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महाशिवरात्रि: आगरा के कैलाश महादेव मंदिर में हैं दो शिवलिंग, परशुराम और उनके पिता ने किए स्थापित

Mon, 28 Feb 2022 03:50 PM IST
मुकेश कुमार अमर उजाला ब्यूरो, आगरा
अमर उजाला ब्यूरो, आगरा Published by: मुकेश कुमार Updated Mon, 28 Feb 2022 03:50 PM IST
सार

मंगलवार का महाशिवरात्रि है। इस अवसर पर आगरा के प्रमुख शिवालयों में भगवान भोलेनाथ के भक्तों की भीड़ उमड़ेगी। यमुना किनारे स्थित कैलाश महादेव मंदिर भी आस्था का प्रमुख केंद्र है।  

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Mahashivratri Two Shivlings in the Kailash Mahadev Temple on the banks of Yamuna in Agra
कैलाश महादेव मंदिर में स्थापित शिवलिंग - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

आगरा में यमुना किनारे स्थित कैलाश महादेव मंदिर का इतिहास 10 हजार वर्ष पुराना है। महंत गौरव गिरि ने बताया कि त्रेता युग में भगवान विष्णु के छठवें अवतार भगवान परशुराम और उनके पिता ऋषि जमदग्नि कैलाश पर्वत पर भगवान शिव की आराधना करने गए। दोनों पिता-पुत्र की तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उन्हें वरदान मांगने को कहा। 

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उन्होंने शिव भगवान से हमेशा साथ रहने का आशीर्वाद मांगा। भगवान शिव ने दोनों को एक-एक शिवलिंग भेंट किया। शिवलिंग लेकर दोनों पिता पुत्र चल दिए। यमुना किनारे अग्रवन में बने आश्रम से छह किलोमीटर पहले रात में विश्राम के लिए रुके गए। 
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कैलाश मंदिर से दूर है भगवान परशुराम की माता का धाम 
सुबह दोनों शिवलिंग की पूजा करने पहुंचे, तो शिवलिंग वहीं स्थापित हो गए। काफी कोशिशों के बाद भी जब नहीं उठे तो उसी स्थान पर शिवलिंग की पूजा अर्चना कर स्थापित कर दिए। भगवान परशुराम की माता का आश्रम रेणुका धाम यहां से छह किलोमीटर की दूरी पर स्थित है।

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कैलाश महादेव मंदिर के महंत गौरव गिरि ने बताया कि कैलाश से शिवलिंग लाने की वजह से यह कैलाश महादेव के नाम से जाने जाते हैं। एक ही शिवालय में दो शिवलिंग होने से इस मंदिर की मान्यता ज्यादा है।

मन को मिलती है शांति
श्रृद्धालु मदन मोहन शर्मा ने कहा कि यमुना के तट पर बने इस मंदिर में शिव के दर्शन करने के बाद मन को शांति मिलती है। भगवान भोलेनाथ भक्तों की सारी मनोकामना पूरी करते हैं।  

पूर्वजों से सुनी महिमा
श्रृद्धालु चंद्रकांत गोस्वामी ने कहा कि बचपन से इस मंदिर की महिमा को अपने पूर्वजों से सुनते आ रहे हैं। यहां आसपास के अलावा दूर दराज से भी शिवभक्त पूजा अर्चना के लिए आते हैं। 

ऐसे पहुंचे मंदिर
सिकंदरा चौराहा से एक किलोमीटर दूर बाय हाथ पर बने मोड़ के रास्ते कैलाश गांव पहुंचे। गांव में एक किलोमीटर के बाद भव्य मंदिर बना हुआ है। 

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