजतीर्थ विकास समिति के उपाध्यक्ष शैलजाकांत मिश्र की मदद से मुख्यमंत्री एवं समिति के अध्यक्ष योगी आदित्यनाथ के माध्यम से यह संभव हो सका है।
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