महाशिवरात्रि 2022: दो शुभ योग का बन रहा है संयोग, ऐसे करें भगवान भोलेनाथ की आराधना
ज्योतिषाचार्य के अनुसार इस बार महाशिवरात्रि पर शुभ मुहूर्त और संयोग के साथ ही पंचग्रही योग भी बन रहे हैं। इस योग में भगवान शिव की पूजा से विशेष आशीर्वाद मिलता है।
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फाल्गुन माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को इस बार महाशिवरात्रि का पर्व मनाया जाएगा। इस महाशिवरात्रि पर दो शुभ संयोग भी बन रहे हैं। इसमें धनिष्ठा नक्षत्र में परिघ योग और उसके बाद शिव योग है। इन विशेष संयोग के दौरान शिवजी की पूजा उत्तम मानी जाएगी।
मथुरा के पंडित अजय कुमार तैलंग ज्योतिषाचार्य ने बताया कि हिंदू पंचांग के अनुसार इस बार महाशिवरात्रि का त्योहार एक मार्च को है। चतुर्दशी तिथि सुबह 3 बजकर 16 मिनट से शुरू होगी और इसका समापन 2 मार्च प्रात:बेला में होगा।
इस समय करेंगे शिव की पूजा
महाशिवरात्रि को पहले प्रहर की पूजा 1 मार्च को सुबह 6:21 से 9:27 बजे तक करें। दूसरे प्रहर की पूजा 1 मार्च को रात्रि 9:27 बजे से 12:33 बजे तक होगी। तीसरे प्रहर की पूजा 2 मार्च को रात्रि 12:33 से सुबह 3:39 बजे तक तथा चौथे प्रहर की पूजा 2 मार्च को 3:39 से 6:45 बजे तक रहेगी।
ज्योतिषाचार्य आलोक गुप्ता ने बताया कि इस वर्ष महाशिवरात्रि पर शुभ मुहूर्त और संयोग के साथ ही पंचग्रही योग भी बन रहे हैं। इस योग में भगवान शिव की पूजा से विशेष आशीर्वाद मिलता है। उन्होंने कहा कि महाशिवरात्रि के दिन चाहे कोई भी समय हो, भगवान शिव की आराधना करनी चाहिए।
महाशिवरात्रि पर बन रहा ये योग
इस बार धनिष्ठा नक्षत्र में परिघ योग रहेगा। धनिष्ठा के बाद शतभिषा नक्षत्र रहेगा। परिघ के बाद शिवयोग रहेगा। शिवरात्रि पर 12वें भाव में मकर राशि में पंचग्रही योग रहेगा। मंगल, शुक्र, बुध और शनि के साथ चंद्र है। लग्न में कुंभ राशि में सूर्य और गुरु की युति रहेगी। चतुर्थ भाव में राहु वृषभ राशि में जबकि केतु दसवें भाव में वृश्चिक राशि में रहेगा।
साहित्याचार्य शरद चतुर्वेदी ने बताया कि महाशिवरात्रि शिव और शक्ति के मिलन की रात का पर्व है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार शिवरात्रि की रात आध्यात्मिक शक्तियां जागृत होती हैं। शुभ काल के दौरान ही महादेव और पार्वती की पूजा की जानी चाहिए।
महाशिवरात्रि को मेष राशि वालों को बेलपत्र, वृष वालों को दूध मिश्रित जल, मिथुन वालों को दही मिश्रित जल, कर्क राशि वालों को चंदन का इत्र, सिंह राशि वालों को घी का दीपक, कन्या राशि वालों को काला तिल और जल मिलाकर अभिषेक करना चाहिए।
तुला राशि वालों को जल में सफेद चंदन, वृश्चिक राशि वालों को जल और बेलपत्र, धनु राशि वालों को अबीर या गुलाल, मकर राशि वालों को भांग और धतूरा, कुंभ राशि को पुष्प, मीन राशि वालों को गन्ने का रस और केसर से अभिषेक करना चाहिए।