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इच्छेश्वर महादेव पूरी करते हैं भक्तों की मनोकामना, महाभारत काल का है यह मंदिर

Mon, 04 Mar 2019 04:26 PM IST
मुकेश कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, एटा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, एटा Published by: मुकेश कुमार Updated Mon, 04 Mar 2019 04:26 PM IST
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mahashivratri 2019 ikchheshwar mahadev temple of etah
पटना विहार स्थित इच्छेश्वर महादेव मंदिर
एटा के जलेसर क्षेत्र में पर्यटक स्थल पटना पक्षी विहार में महाभारतकालीन महादेव का मंदिर है। यहां आने वाले भक्तों की इच्छा पूरी होती हैं। इसलिए भक्त इन्हें इच्छेश्वर महादेव के नाम से पुकारते हैं। यहां हर साल सावन और शिवरात्रि पर मेले का आयोजन किया जाता है। इस बार भी महाशिवरात्रि पर मेले का आयोजन किया गया। इसमें श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। 
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बताया जाता है कि महाभारत युग में मगध के राजा जरासंध ने इस मंदिर को बनवाया था। लोगों ने बताया कि इस मंदिर का निर्माण उस समय कराया गया था, जब भगवान श्रीकृष्ण ने कंस का वध किया था। भगवान श्रीकृष्ण से बदला लेने के लिए मगध का राजा छिपकर यहां रहता था। राजा भगवान शिव शंकर का बड़ा भक्त था और उनकी पूजा-अर्चना के लिए इस मंदिर का निर्माण कराया था।
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जलेसर तहसील के पटना गांव के आसपास सैकड़ों बीघा जमीन में घना जंगल फैला हुआ है। यहां विशाल झील भी है, जिसे पक्षी पटना पक्षी विहार के नाम से जाना जाता है। बताया जाता है कि यह मगध के सम्राट जरासंध के मित्र कालिया का वन था। यहां उसका महल था। इसलिए यह स्थान राजा कालिया वन के नाम से भी जाना जाता है। 
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श्रीकृष्ण ने किया कालिया का वध

पौराणिक कथाओं एवं किदविंतियों के अनुसार भगवान श्रीकृष्ण ने इसी स्थल पर मौजूद विशाल झील में कालिया नामक दैत्य का वध किया था। इसके बाद उन्होंने रुक्मणी के साथ विवाह किया था। मुगलों के शासन में इस मंदिर को तोड़ने का प्रयास किया गया था। मुगल शासक औरंगजेब ने मंदिर को तोपों से निशाना बनाया, लेकिन मंदिर में स्थापित शिवलिंग को कोई नुकसान नहीं पहुंचा सका। 

स्थानीय लोग अंकुश गुप्ता, रिंकू ठाकुर, धीरज कुमार ने बताया कि इच्छेश्वर महादेव के दर्शन करने से सारे कष्ट दूर हो जाते हैं। भोले बाबा सभी की मनोकामनाएं पूर्ण करते हैं। उन्होंने बताया कि भोले बाबा के दर्शन करने के लिए हर वर्ष सैकड़ों श्रद्धालु पहुंचते हैं। महाशिवरात्रि के दिन बाबा के दर्शन करना शुभ होता है। इच्छेश्वर महादेव का मंदिर महाभारत काल का है। मंदिर के साथ कई कहानियां जुड़ी हैं। 
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